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Rana Mahendra Mumal Chamber Secret Reveal


कल आपने पढ़ा किस तरह राणा महेंद्र ने मूमल के जादुई महल की पहेलियों को बूझ कर राजकुमारी का दिल जीत लिया था। पढ़िए आगे की कहानी-

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वो रात बातों और वादों में बीत गई। मूमल और महेंद्र अब एक-दूसरे के प्रेम में बंध चुके थे। दोनों की मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन एक बड़ी समस्या थी —महेंद्र अमरकोट के राजा थे और उनके इस प्रेम के बारे में किसी को पता नहीं था। ऐसे में उन्हें मूमल से रातों-रात मिलकर सुबह अपने राज्य लौटना होता था। अमरकोट और लौद्रवा (जैसलमेर) के बीच मीलों (लगभग 300 Km) का फासला था, जिसे एक रात में तय करना लगभग नामुमकिन था।

थार का रेगिस्तान जिसे अमरकोट के राणा महेंद्र मूमल से मिलने के लिए हर रात पार करते थे।

थार का रेगिस्तान जिसे अमरकोट के राणा महेंद्र मूमल से मिलने के लिए हर रात पार करते थे।

यहां काम आया महेंद्र का वफादार ऊंट,’चीतल’। चीतल कोई साधारण ऊंट नहीं था, वह हवा से बातें करता था। महेंद्र हर रात अमरकोट से निकलते, मीलों का सफर तय कर लौद्रवा पहुंचते, रात भर मूमल के साथ समय बिताते और सुबह होने से पहले नदी को पार कर वापस अमरकोट पहुंच जाते। यह सिलसिला सालों चला और दोनों का एक दूसरे के लिए प्रेम गहरा होता रहा।

लंबा इंतजार और फिर एक खेल

नियति ने इस प्रेम कहानी के लिए शायद कुछ और ही तय किया था। अमरकोट में राणा के परिवार को उनकी लौद्रवा यात्राओं और उसकी वजह का पता चल गया।

जिसके चलते वे राणा को अक्सर किसी न किसी बहाने से यात्रा करने से रोकने लगे। यहां तक कि उन्होंने चीतल के पैर भी तुड़वा दिए। ऐसे में महेंद्र और मूमल की मुलाकातों का अंतराल बढ़ता गया।

इस बार का इंतजार हर बार से लंबा हो गया था। अरसा बीत गया और महेंद्र मिलने नहीं आए थे। मूमल इस बात को लेकर बहुत परेशान थी।

रोज की तरह उस दिन भी वह उनका इंतजार करते-करते थक गई थी और बेहद उदास थी। उसकी छोटी बहन सूमल उसका ध्यान बंटाने की कोशिश कर रही थी-

जीजी,आज फिर राणा जी की राह देख रही हो? वो आ जाएंगे, सूमल ने मूमल को समझाया।

मूमल मुस्कुरा दी। सूमल राणा का भेष धारण कर मूमल का मन बहलाने लगी। राणा के भेस में मूमल से बातें करते-करते वो उसके पास ही बिस्तर पर सो गई। राणा के इंतजार में मूमल की भी आंख लग गई।

मिलन का उत्साह फिर आंखों का धोखा

तमाम अड़चनों को पार कर उसी रात राणा महेंद्र किसी तरह से मूमल के महल पहुंचे। मिलन के उत्साह में वे मूमल के कक्ष तक पहुंचे ही थे कि उन्होंने देखा मूमल किसी ‘पुरुष’ की बाहों में सो रही है। यह देख महेंद्र को गहरा धक्का लगा और उनका दिल टूट गया।

जिस मूमल के लिए उन्होंने मरुधरा की तपती रेत को नाप दिया उसने धोखा दिया? क्रोध और ग्लानि में भरकर महेंद्र ने अपनी छड़ी (कोड़ा) मूमल के बिस्तर के पास छोड़ दी और बिना कुछ कहे वहां से चले गए।

सुबह जब मूमल की नींद खुली तो उसने पास में महेंद्र की छड़ी देखी और चौंक गई।

वह सोच में पड़ गई कि राणा जी आए थे पर वे बिना मिले क्यों चले गए? अचानक उसकी नज़र सोई हुई सूमल (राणा के भेष में) पर पड़ी।

उसे तुरंत समझ आ गया कि राणा को गलतफहमी हुई है। घबराहट में उसने सूमल को झकझोर कर जगाया सूमल, उठो ! राणा जी मुझे गलत समझकर चले गए !

मूमल हताश हो गई और अपनी इस भूल को लेकर अब बेहद बेचैन थी….

क्या मूमल राणा महेंद्र की गलतफहमी दूर कर सकी? क्या दोनों एक बार फिर एक हो सके?

जानिए एपिसोड 4 में….

(कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। सोर्स : राजस्थानी साहित्य, लोक कथाएं व स्थानीय लोगों से बातचीत ) ….

यहां पढ़िए… महेंद्र-मूमल की प्रेम कहानी के 2 एपिसोड

1. रेगिस्तान में काक नदी के किनारे था मूमल का महल:अमरकोट के राजा और जैसलमेर की राजकुमारी का प्रेम; 4 एपिसोड में मूमल-महेंद्र की कहानी

जैसलमेर के लौद्रवा की राजकुमारी मूमल और अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान) के राणा महेंद्र की प्रेम कहानी सदियों पुरानी है। इस कहानी को जानने के लिए दैनिक भास्कर जैसलमेर से 14 किलोमीटर दूर लौद्रवा गांव पहुंचा। पूरा एपिसोड पढ़िए…

2. कांच का पानी और शीशों का खेल:हजारों राजकुमार नाकाम, फिर अमरकोट के राणा ने कैसे पार की मूमल की खतरनाक पहेलियां? मूमल-महेंद्र प्रेम-कहानी एपिसोड-2

मूमल इंतजार में थी उस राजकुमार के जो उसकी खूबसूरती से ज्यादा उसकी पहेलियों की गहराई को समझ सके। लौद्रवा का महल उसी का स्वागत करेगा जो बिना डरे काक महल की पहेलियों को सुलझा पाएगा। पूरा एपिसोड पढ़िए…



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