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चंडीगढ़ नगर निगम के बाहर वेंडरों का हंगामा:ड्रॉ प्रोसेस पर धांधली के आरोप; दूसरे सेक्टरों में जगह आवंटित करने पर रोष




सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को चंडीगढ़ नगर निगम ने ‘आवश्यक सेवा प्रदाता’ का दर्जा खत्म होने वाले रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं को विभिन्न वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के लिए ड्रॉ निकाला। ड्रॉ के दौरान नगर निगम कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में वेंडरों ने हंगामा किया और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। वेंडरों का आरोप था कि ड्रॉ पारदर्शी तरीके से नहीं निकाला गया और उन्हें वर्षों से जहां कारोबार कर रहे हैं, वहां से कई किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है। नगर निगम के ज्वाइंट कमिशनर हिमांशु गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आज ड्रा निकाला गया करीब 498 के लिए ड्रा निकाला गया। वेंडरों का कहना था कि कई लोग 15 से 20 वर्षों से एक ही सेक्टर में अपना रोजगार चला रहे हैं। अब उन्हें दूसरे सेक्टरों में जगह आवंटित की जा रही है, जिससे उनका रोजगार प्रभावित होगा। उनका कहना था कि कई महिला वेंडर 50 से 60 वर्ष की उम्र की हैं और अकेले रेहड़ी चलाती हैं। ऐसे में वे रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर कारोबार कैसे करेंगी। एक महिला वेंडर ने कहा कि वह वर्षों से अपने सेक्टर में रेहड़ी लगा रही है, लेकिन ड्रॉ में उसे दूसरे इलाके में स्थान दिया गया। उसने सवाल उठाया कि जब वह अपने पुराने स्थान पर लोगों की पहचान और ग्राहक बना चुकी है तो उसे वहां से हटाने का क्या औचित्य है। टाउन वेंडिंग कमेटी सदस्य ने उठाए सवाल टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य मुकेश गिरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को एक स्वतंत्र समिति गठित करनी चाहिए, जो जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करे। उनका आरोप था कि नगर निगम के अधिकारी नियमों के अनुसार काम करने के बजाय अपने स्तर पर फैसले ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई वेंडरों की उम्र काफी अधिक हो चुकी है। ऐसे लोगों के लिए रोजाना लंबी दूरी तक रेहड़ी ले जाकर कारोबार करना व्यावहारिक नहीं है। प्रशासन को वेंडरों की सुविधा और उनकी आजीविका को ध्यान में रखते हुए स्थान आवंटित करना चाहिए। 17 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया विशेष दर्जा करीब 17 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन की 17 जुलाई 2020 की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया था, जिसके तहत छोले-भटूरे, कुलचे-छोले, परांठे, तंदूर संचालकों, फल-सब्जी विक्रेताओं और धार्मिक स्थलों के बाहर फूल बेचने वालों सहित कई रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं को ‘आवश्यक सेवा प्रदाता’ (एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर) का विशेष दर्जा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था केवल कोरोना महामारी के दौरान लागू की गई थी। महामारी समाप्त होने के बाद इसे जारी रखने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम को निर्देश दिए थे कि ऐसे सभी अधिकृत वेंडरों की पहचान कर उन्हें निर्धारित वेंडिंग जोन में स्थानांतरित किया जाए। वेंडिंग जोन में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिए थे कि वेंडिंग जोन में पेयजल, शौचालय, संकेतक बोर्ड और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही सभी अधिकृत वेंडरों को स्मार्ट कार्ड जारी करने, छह महीने के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगाने और लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करने के भी निर्देश दिए गए थे। इन्हीं आदेशों के पालन में शनिवार को नगर निगम ने वेंडरों को विभिन्न वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के लिए ड्रॉ निकाला, लेकिन ड्रॉ के परिणाम सामने आते ही कई वेंडरों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि यदि उन्हें उनके वर्तमान कार्यस्थल से दूर भेजा गया तो उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा।



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