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18 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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हाल ही में गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 7 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 3 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ अन्य संदिग्ध मरीजों के सैंपल्स की जांच जारी है।
‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (NCDC) के मुताबिक, भारत में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप समय-समय पर आता रहा है। इसके मामले खासकर मानसून के दौरान बढ़ते हैं, क्योंकि इस मौसम में वायरस फैलाने वाले कीड़े ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं।
इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में चांदीपुरा वायरस की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इसके शुरुआती और गंभीर लक्षण क्या हैं?
- चांदीपुरा वायरस से कैसे बचें?
एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- चांदीपुरा वायरस क्या है?
जवाब- चांदीपुरा वायरस एक रेयर, लेकिन बेहद खतरनाक वायरल इन्फेक्शन है। इसकी पहचान पहली बार साल 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। इसलिए इसका नाम चांदीपुरा रखा गया।
- चांदीपुरा वायरस रैब्डोविरिडी (Rhabdoviridae) फैमिली का वायरस है।
- यह वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर अटैक करता है।
- इसमें बच्चों को उल्टी, तेज बुखार, सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं।
- गंभीर मामलों में यह वायरस ब्रेन में सूजन (एक्यूट एन्सेफलाइटिस) पैदा कर सकता है।
- समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
सवाल- यह वायरस कैसे फैलता है?
जवाब- पॉइंटर्स में देखिए-
- चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई के काटने से फैलता है।
- सैंडफ्लाई मच्छर जैसा दिखने वाला बहुत छोटा कीड़ा होता है। यह नमी, गंदगी और झाड़ियों वाले इलाकों में ज्यादा पाया जाता है।
- अगर संक्रमित सैंडफ्लाई किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच सकता है।
सवाल- मानसून में चांदीपुरा वायरस का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
जवाब- इसके कई कारण हैं-
- मानसून में नमी और तापमान बढ़ने से वायरस फैलाने वाले कीड़ों की संख्या तेजी से बढ़ती है।
- बारिश के बाद झाड़ियां, कचरा, पशु बाड़े और घरों के आसपास की नम जगहें इनके पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती हैं।
- इस मौसम में लोग (खासकर बच्चे) ज्यादा समय बाहर बिताते हैं। इससे संक्रमित कीड़ों के संपर्क में आने का रिस्क बढ़ जाता है।
- ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में कच्चे घर, साफ-सफाई की कमी और पशुओं के आसपास रहने से रिस्क बढ़ जाता है।
सवाल- चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
जवाब- शुरुआत में चांदीपुरा वायरस के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होते हैं। ग्राफिक में इसके सभी शुरुआती लक्षण देखिए-

सवाल- चांदीपुरा वायरस के गंभीर लक्षण क्या हैं?
जवाब- अगर संक्रमण तेजी से बढ़कर ब्रेन को प्रभावित करने लगे तो पेशेंट की हालत कुछ ही घंटों में गंभीर हो सकती है। ऐसे में कुछ लक्षण दिख सकते हैं। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- संक्रमित होने के कितने दिन बाद लक्षण दिखते हैं?
जवाब- चांदीपुरा वायरस से संक्रमित होने के आमतौर पर 3-6 दिन के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसे ‘इन्क्यूबेशन पीरियड’ कहा जाता है।
कुछ बच्चों में बीमारी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में 24-48 घंटे के भीतर दौरे पड़ना, बेहोशी या ब्रेन में सूजन जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं।
सवाल- सामान्य वायरल बुखार और चांदीपुरा वायरस में फर्क कैसे पहचानें?
जवाब- चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण वायरल फीवर से मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन इनमें कुछ अंतर होता है। ग्राफिक में दोनों के बीच फर्क समझिए-

