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फॉरेस्ट विभाग में निमाड़ के चार जिलों के लिए जारी प्रमोशन सूची विवादों में घिर गई है। आरोप है कि सीसीएफ स्तर पर हुई पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया। कर्मचारियों का दावा है कि एसटी-एससी वर्ग को केवल आरक्षित कोटे तक सीमित रखा गया, जबकि अनारक्षित कोटे का लाभ सिर्फ सामान्य और ओबीसी वर्ग के कर्मचारियों को दिया गया। उनका कहना है कि अनारक्षित कोटे में सभी वर्गों के पात्र कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। प्रमोशन सूची जारी होने के बाद नाराज वनकर्मियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश की 16 कंजरवेंसी में से 14 में यही प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई, लेकिन सिर्फ खंडवा कंजरवेंसी में नियमों की अनदेखी हुई। कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया, जिससे कई पात्र कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले में पीड़ित वनकर्मियों और अधिकारियों से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले प्रमोशन सूची और उससे जुड़ा विवाद वन वृत्त खंडवा के 13 जुलाई 2026 के पदोन्नति आदेश पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। कर्मचारियों का आरोप है कि पदोन्नति प्रक्रिया में मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2025 और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इस संबंध में वनसंरक्षक, खंडवा वृत्त को लिखित आपत्ति और अभ्यावेदन सौंपा गया है। वनकर्मियों से जुड़े संगठनों का दावा है कि पदोन्नति प्रक्रिया में अनारक्षित कोटे का लाभ केवल ओबीसी और सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को दिए जाने से आरक्षित वर्ग के कई कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए। उनका कहना है कि यदि नियमों के अनुसार आरक्षण का पालन किया जाता, तो एसटी-एससी के आरक्षित पदों को छोड़कर अनारक्षित कोटे में वरिष्ठता के आधार पर करीब 80 वनकर्मी भी पदोन्नति के दायरे में आते। संगठन का दावा है कि एसटी-एससी वर्ग के ये करीब 80 कर्मचारी वरिष्ठ होने के बावजूद अब अपने से 10-12 साल जूनियर कर्मचारियों के अधीन या उनसे नीचे पद पर कार्य करने को मजबूर होंगे। नियमों का दिया हवाला अभ्यावेदन में कर्मचारियों ने मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2025 तथा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आर.बी. राय बनाम मध्यप्रदेश शासन (रिट याचिका क्रमांक 1942/2011) के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा है कि पदोन्नति में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षित पदों की गणना नियमानुसार होना आवश्यक है। आपत्ति पत्र में कर्मचारियों ने वन वृत्त बैतूल द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश का हवाला देते हुए दावा किया है कि वहां नियमों और आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन करते हुए पदोन्नति की गई। उन्होंने खंडवा में भी उसी प्रक्रिया को अपनाने की मांग की है। 333 कर्मचारियों के प्रमोशन के बाद शुरू हुआ विवाद खंडवा वृत्त की सीसीएफ वासु कनोजिया ने दो अलग-अलग पदोन्नति आदेश जारी किए हैं। इनमें पहले आदेश के तहत 250 वनरक्षकों को वनपाल बनाया गया। दूसरे आदेश में 83 वनपालों को डिप्टी रेंजर पद पर पदोन्नत किया गया। इस तरह कुल 333 कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई, जिसके बाद यह विवाद सामने आया। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2003 बैच के कई कर्मचारी लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। पात्रता होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। उन्होंने वनसंरक्षक से पदोन्नति आदेश की पुनः समीक्षा कर वरिष्ठता के आधार पर पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति देने की मांग की है। अब तीन पीड़ितों का दर्द… केस-1 : 18 साल बाद कंधे पर स्टार लगा, अब छिनने का डर खंडवा डिवीजन में पदस्थ कार्यवाहक वनपाल अनोखीलाल सिलवे ने बताया कि उनकी नियुक्ति 1 जून 2005 को वनरक्षक के रूप में हुई थी। 18 साल बाद वर्ष 2023 में उन्हें कार्यवाहक वनपाल बनाया गया और वर्दी पर एक स्टार लगा। उन्होंने कहा, “तब हम पात्र थे, लेकिन अब हुई पदोन्नति में हमें अपात्र कर दिया गया। हमारे 10-12 साल जूनियर कर्मचारियों को प्रमोट कर दिया गया। तीन साल पहले मिला स्टार अब छिनने का डर है। पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर होनी चाहिए।” सिलवे का कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया में 20 प्रतिशत एसटी और 16 प्रतिशत एससी आरक्षण के बाद शेष पद अनारक्षित माने जाने चाहिए थे। इन पदों पर सभी वर्गों के कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केस-2 : 21 साल की नौकरी, फिर भी एक बार भी प्रमोशन नहीं वनरक्षक बलवनसिंह सोलंकी ने बताया कि उन्हें विभाग में 21 साल की सेवा पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक एक भी पदोन्नति नहीं मिली। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ न कोई विभागीय जांच है और न ही कोई शिकायत। इसके बावजूद 2012-13 बैच के कर्मचारियों को प्रमोट कर दिया गया, जबकि हम 2005 बैच के कर्मचारी आज भी इंतजार कर रहे हैं।” केस-3 : ‘प्रदेश में सिर्फ खंडवा कंजरवेंसी में हुआ ऐसा’ वनरक्षक मुकेश चौहान ने बताया कि प्रदेश की 16 कंजरवेंसी में से 14 में प्रमोशन सूची जारी हो चुकी है। उनके मुताबिक, खंडवा को छोड़कर बाकी सभी कंजरवेंसी में अनारक्षित कोटे में सभी वर्गों के कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि खंडवा कंजरवेंसी के चारों जिले—खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी और खरगोन—में वरिष्ठता का पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार, अकेले एसटी वर्ग के वर्ष 2003 बैच के करीब 100 कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए। डीएफओ : समितियों से त्रुटि हुई, नई सूची तैयार हो रही डीएफओ राकेश कुमार डामोर ने बताया कि शासन के नियमों के अनुसार किसी कर्मचारी को आपत्ति होने पर 15 दिन के भीतर अभ्यावेदन देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा, “अनारक्षित कोटे में वरिष्ठता के आधार पर नाम शामिल किए जाने थे, लेकिन कुछ स्थानों पर समिति से त्रुटि हुई है। शिकायतें मिलने के बाद जांच की जा रही है। मौजूदा सूची निरस्त कर नई सूची तैयार की जा रही है।”
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'21 साल नौकरी, फिर भी प्रमोशन नहीं, जूनियर हुए अफसर':फॉरेस्ट प्रमोशन लिस्ट पर सवाल, पीड़ित बोले- सीनियर ST-SC वनकर्मी छूटे, हमारी एक पीढ़ी खत्म
