20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के बीच पार्टी प्रवक्ता रहे विजेता दहिया एक बर्गर आउटलेट में दिखे। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। विवाद बढ़ा तो विजेता ने सफाई देते हुए कहा कि भूख लगी थी, इसलिए खाना खाने गए थे क्यों
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उनकी ये दलील न लोगों को संतुष्ट कर सकी और न ही पार्टी को। वीडियो पर मचे बवाल के बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया। दैनिक भास्कर ने विजेता दहिया से बर्गर पर मचे विवाद, इस्तीफे और प्रोटेस्ट पर बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
सवाल: आपको पार्टी से क्यों निकाल दिया?
जवाब: खाना एक बेसिक बात है। आपने इतने टाइम से खाया नहीं, अंतड़ियां बाहर आने को हैं। इस पर कहा गया कि देखो ये खाना खा रहा है। प्रोपगेंडा बनाया गया। हमने वीडियो में देखा भी कि वे प्रदर्शनकारी नहीं थे, वे मनुवादी गुंडे थे।
उन्हें इस बात से दिक्कत थी कि मैंने प्रेमानंद को महाराज क्यों नहीं कहा। मैंने बताया भी कि वे मेरे लिए महाराज नहीं हैं। अगर कोई एक कन्विक्टेड रेपिस्ट आसाराम को कहे कि वो मेरे राम हैं, कृष्ण हैं, तो मैं इस पर आपत्ति जताऊंगा। इस बात पर किसी को धक्का मारना, कैसे सही हो सकता है।

CJP के पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया पार्टी के मार्च के दौरान एक बर्गर किंग आउटलेट में दिखे, जिसका वीडियो वायरल हो गया।

विवाद के बीच विजेता दहिया ने बर्गर खाते हुए अपना वीडियो पोस्ट किया और सफाई दी।
सवाल: पद से हटाए जाने से पहले आपकी अभिजीत दीपके या बाकी लोगों से क्या बात हुई?
जवाब: मुझे सुबह से कई कॉल आए। सभी ने वीडियो देखने के बाद हालचाल पूछा। सलाह दी कि मास्क लगाकर जाया करो। तभी अभिजीत का कॉल आया, तो मुझे लगा कि उसने भी हालचाल जानने के लिए किया होगा। वो पूछेगा कि मारपीट करने वाले गुंडे कौन हैं, लेकिन उसने और आशुतोष ने अचानक से कहा कि विजेता आप यहां मत आना।
मैंने पूछा क्या हुआ, तो उसने कहा कि यहां मार्च चल रहा था, आपने बर्गर खा लिया। वो वीडियो चल रहा है, इसलिए आपको हटा रहे हैं। मैंने समझाया कि ये सब प्रोपेगेंडा है। मैं तो तुम्हारे साथ हूं। मैं दो रातों से एक मिनट के लिए भी नहीं सोया हूं। पुलिस यहां क्रैकडाउन न कर दे, इसके लिए लड़ाई लड़ता रहा। इसके बाद सौरव, शीतल और महेंद्र बाकी लोगों के साथ मार्च में भी हिस्सा लिया।
उसके बाद ये कहा जाए कि पुलिसवाले ने विजेता को लाठी नहीं मारी, तो ये बहुत बचकानी बात है। जबकि एक महीने पहले से मुझ पर ही हमले हो रहे हैं। मेरे लिए एनकाउंटर बटन चलाया जा रहा है, जिसे 1500 लोगों ने लाइक किया है।

