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कनाडा की स्थायी निवास (पीआर) छोड़कर भारत लौटे एक युवक की अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाने की कोशिश चंडीगढ़ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में भी सफल नहीं हो सकी। चंडीगढ़ कैट ने स्पष्ट कहा कि अनुकंपा नियुक्ति सहानुभूति के आधार पर नहीं, बल्कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट में फंसे परिवार को तत्काल राहत देने के लिए दी जाती है। जब परिवार आर्थिक रूप से सक्षम हो तो ऐसी नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। सेक्टर-26, पंचकूला निवासी विश्वास पाल सिंह ने अपनी मां पुष्पा देवी के निधन के बाद प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल कार्यालय में अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। विभाग ने आवेदन खारिज कर दिया, जिसके बाद उसने कैट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि ट्रिब्यूनल ने भी विभाग के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। सुनवाई में सामने आई परिवार की आर्थिक स्थिति कैट में सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से बताया गया कि आवेदन पर विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी ने सभी पहलुओं की जांच की थी। जांच में सामने आया कि विश्वास के पिता भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से सेवानिवृत्त हैं और उन्हें 51,966 रुपए मासिक पेंशन मिलती है। वहीं मां के निधन के बाद परिवार को 44,350 रुपए प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन भी मिल रही है। इस तरह परिवार को हर महीने कुल 96,316 रुपए पेंशन प्राप्त हो रही है। इसके अलावा पुष्पा देवी के निधन के बाद विभाग से 57.03 लाख रुपए के सेवानिवृत्ति और अन्य लाभ मिले। परिवार के विभिन्न बैंक खातों में 71.44 लाख रुपए जमा पाए गए। परिवार के पास सेक्टर-20, पंचकूला में एक फ्लैट और खरड़ की गुलमोहर सिटी में एक प्लॉट भी है। आर्थिक संकट नहीं तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना है, ताकि परिवार आजीविका के संकट से उबर सके। यह कोई सामान्य भर्ती प्रक्रिया या सहानुभूति के आधार पर नौकरी देने की व्यवस्था नहीं है। चूंकि याचिकाकर्ता का परिवार आर्थिक रूप से सक्षम पाया गया, इसलिए उसे अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। सेवानिवृत्ति में केवल 24 दिन शेष विश्वास पाल सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी मां पुष्पा देवी ने वर्ष 1983 में प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल कार्यालय में नौकरी शुरू की थी। 2 फरवरी 2023 को उनका निधन हो गया। उस समय वह सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थीं और उनकी सेवानिवृत्ति में केवल 24 दिन शेष थे। विश्वास ने बताया कि वह परिवार का इकलौता बेटा है। उसके पिता एलआईसी से सेवानिवृत्त हैं और गंभीर किडनी बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके इलाज में उनकी अधिकांश पेंशन खर्च हो जाती है। उसने कहा कि वह बीटेक करने के बाद बेहतर भविष्य के लिए कनाडा चला गया था, लेकिन मां की मृत्यु और पिता की बीमारी के कारण भारत लौटना पड़ा। उसने दावा किया कि परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा है और रिश्तेदारों व दोस्तों की मदद से गुजारा कर रहा है। इसी आधार पर उसने अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी, जिसे विभाग और बाद में कैट ने भी अस्वीकार कर दिया।
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चंडीगढ़ का युवक कनाडा PR छोड़ अनुकंपा नौकरी मांगने पहुंचा:कैट में याचिका खारिज, सेवानिवृत्ति में केवल 24 दिन, आर्थिक संकट नहीं-अनुकंपा नियुक्ति नहीं
