स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:ग्रंथ पढ़ना, महापुरुषों के उपदेश सुनना, सत्य को समझना और उसे जीवन में उतारना ही स्वाध्याय है
स्वाध्याय का अर्थ है- ग्रंथों का अध्ययन करना, सत्य को समझना और उसे जीवन में उतारना। शास्त्रों में कहा गया है कि स्वाध्याय का प्रमाद यानी स्वाध्याय में आलस या लापरवाही करना मृत्यु के समान है। इसलिए हमें स्वाध्याय के प्रति कभी लापरवाह नहीं होना चाहिए। शास्त्रों, महापुरुषों के उपदेशों और अपने अनुभवों से सत्य…
