18 जुलाई को सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का 21 वां दिन था। सुबह करीब 7 बजे दिल्ली पुलिस के कई जवान सादे कपड़ों में आए, सोनम के मंच पर चढ़े, चारों तरफ सफेद चादरें लगाईं और महज 1 मिनट के अंदर सोनम को उठाकर ले गए। जबकि 20 दिन से सरकार ने कोई बयान तक नहीं दिय
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आखिर सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों थी? अचानक अकेले वांगचुक को इस तरह उठाने के पीछे 3 फैक्टर्स जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी, CJP ने जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट शुरू किया। सोनम ने भी 28 जून को समर्थन में भूख-हड़ताल शुरू कर दी। 21वें दिन वांगचुक को उठाकर अस्पताल ले जाने के पीछे 2 बड़ी राजनीतिक वजहें हैं…
1. संसद सत्र के पहले दिन तीन-तरफा दबाव की आशंका
- 20 जुलाई को संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। 9 जुलाई को CJP ने ऐलान किया कि 20 जुलाई को ही जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालेंगे।
- इधर 17 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने ऐलान किया कि 20 जुलाई को उनकी पार्टी ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ भी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, तमिलनाडु CM थलापति विजय सहित देश के 56 नेताओं को प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने का न्योता दिया। 19 की शाम को खबर आई कि उमर की जगह जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला इस प्रोटेस्ट को लीड करेंगे।
- अनशन पर बैठने से पहले सोनम ने भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग रखी थी। 13 जुलाई को उन्होंने कहा कि लद्दाख के मुद्दे पर सरकार से कुछ सहमति बनी है। लेकिन ये भी जोड़ा कि सरकार चाहे तो मानसून सत्र में ही लद्दाख के मुद्दे का समाधान कर सकती है।
- ऐसा इसलिए, क्योंकि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए संविधान में संशोधन बिल पास करना होगा, और ऐसा संसद सत्र के दौरान ही हो सकता है। यानी, वांगचुक ने लद्दाख के मुद्दे को पूरी तरह नहीं छोड़ा।
सीनियर पत्रकार अरुण दीक्षित कहते हैं कि 20 जुलाई को संसद सत्र के दिन केंद्र सरकार और प्रशासन के लिए उमर अब्दुल्ला, CJP और सोनम, तीन तरफ से दबाव की स्थिति बन सकती थी। सरकार किसी तरह इस दबाव को कम करना चाहती थी।

अस्पताल में वांगचुक से मिलने पहुंचे फारूक अब्दुल्ला की मुलाकात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि से हुई।
2. विपक्षी नेता सोनम के साथ एकजुट होने लगे
- 14 जुलाई को सोनम के अनशन के 16वें दिन से विपक्षी नेताओं का समर्थन बढ़ने लगा। TMC प्रमुख ममंता बनर्जी ने फोन पर उनसे उनसे सेहत का हाल लिया।
- 16 जुलाई को AAP मुखिया अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पहुंचे और एक दिन की भूख हड़ताल की।
- समाजवादी पार्टी से कई सांसद, मसलन- डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, विधायक डॉ.रागिनी सोनकर जंतर-मंतर पहुंचे।
- शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत और CPI(M) की नेता सुभाषिनी अली भी जंतर-मंतर पहुंचे। सावंत ने कहा कि वे मानसून सत्र में यह मुद्दा संसद में उठाएंगे।

सोनम के पक्ष में विपक्षी नेताओं के एकजुट होने और उमर अब्दुल्ला की 17 जुलाई की घोषणा के मद्देनजर आनन-फानन में सोनम को उठाने का फैसला लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसीलिए 17 जुलाई को दिल्ली कमिश्नर सतीश गोलचा को अचानक हटाकर उनकी जगह खुफिया एजेंसी ‘IB’ के स्पेशल डायरेक्टर रहे अनुराग कुमार लाए गए। 17-18 जुलाई की रात डेढ़ बजे सोनम को हटाने के निर्देश मिले। फिर मंदिर मार्ग थाने में रणनीति बनी। सुबह 5 बजे अधिकारी जंतर-मंतर पहुंचे, आखिरी ब्रीफिंग दी। फिर उसी हिसाब से एक्शन हुआ।

