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इंदौर में 45 हजार बच्चों में कुपोषण के मामले में पोषण आहार व्यवस्था की कई कमियां सामने आई हैं। ज्यादातर आंगनवाड़ियों में गंदगी के बीच भोजन बन रहा है तो कहीं तय मेन्यू का पालन नहीं हो रहा। अगर सरकार और एजेंसियां इन चार चीजों पर ठीक से काम करें तो कमियों को दूर कर जिले के 45 हजार बच्चों का कुपोषण दूर किया जा सकता है। जरूरी है कि ऐसे इलाके जहां कुपोषण ज्यादा है, वहां 5 साल तक के बच्चों का लगातार वजन और लंबाई नापी जाए। स्वयं सहायता समूहों की निगरानी सख्त की जाए। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. अशोक कुमार भार्गव, पूर्व कमिश्नर, महिला एवं बाल विकास विभाग 1. लगातार निरीक्षण
पोषण आहार व्यवस्था में सबसे अहम भूमिका स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहयोगिनी मातृ समितियों की है। भोजन तैयार होने से लेकर बच्चों की थाली तक हर स्तर पर सतत निगरानी जरूरी है। इससे पूरी तरह स्वच्छ किचन में गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार होगा। नामांकित बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित होगी। वे पोषण आहार से वंचित नहीं रहेंगे। 2. पहले पांच साल फोकस
बच्चों को कुपोषण से मुक्त रखना सर्वोच्च प्राथमिकता हो। बच्चे के जीवन के पहले पांच वर्ष संज्ञानात्मक, शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, कैलोरी और अन्य पोषक तत्व मिलना जरूरी है। कुपोषण कम करने के लिए बच्चों का नियमित रूप से वजन और लंबाई मापना जरूरी है। 3. खाने का बजट बढ़ाना जरूरी
वर्तमान में आंगनवाड़ी के प्रत्येक बच्चे के नाश्ता और भोजन के लिए स्वयं सहायता समूह को 8 रुपए मिलते हैं। मौजूदा महंगाई में इस राशि में तय मानकों के अनुसार पौष्टिक भोजन तैयार करना चुनौतीपूर्ण है। शासन को इस राशि की समीक्षा करनी चाहिए। वर्तमान में उपलब्ध राशि का उपयोग भी जवाबदेही के साथ हो। पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी व अन्य अधिकारियों के नियमित निरीक्षण होने चाहिए। 4. मेन्यू चार्ट का सख्ती से पालन
शासन ने आंगनवाड़ियों के लिए साप्ताहिक मेन्यू तय किया है। इसमें प्रत्येक दिन दिए जाने वाले व्यंजन के साथ प्रोटीन और कैलोरी के मानक भी निर्धारित हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भोजन मेन्यू के अनुसार ही तैयार हो। ताजा भोजन ही वितरित किया जाए।
(जैसा संजय रजक को बताया) इधर, एक्शन: 12 सूत्रीय गाइडलाइन जारी उधर, महिला व बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने सभी परियोजना अधिकारियों के लिए गाइडलाइन जारी की है– किचन शेड साफ-सुथरा हो। पर्याप्त वेंटिलेशन रहे।
कर्मचारी हेड कैप पहनकर ही खाना तैयार करें।
भोजन बनाने और परोसने वाले बर्तनों की रोज सफाई हो।
कच्ची-पकी सामग्री ढांक कर रखें।
भोजन वितरण से पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भोजन चखकर गुणवत्ता देखें। वितरण रजिस्टर में दर्ज हो।
भोजन की गुणवत्ता खराब मिलने पर पर्यवेक्षक को तत्काल सूचना दें। संबंधित समूह का उसी दिन भुगतान रोका जाएगा।
रोज तैयार भोजन का सैंपल सुरक्षित रखें। निरीक्षण में जांचेंगे।
पर्यवेक्षक निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति, किचन शेड देखे।
मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलने या मात्रा कम होने की शिकायत पर मौके पर जांच होगी।
मातृ सहयोगिनी समिति के सदस्य रोज भोजन चख रजिस्टर में हस्ताक्षर करें।
प्रत्येक पर्यवेक्षक सप्ताह में 5 दिन आंगनवाड़ियों का निरीक्षण करेगा।
भोजन की फोटो विभाग के वाट्सएप ग्रुप पर भेजें।
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जिले के 45 हजार बच्चों में कुपोषण बड़ी चिंता:किचन से थाली तक निगरानी, बच्चों का वजन नापना व बजट बढ़ाना जरूरी
