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FIFA World Cup Analysis | Boria Majumdar on Messi, Ronaldo & Football


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2 घंटे पहले

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बोरिया मजुमदार सचिन तेंदुलकर की आत्मकथा के सहलेखक और खेल पत्रकार - Dainik Bhaskar

बोरिया मजुमदार सचिन तेंदुलकर की आत्मकथा के सहलेखक और खेल पत्रकार

फीफा विश्व कप की शुरुआत विवादों के साथ हुई थी। ईरानी खिलाड़ियों को वीसा मिलेगा या नहीं, यह मसला सुर्खियों में रहा। उनके साथ किए गए भेदभावपूर्ण व्यवहार ने भी अनेक सवाल खड़े किए। रेफरियों के निर्णय किस तरह एक टीम (अर्जेंटीना) के पक्ष में जा रहे थे, यह भी चर्चा का विषय बना। बालोगुन विवाद को लेकर ट्रम्प भी इसमें शामिल हो गए और ट्रम्प तथा फीफा प्रेसिडेंट इन्फैन्तीनो के बीच हुई बातचीत को लेकर भी काफी चर्चा हुई।

वीएआर प्रणाली लगातार बहस का विषय बनी रही। इसमें तीनों आयोजक देशों के बीच यात्राओं से जुड़ी समस्याओं और उस पर आने वाले भारी-भरकम खर्च को भी जोड़ दें। लेकिन इसके सबके बावजूद विश्व कप को असफल नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इसमें फुटबॉल का स्तर और मुकाबलों की इंटेंसिटी दोनों ही सर्वोच्च दर्जे के रहे थे।

फाइनल मैच भले ही स्पेन के पक्ष में पूरी तरह से एकतरफा रहा हो, लेकिन उसके विपरीत इस विश्व कप में कई ऐसे क्लासिक मुकाबले हुए, जो लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बने रहेंगे। चाहे फ्रांस के खिलाफ स्पेन का शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन हो या इंग्लैंड के विरुद्ध अर्जेंटीना की दमदार वापसी- यह टूर्नामेंट रोमांच से भरपूर रहा।

सेमीफाइनल का ही उदाहरण लीजिए, जिसकी चर्चा अब भी लंदन में हो रही है। इंग्लैंड 1-0 से आगे था और पूरे ब्रिटेन ने सपना देखना शुरू कर दिया था कि ट्रॉफी आखिरकार घर लौटने वाली है। तभी उनके कोच ने रक्षात्मक रणनीति अपनाने की गलती कर दी और 39 वर्षीय मेसी को जैसे नया जीवन मिल गया। अर्जेंटीना ऐसी टीम की तरह खेलने लगी, मानो उस पर जुनून सवार हो। इंग्लैंड बिखर गया और अटलांटा के विशाल स्टेडियम में अर्जेंटीनी समर्थकों की आवाज गूंजने लगी। उस समय मैं लंदन के एक पब में मौजूद था, जहां सन्नाटा पसरा हुआ था।

पलभर को अफ्रीका के बारे में सोचिए। इस महाद्वीप की ओर से पहली बार इस टूर्नामेंट में नौ टीमें उतरी थीं और उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। चाहे केप वर्डे की वह प्रेरक कहानी हो- जिसमें पांच लाख की आबादी वाले इस देश ने अर्जेंटीना को हार के कगार तक पहुंचा दिया, या मिस्र- जो अंत तक 2-0 से आगे रहने के बावजूद आखिरकार 2-3 से हार गया- अफ्रीकी टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया।

मोरक्को ने अब एक नया मानक स्थापित कर दिया है। कतर विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने के बाद इस विश्व कप में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय कर उसने अपनी क्षमता से कहीं बढ़कर प्रदर्शन किया है। आने वाले समय में अफ्रीकी खिलाड़ियों को दुनिया की प्रमुख लीगों में निश्चित रूप से अधिक अवसर मिलेंगे और इस विश्व कप से उनके लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।

अब क्रिस्टियानो रोनाल्डो, नेमार और लियोनेल मेसी की बात करें। पहले दो मामलों में यह देखना अद्भुत था कि दोनों सितारों ने अपनी-अपनी टीमों के लिए सब कुछ झोंक दिया। रोनाल्डो ने पुर्तगाल को आगे ले जाने के लिए अपनी शारीरिक क्षमता की सीमाएं लांघ दीं, लेकिन अंततः स्पेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में हार गए।

अपना सर्वश्रेष्ठ देने के बावजूद आंसुओं के साथ विश्व कप से विदा लेते रोनाल्डो यह बताते हैं कि खेल कई बार कितना निर्मम हो सकता है। नेमार ने भी अपने प्रशंसकों के लिए ब्राजील के अंतिम मैच में एक पेनल्टी गोल किया, लेकिन उनकी विदाई वैसी नहीं रही, जैसी किसी दिग्गज खिलाड़ी के साथ अपेक्षा की जाती है। लेकिन यही खेल है। और जहां तक मेसी की बात है तो बहस समाप्त हो चुकी है। हर सवाल का जवाब मिल चुका है। हर आलोचक निरुत्तर है। जिस तरह उन्होंने खेला और अर्जेंटीना का नेतृत्व किया, फाइनल में हार के बावजूद उन्होंने स्वयं को सर्वकालिक महान खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया है।

यह एक शानदार विश्व कप रहा। तमाम विवादों के बावजूद मैदान पर देखने को मिला फुटबॉल हर प्रशंसक की उम्मीदों पर खरा उतरा। और जिस तरह का जुनून प्रशंसकों में देखने को मिला, वह इस बात का प्रमाण है कि फुटबॉल दुनिया का सबसे खूबसूरत खेल क्यों है।हम बार-बार यह शिकायत सुनते रहे हैं कि 1.4 अरब की आबादी वाला देश होने के बावजूद हम विश्वस्तरीय फुटबॉलर क्यों नहीं तैयार कर पा रहे हैं।

लेकिन यदि हम ओसीआई (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) और पीआईओ (पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन) खिलाड़ियों का उपयोग करें, तो हम भी विश्व कप में जगह बना सकते हैं। तब हम अपनी टीम के बारे में भी लिख रहे होंगे। फिलहाल तो स्पेनिश आर्माडा का ही दबदबा है। नेतृत्व की मशाल मेसी से लमीन यमाल के हाथों में पहुंच चुकी है।

यह एक शानदार विश्व कप रहा। तमाम विवादों के बावजूद मैदान पर देखने को मिला फुटबॉल हर प्रशंसक की उम्मीदों पर खरा उतरा। और जिस तरह का जुनून प्रशंसकों में देखने को मिला, वह इस बात का प्रमाण है कि फुटबॉल दुनिया का सबसे खूबसूरत खेल क्यों है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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