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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बाहर मंगलवार को सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। सदन के भीतर भी आउटसोर्स भर्ती को लेकर हंगामा हुआ और विपक्ष ने वॉकआउट किया। वहीं, सदन के बाहर आउटसोर्स कर्मचारियों ने उनका शोषण बंद करने की मांग की। राज्य के विभिन्न विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी 15 से 20 साल से सेवाएं दे रहे हैं। फिर भी इनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। सरकार इन्हें जब चाहे बाहर कर देती है और मानदेय भी नाममात्र दिया जा रहा है। ज्यादातर आउटसोर्स कर्मियों को मात्र 12 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है। 25 हजार कर्मचारी सेवाएं दे रहे महंगाई के मौजूद दौर में यह मानदेय ऊंट के मुंह में जीरा है। राज्य में आउटसोर्स पर सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों की संख्या लगभग 25 हजार है। ये कर्मचारी एक दशक से पॉलिसी बनाने की मांग कर रहे हैं। पूर्व सरकार के कार्यकाल में भी इन्होंने पॉलिसी की मांग को लेकर लंबा आंदोलन किया। मगर पॉलिसी नहीं बन पाई। अब मौजूदा सरकार में भी आउटसोर्स कर्मियों ने पॉलिसी की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार को तीन मांगें पूरी करने के लिए दो महीने का अल्टीमेटम दिया है। तय अवधि में मांगें पूरी नहीं होने पर आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। 15-20 साल से सेवा, फिर भी नौकरी की गारंटी नहीं आउटसोर्स कर्मचारियों ने कहा कि कई कर्मचारी 15 से 20 साल से विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। इतने लंबे समय तक काम करने के बावजूद उन्हें यह पता नहीं होता कि अगले महीने उनकी नौकरी रहेगी या नहीं। कर्मचारियों का कहना है कि कम मानदेय और नौकरी की असुरक्षा के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अब कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं: अश्वनी आउटसोर्स कर्मचारी संघ के कन्वीनर अश्वनी शर्मा ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और सरकार से जल्द समाधान की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि सीएम सुक्खू शोषित वर्ग के लिए अच्छे फैसले ले रहे हैं। ऐसे में आउटसोर्स कर्मचारियों को भी सीएम से बहुत उम्मीदें हैं।
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हिमाचल विधानसभा के बाहर आउटसोर्स कर्मियों का प्रदर्शन:पॉलिसी बनाने, मृतकों के आश्रितों को नौकरी देने की मांग; सरकार को 2 महीने का अल्टीमेटम
