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हिमाचल विधानसभा का मानसून सेशन आज से:BJP विधायकों पर FIR मामले में घिरेगी सरकार; विपक्ष ला सकता है स्थगन प्रस्ताव




हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सेशन शुक्रवार से शुरू हो रहा है। 10 दिन तक चलने वाले इस सत्र में प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक और जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। खासकर भाजपा विधायकों और उनके परिजनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और विभिन्न मामलों में चल रही जांच को लेकर सदन में सियासी तपिश देखने को मिल सकती है। भाजपा इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठा सकती है। विपक्ष की ओर से इस मामले पर चर्चा की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाने की संभावना है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है। वहीं, सरकार की ओर से इन मामलों को कानून के तहत जांच और कार्रवाई का हिस्सा बताया जा सकता है। FIR और पूछताछ के मुद्दे पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष भाजपा से जुड़े कई विधायकों व नेताओं पर अलग-अलग मामलों में एफआईआर और जांच की कार्रवाई हुई है। धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा मामला दर्ज हुआ है। वहीं, दो दिन पहले भाजपा विधायक डॉ. जनकराज पर बिना परमिशन के मेडिकल कैंप लगाने के मामले में केस दर्ज किया गया। डॉ. जनकराज को हिमकेयर योजना में कथित अनियमितताओं के मामले में विजिलेंस ने पूछताछ के लिए भी बुलाया था। वह बीते गुरुवार को शिमला स्थित विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे थे और जांच में शामिल हुए। इसके अलावा पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ ऐच्छिक निधि के आवंटन से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। हमीरपुर से भाजपा विधायक आशीष शर्मा के परिजनों के खिलाफ भी खनन से जुड़े मामले में एफआईआर हुई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल और पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी के खिलाफ भी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। ऐसे में विपक्ष इन सभी मामलों को एक साथ सदन में उठाकर सरकार से जवाब मांग सकता है। स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की तैयारी भाजपा इस पूरे मामले को कानून-व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते हुए सदन में चर्चा की मांग कर सकती है। विपक्ष का फोकस इस बात पर रह सकता है कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ लगातार जांच और एफआईआर क्यों हो रही हैं और क्या सरकार जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा सकता है कि एफआईआर और जांच किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। यही मुद्दा सदन के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा कारण बन सकता है। विजयेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया के शोकोद्गार से शुरू होगी कार्यवाही विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत पूर्व विधायक विजयेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया के निधन पर शोकोद्गार से होगी। इसके बाद प्रश्नकाल होगा। प्रश्नकाल के दौरान विधायक अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। 10 दिन के सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक बारिश और मानसून से हुए नुकसान, सड़कों की बदहाली, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्तियों, रोजगार और जनहित से जुड़े दूसरे मुद्दों को सदन में उठाएंगे। 1,036 सवालों से सरकार से मांगा जाएगा जवाब मानसून सत्र के लिए विधायकों की ओर से कुल 1,036 सवाल लगाए गए हैं। इनमें 787 तारांकित और 249 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इन सवालों के जरिए विधायक अपने विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ प्रदेश स्तर के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। बारिश के कारण प्रदेश में हुए नुकसान को देखते हुए मानसून सत्र में आपदा प्रबंधन और राहत-बचाव का मुद्दा भी प्रमुख रहने की संभावना है। सड़कों, पुलों और पेयजल योजनाओं को हुए नुकसान के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को मिली राहत और सरकार की तैयारियों पर भी सवाल उठ सकते हैं। इन नियमों के तहत भी आईं सूचनाएं विधायकों की ओर से विधानसभा सचिवालय को अलग-अलग नियमों के तहत भी कई सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। नियम 62 के तहत 13, नियम 63 के तहत 2, नियम 101 के तहत 5 और नियम 130 के तहत 15 सूचनाएं मिली हैं। इनके जरिए विधायक विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में चर्चा और सरकार का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। वहीं, 27 अगस्त को गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस के लिए निर्धारित किया गया है। सत्ता पक्ष के विधायक भी सरकार को घेर सकते हैं मानसून सत्र में केवल विपक्ष ही सरकार से सवाल नहीं पूछेगा। सत्ता पक्ष के विधायक भी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं को सदन में उठाएंगे। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, सरकारी कार्यालयों में स्टाफ की कमी और विकास कार्यों में देरी जैसे स्थानीय मुद्दों पर विधायकों की ओर से सरकार से जवाब मांगा जा सकता है। ऐसे में 10 दिन चलने वाला यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने वाला है। एक तरफ विपक्ष एफआईआर और जांच के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार विकास और जनहित के मुद्दों पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के साथ विपक्ष के आरोपों का जवाब देगी। शुरुआत से ही सदन में सियासी टकराव के आसार हैं।



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