सोनम से CJP को मिला ‘डिजिटल मोमेंटम’
- X पर सोनम वांगचुक ने सबसे पहले 2 जून को कहा, ‘मैं 6 जून के CJP प्रोटेस्ट से जुड़ने आ रहा हूं।’ इसी दिन CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने वांगचुक को ‘3 इडियट्स’ मूवी के किरदार ‘रैंचो’ से जोड़ते हुए इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर की। 6 जून को सोनम के जंतर-मंतर पहुंचने के बाद CJP को उनके जरिए डिजिटल मोमेंटम मिलने लगा।
- अरुण दीक्षित कहते हैं, ‘CJP शुरू से ही सरकार के लिए बड़ा चैलेंज नहीं थी। जबकि सोनम लद्दाख की मांग को लेकर कई अनशन कर चुके हैं। सितंबर 2025 में देशद्रोह के आरोप में सोनम 170 दिन जेल में रहे। इस बार भी सोनम के चलते CJP का विरोध प्रदर्शन बड़ा बन रहा था।’
- ट्विटर एडवांस्ड सर्च के मुताबिक, 28 जून को वांगचुक के अनशन शुरू करने के बाद पहली बार हैशटैग #SonamWangchuk और #IStandWithSonamWangchuk चर्चा में आए और 2 जुलाई तक ट्रेंडिंग में रहे। 3 इडियट्स में चतुर का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्य ने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि यह इंसान मर जाए। मेरे लिए वे एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं, मैं चाहता हूं वह सुरक्षित रहें।’
सोनम की तबीयत बिगड़ने की चर्चा से बढ़ा मीडिया कवरेज
- 5 से 10 जुलाई के बीच सोनम की तबीयत बिगड़ने की चर्चा शुरू हुई, तो #IStandWithSonamWangchuk भारत में X (पहले ट्विटर) के ट्रेंडिंग टॉपिक्स की लिस्ट में शामिल हुआ।
- Trends24.in के मुताबिक, 9 जुलाई को हैशटैग 50 हजार पोस्ट्स के पार चला गया।
- 10 जुलाई को अनशन के 13 वें दिन सोनम ने कहा, ‘फैट के बाद अब मसल्स कम हो गई हैं। हड्डियां दिखने लगी हैं।’ इसके बाद जैसे-जैसे वांगचुक की भूख हड़ताल आगे बढ़ी, सोशल मीडिया पर उनका सपोर्ट भी बढ़ा।
- कई मीडिया संस्थानों ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक का इंटरव्यू किया। 14 जुलाई को ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने जंतर-मंतर से प्रोटेस्ट कवर किया। अल-जजीरा और एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने रिपोर्ट छापीं।
सेलेब्रिटीज सोनम के सपोर्ट में आए
- 14 जुलाई को स्वरा भास्कर जंतर-मंतर पहुंची और सरकार पर निशाना साधा।
- सिंगर विशाल ददलानी, लेखिका शोभा डे, एक्टर नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, अभय देओल, स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी, इन्फ्लुएंसर भुवन बाम, एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा वगैरह ने सोनम के सपोर्ट में सोशल मीडिया पर बयान जारी या वीडियो डाले।
- इन सभी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। एक्टर अतुल कुलकर्णी ने एक दिन का अनशन किया। लेखिका अरुंधति रॉय, इकोनॉमिस्ट जयती घोष ने भी सपोर्ट में बयान दिए।

