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'5 बजे की ट्रेन' वाले पुलिस बैंड प्रभारी कटारे दोषी:पीएचक्यू की रिपोर्ट में भास्कर स्टिंग का जिक्र; हाईकोर्ट की तीनों बेंच में याचिका दायर




मध्य प्रदेश पुलिस बैंड भर्ती में सिलेक्शन के नाम पर ‘5 बजे की ट्रेन’ यानी 5 लाख रुपए की डील करने वाले प्रभारी सुनील कटारे को पुलिस मुख्यालय (PHQ) की जांच में दोषी पाया गया है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद शुरू हुई जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब 7वीं बटालियन के कमांडेंट हितेश चौधरी को कटारे के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तय करनी है। दूसरी ओर, भर्ती प्रक्रिया पर कानूनी शिकंजा भी कस गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भर्ती के रिजल्ट पर रोक लगाते हुए सरकार से 7 दिन में जवाब मांगा है। जबलपुर और ग्वालियर बेंच में भी याचिकाओं के जरिए भर्ती में कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई है। ‘उनका आचरण गलत था’: PHQ की जांच रिपोर्ट भास्कर के खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय ने डीआईजी सुनील पांडेय को जांच सौंपी। पांडेय ने इंस्पेक्टर सुनील कटारे को तलब कर बयान दर्ज किए और रिपोर्ट एडीजी (SAF) चंचल शेखर को सौंप दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टिंग ऑपरेशन के दौरान कटारे ने जो बातें कहीं, वे उन्हें नहीं कहनी चाहिए थीं और उनका आचरण गलत पाया गया। 4 मुलाकातों में कैमरे पर कोड वर्ड में डील: ऐसे हुआ खुलासा पुलिस बैंड भर्ती में सिलेक्शन के खेल की पड़ताल के लिए भास्कर के रिपोर्टर ने एक डमी कैंडिडेट तैयार किया और प्रभारी सुनील कटारे से संपर्क किया। चार मुलाकातों के दौरान हुई बातचीत कैमरे में रिकॉर्ड हुई। हाईकोर्ट की तीन बेंच में याचिकाएं: कहां क्या सवाल उठे पुलिस बैंड भर्ती को लेकर रिश्वत के आरोपों के साथ नियमों के उल्लंघन के दावे भी सामने आए हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट की तीन अलग-अलग बेंच में याचिकाएं दायर की गई हैं। 1. इंदौर बेंच: 3 गुना अभ्यर्थियों को बुलाने के नियम पर सवाल, रिजल्ट पर रोक इंदौर बेंच ने नीलेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए भर्ती के रिजल्ट पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ता के वकील गगन बजाड़ ने कहा कि गृह विभाग ने 679 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। नियम के मुताबिक, पदों की संख्या के तीन गुना यानी 2,037 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था, लेकिन विभाग ने 1,240 अभ्यर्थियों को बुलाया। याचिका में इसे नियमों का उल्लंघन बताया गया है। कोर्ट ने सरकार से इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों के चयन का आधार और पात्र सूची पेश करने को कहा है। अगली सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में होगी। 2. जबलपुर बेंच: पूरी भर्ती प्रक्रिया अंतिम फैसले के अधीन रणजीत सिंह ठाकुर और पवन पुट्टा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर बेंच ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया। याचिका के मुताबिक, रूलबुक की कंडिका 8 के तहत एक पद के लिए तीन अभ्यर्थियों को स्किल टेस्ट/इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था। 650 से अधिक पदों के हिसाब से करीब 2,100 अभ्यर्थियों को बुलाया जाना था, लेकिन 1,200 की सूची जारी की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि SC, ST और UR (अनारक्षित) वर्ग का कटऑफ घोषित नहीं किया गया। कोर्ट ने विभाग को 4 सप्ताह में पूरा डेटा पेश करने का निर्देश दिया है। 3. ग्वालियर खंडपीठ: EWS छूट और भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल ग्वालियर के प्रशांत उपाध्याय ने भर्ती की पारदर्शिता को लेकर याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उन्हें वादन (इंस्ट्रूमेंट बजाने) की ‘A’ और ‘B’ दोनों चयन प्रक्रियाओं में योग्य घोषित किया गया, फिर भी अंतिम इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। याचिका में आरोप है कि पुलिस आरक्षक बैंड भर्ती में 2019 के शासनादेश का पालन नहीं किया गया। इसके तहत EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंकों में 10% की छूट का प्रावधान बताया गया है।
……………………………….. भास्कर की इस खबर के बाद एक्शन हुआ 5 बजे की ‘ट्रेन’ से पुलिस बैंड ‘नौकरी का टिकट’!:कोडवर्ड से सीट बेचने को तैयार अफसर, दफ्तर नहीं दरगाह में करते हैं सेटिंग विशेष सशस्त्र बल (SAF) के एडीजी चंचल शेखर ने भास्कर से बातचीत में दावा किया कि मध्य प्रदेश पुलिस बैंड की भर्ती प्रक्रिया फुलप्रूफ और पारदर्शी हैं, लेकिन दैनिक भास्कर के इन्वेस्टिगेशन में तस्वीर कुछ और सामने आई। मध्य प्रदेश बैंड स्कूल के प्रभारी और चयन समिति के सदस्य इंस्पेक्टर सुनील कटारे कैमरे पर डमी कैंडिडेट का रोल नंबर नोट करते और कोडवर्ड में रकम की डील करते दिखे। डमी कैंडिडेट के सिलेक्शन की जुगाड़ के लिए रिपोर्टर ने कटारे से चार बार मुलाकात की। पढ़ें पूरी खबर…



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