सवाल- इस वायरस का खतरा किसे ज्यादा है?
जवाब- चांदीपुरा वायरस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इन्फेक्शन का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा क्यों होता है?
जवाब- इसकी कई वजहें हैं। नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए–
1. बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है
- छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता।
- उनका शरीर वायरस से उतनी अच्छी तरह नहीं लड़ पाता, जितना किसी वयस्क का शरीर लड़ पाता है।
2. वायरस का असर जल्दी गंभीर हो सकता है
- बच्चों में संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है।
- गंभीर मामलों में यह ब्रेन को प्रभावित कर सकता है, जिससे कुछ ही समय में हालत बिगड़ सकती है।
3. बाहर खेलने से रिस्क बढ़ जाता है
- बच्चे अक्सर खुले मैदान, झाड़ियों और घर के बाहर ज्यादा समय बिताते हैं।
- इसलिए वायरस फैलाने वाले कीड़ों के संपर्क में आने की संभावना भी अधिक रहती है।
4. शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लगते हैं
- शुरुआत में बुखार, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य वायरल बुखार समझ लिया जाता है।
- इससे इलाज शुरू होने में देरी हो सकती है।
ध्यान रखें
अगर बच्चे को तेज बुखार के साथ दौरे पड़ें, बार-बार उल्टी हो, बहुत ज्यादा सुस्ती आए या बेहोशी होने लगे, तो तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाएं।
सवाल- चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है?
जवाब- अभी तक चांदीपुरा वायरस को खत्म करने वाली कोई खास दवा (एंटीवायरस) या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज उसके लक्षणों और हालत के अनुसार किया जाता है। इसे सपोर्टिव ट्रीटमेंट कहते हैं।
- इलाज के दौरान बुखार कम करने की दवा दी जाती है। शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए फ्लूइड्स दिए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन और दौरे कंट्रोल करने की दवा भी दी जाती है।
- अगर संक्रमण ब्रेन को प्रभावित करता है, तो मरीज को आईसीयू में भर्ती करना पड़ सकता है। वहां उसकी लगातार निगरानी और इलाज किया जाता है।
सवाल- चांदीपुरा वायरस से बचाव कैसे करें?
जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसेकि-
- बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं, ताकि कीड़े काटने का रिस्क कम हो।
- सोते समय बारीक जाली वाली मच्छरदानी लगाएं।
- घर के आसपास झाड़ियां, कचरा न जमा होने दें और नमी वाली जगहों को साफ रखें।
- बच्चों को झाड़ियों के पास, गंदगी में और कीट वाली जगहों पर न खेलने दें।
- डॉक्टर की सलाह से कीट भगाने वाली क्रीम (इंसेक्ट रेपेलेंट) यूज करें।
- तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत हॉस्पिटल जाएं।

चांदीपुरा वायरस से जुड़े कुछ कॉमन सवाल–जवाब
सवाल- क्या चांदीपुरा वायरस से संक्रमित हर बच्चे की मौत हो जाती है?
जवाब- नहीं, चांदीपुरा वायरस से संक्रमित हर बच्चे की मौत नहीं होती। कई बच्चों में समय पर इलाज मिलने से वे पूरी तरह ठीक भी हो जाते हैं। हालांकि कुछ मामलों में संक्रमण तेजी से गंभीर होकर ब्रेन को प्रभावित कर सकता है।
सवाल- क्या यह वायरस बड़ों को भी अटैक कर सकता है?
जवाब- हां, वयस्कों में भी संक्रमण हो सकता है, लेकिन गंभीर बीमारी और मौत का रिस्क बच्चों की तुलना में कम होता है।
सवाल- क्या यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है?
जवाब- नहीं, चांदीपुरा वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है।
सवाल- क्या इसके लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध है?
जवाब- नहीं, फिलहाल चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
सवाल- क्या मच्छर भगाने वाली क्रीम या जाली से बचाव हो सकता है?
जवाब- हां, क्योंकि यह वायरस कीटों के जरिए फैलता है। इसलिए कीटों से बचाव इन्फेक्शन का रिस्क कम कर सकता है।
सवाल- क्या बुखार आते ही चांदीपुरा वायरस की जांच करानी चाहिए?
जवाब- नहीं, हर बुखार चांदीपुरा वायरस की वजह से नहीं होता।
- अगर तेज बुखार के साथ बार-बार उल्टी, दौरे, बेहोशी या बहुत ज्यादा सुस्ती जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- डॉक्टर लक्षण, मरीज की हालत और जरूरत के अनुसार चांदीपुरा वायरस टेस्ट का फैसला लेते हैं।
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