वांगचुक और दीपके से मिलती स्वरा भास्कर।
14 जुलाई से सोशल मीडिया पर हैशटैग के साथ सोनम के सपोर्ट वाली पोस्ट्स की बाढ़ आ गई…
- 14 जुलाई को #CJPProtest, #JantarMantar #CockroachJanataParty जैसे हैशटैग ट्रेंडिंग में रहे। #ChaloSansad और #ChaloParliament जैसे हैशटैग भी शुरू हुए।
- यूजर्स ने प्रोफाइल पिक्चर में वांगचुक की फोटो और ‘I Support Sonam’ वाला बैनर लगाया।
- 3 इडियट्स मूवी के मीम और फुनसुख वांगडू का कैरेक्टर चर्चा में रहा। मूवी में ये किरदार निभाने वाले ओमी वैद्य ने भी सोनम के सपोर्ट में बयान दिया।
- 16 जुलाई को केजरीवाल सोनम से मिले, तब #KejriwalWithSonamWangchuk तीसरे नंबर पर ट्रेंड कर रहा था। #WeStandWithSonamWangchuk X पर 5वें नंबर पर ट्रेंड हुआ।
- 17 जुलाई को #सोनमवांगचुक, #SonamWangchuk टॉप 10 ट्रेंड में आए। सोनम ने कहा कि वो हर हाल में 20 जुलाई को संसद तक के पैदल मार्च के लिए जिंदा रहेंगे। इसके बाद #IStandWithSonamWangchuk हैशटैग भी ट्रेंड करने लगा।
- 18 जुलाई की सुबह करीब 3 बजे से ही भारत में दिल्ली पुलिस, Delhi Police, पहले और दूसरे नंबर पर और #SonamWangchuck तीसरे नंबर पर थे।
- 28 जून को सोनम के X हैंडल पर करीब 4.5 लाख फॉलोअर्स थे, जबकि 18 जुलाई को ये संख्या बढ़कर करीब 5.3 लाख पहुंच गई थी।

- 28 जून को अनशन की शुरुआत में सोनम का वजन 65.9 किलो था, जो लगातार गिरता गया। 12 जुलाई को अनशन के 15वें दिन उनका वजन 7.8 किलो कम हो गया।
- दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया कि सोनम को फोर्स-फीडिंग करवाई जाए, वरना 2 दिन में जान जा सकती है।
- 16 जुलाई को कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया, ‘जरूरत पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। क्योंकि हर नागरिक की जान कीमती है।’
- 17 जुलाई को सोनम का वजन टोटल 9.5 किलो घटकर 56.4 हो गया। यानी करीब 14.5% की गिरावट।
- हालांकि सोनम के डॉ. नितिन दिघे ने कहा कि हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं, लेकिन वे मानसिक रूप से पूरी तरह सजग हैं।
- 18 जुलाई को नई दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सोनम की बिगड़ती सेहत की वजह से अस्पताल भेजा गया।
- सफदरजंग अस्पताल के मुताबिक, वांगचुक को डिहाइड्रेशन, पोटैशियम की कमी जैसी दिक्कतें थीं, लेकिन उन्होंने कोई फ्लूइड या इंजेक्शन लेने से मना कर दिया। सोनम का
- अस्पताल पहुंची वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि हमारी सहमति के बिना उन्हें मुंह से या नस के जरिए कोई दवा या फ्लूइड न दिया जाए।
दरअसल, भुखमरी से जुड़ी कई रिसर्च के मुताबिक, कोई दुबला-पतला व्यक्ति खाना न खाए, तो उसके शरीर के वजन का करीब 18% तक कम होने पर भूख से मरने की नौबत आ जाती है। ऐसा औसतन 30 से 50 दिनों के बाद होता है। कोई स्वस्थ व्यक्ति है या पानी और नमक वगैरह ले रहा है, तो कुछ ज्यादा दिन चला जा सकता है।
उत्तर प्रदेश बेस्ड डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) अजय सिंह कहते हैं कि सोनम के हेल्थ पैरामीटर्स देखते हुए ये नहीं कहा जा सकता कि तत्काल उनकी जान को कोई खतरा था। वे हाइड्रेटेड थे। हालांकि 20 दिन के अनशन के बाद लगातार निगरानी की जरूरत तो थी, क्योंकि उनकी उम्र 59 साल है।19 जुलाई की सुबह गीतांजलि ने X पर पोस्ट सफदरजंग हॉस्पिटल पर आरोप लगाया कि वह सोनम के हेल्थ पैरामीटर्स की सही जानकारी नहीं दे रहा है।
उन्होंने सोनम को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को 3 दिन में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार का उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाने का फैसला मनमाना नहीं कहा जा सकता।

दिल्ली हाई कोर्ट में गीतांजलि की तरफ से पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा- हमें अपनी पसंद के अस्पताल में जाने का अधिकार है। इस पर कोर्ट ने कहा सफदरजंग हॉस्पिटल में डॉक्टर्स सोनम की अनुमति से ही उन्हें फ्लूइड और दवाइयां दे रहे हैं।
सवाल-1: सोनम वांगचुक को उठाकर क्या सरकार से मिस-कैलकुलेशन हो गई? जवाबः राजनीतिक मोर्चे पर इसे ‘मिस-कैलकुलेशन’ माना जा रहा है, क्योंकि वांगचुक को हटाने के बाद से आंदोलन खत्म होने के बजाय प्रोटेस्ट मजबूत होता दिखा है। अब धर्मेंद्र प्रधान के साथ पीएम नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगा जा रहा है।
सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी का मानना है, ‘सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले जाना मोदी सरकार की चूक हो सकती है। वांगचुक की छवि एक बेदाग, देशप्रेमी और पर्यावरण कार्यकर्ता की है। जब सरकार ऐसे किसी चेहरे पर हाथ डालती है, तो जनता में मैसेज गलत जाता है।’
18 जुलाई को अभिजीत खुद भूख हड़ताल पर बैठ गए और उन्होंने रात का पहरा शुरू किया, ताकि पुलिस वहां से उन्हें पूरी तरह न खदेड़ दे। इसके चलते पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लोग जुटे। पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, RJD सांसद मनोज झा, AAP नेता गोपाल राय, आजाद समाज पार्टी के नेता चन्द्रशेखर आजाद जैसे तमाम नेता भी जंतर-मंतर पहुंचे। सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने भी सरकार से बातचीत की अपील की।
लोकसभा में विपक्षी के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, अखिलेश यादव, केजरीवाल, डिंपल यादव, संजय सिंह, किसान नेता राकेश टिकैत जैसे लोगों ने भी पुलिस एक्शन का विरोध किया है। वहीं वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो खुलकर सामने आ गई हैं। उन्हें भी सपोर्ट मिल रहा है।
सवाल-2: कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट किधर जाता दिख रहा है? जवाबः CJP 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ की तैयारी कर रही है। सोनम वांगचुक की तरफ से भी उनके सोशल मीडिया पर अपील की गई- ‘20 जुलाई को आजादी का दूसरा आंदोलन। भयमुक्त भारत, अन्यायमुक्त भारत। संसद मार्च को सफल बनाएं।’
CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि अस्पताल में जबरन डिटेंशन में रखे गए सोनम सर जंतर-मंतर पर वापस आकर इस संघर्ष को जारी रखना चाहते हैं।
वहीं गीतांजलि ने कहा है कि अगर सोनम 20 जुलाई के मार्च में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो मैं उनकी तरफ से मार्च को लीड करूंगी।
हालांकि 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया, तो पुलिस से टकराव होना तय है। दिल्ली पुलिस ने साफ कहा है कि CJP को संसद तक मार्च की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि इससे दिल्ली के संवेदनशील इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। अगर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है।

वांगचुक को उठाए जाने के बाद से अभिजीत दीपके अनशन पर बैठ गए हैं।
सवाल-3: क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की कोई संभावना है? जवाबः पहले सुगबुगाहट थी कि मानसून सत्र से पहले कैबिनेट में बदलाव होगा। धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदल सकता है या फिर बीजेपी संगठन में भेजा जा सकता है।
हालांकि बीते कुछ दिनों से ऐसी कोई चर्चा नहीं है। 18 जुलाई को जंतर-मंतर पर पुलिस एक्शन हुआ, तो प्रधान के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
मोदी सरकार का एक अनकहा नियम है कि इसमें मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। पिछले 12 साल में अकेले एमजे अकबर को #MeToo आरोप के चलते विदेश राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
मोदी सरकार जानती है कि अगर किसी दबाव में कोई इस्तीफा हुआ, तो ये नजीर बन जाएगी और फिर बार-बार ऐसी मांगे होंगी।
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जंतर-मंतर पर 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस उठा ले गई। अभिजीत दीपके ने कहा- ‘पुलिस ने सोनम सर को गालियां दीं और घसीटकर जबरन ले गए।’ पूरी खबर पढ़िए…