सवाल: प्रोटेस्ट वाले दिन गीतांजलि, अभिजीत और आशुतोष सब ट्रक पर बैठे दिखे। वे प्रदर्शनकारियों को समझा रहे थे, आप वहां क्यों नहीं थे?
जवाब: ये लोग शाम को मार्च के लिए निकले, तो मैं और सुधीर स्टेज संभाल रहे थे। पुलिस जंतर-मंतर खाली कर सकती थी, इसलिए हम यहीं रूके। बाद में हमें भी जोश आया तो सोचा कि मार्च में चलते हैं। पूरे इलाके में इंटरनेट बंद था, तो पता नहीं चल रहा था कि कहां क्या हो रहा है।
मैं दो रात से जागा हुआ था, तो लोगों के लौटने से पहले सोचा कि जल्दी से खाना खाकर तैयार हो जाऊं, ताकि मार्च खत्म करके वापस आने वालों को संभाल सकूं। ये सब बकवास फैलाने वाले वही लोग हैं, जो देश के बाकी मुद्दे पर नहीं बोलते। इनमें एक BJP का भी है। अब ये लोग वीडियो काट-छांटकर झूठ फैला रहे हैं कि मैंने CJP प्रोटेस्टर्स को बेवकूफ कहा है।

ये तस्वीर 20 जुलाई को संसद मार्च से पहले की है, जहां विजेता दहिया मंच पर पार्टी के बाकी सदस्यों के साथ मौजूद दिखे।
सवाल: CJP में आपको हटाने का फैसला सबकी सहमति से हुआ या वहां दो-तीन लोगों की ही चल रही है?
जवाब: नहीं छोड़िए, अब इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है।
सवाल: आपने कहा कि मैं किसी के लिए अकाउंटेबल नहीं हूं, लेकिन आप और आपके साथियों के नाम पर हजारों लोग जुटे। फिर ये कहना असंवेदनशीलता नहीं?
जवाब: नहीं, मैंने ये कहा था कि जो प्रदर्शनकारी हैं, वे मुझे देख रहे हैं कि मैं कैसे पिछले 50 दिन से अपनी हड्डियां गला रहा हूं। उनमें से किसी को कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत उन लोगों को है, जो न मणिपुर पर बोलते हैं, न किसानों पर और न हसदेव के जंगल काटे जाने पर बोलते हैं।
मेरा उनसे सिर्फ इतना कहना है कि मेरा काम तुम्हारे जैसे लोगों खुश रखना नहीं है। तुम्हारे प्रति मेरी कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं।
सवाल: आपने पार्टी के लोगों से सवाल नहीं किया कि बर्गर खाने के छोटे से मसले के लिए क्यों हटा रहे हैं?
जवाब: मैंने पूछा लेकिन मुझसे कहा गया कि वीडियो वायरल हो रहा है। मैंने अभिजीत से कहा कि वायरल तो ये भी हो रहा है कि भाई तुम कचोरी खा रहे थे, तो मैंने तुम्हारा बचाव किया था। मैंने साफ कहा था कि अभिजीत में कोई छल-कपट नहीं। उसने नादानी में खा लिया। वो भूख हड़ताल पर नहीं था, सोनम सर थे। मैंने अभिजीत को इतनी मजबूती से बचाव किया, लेकिन मेरे खिलाफ ही ये हो गया।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ विजेता दहिया।
सवाल: पार्टी ने उनके कचौड़ी खाने को मुद्दा क्यों नहीं बनाया, क्योंकि वो लीडर हैं?
जवाब: उस पर भी कोई एक्शन नहीं होना चाहिए था और मुझ पर भी नहीं।
सवाल: CJP में फैसले कैसे होते हैं, पार्टी का काम करने का तरीका क्या है।
जवाब: ये सवाल आप तब करते, जब मैं प्रवक्ता था। अब ये सब बताना सही नहीं लगेगा।
सवाल: क्या पार्टी में लीडरशिप की कमी है, संसद मार्च के दिन लीडरशिप क्राइसिस दिखी भी?
जवाब: CJP पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, जिसके पास सैकड़ों करोड़ का फंड हो, जो अपने लिए 1500 वॉलंटियर और कैडर इकट्ठा कर ले। हजारों लोग जुटे थे। उन्हें सुरक्षा देना पुलिस का काम था, लेकिन वहां गुंडे पुलिस के साथ खड़े थे। पुलिस और बदमाश साथ काम कर रहे हैं। अब पुलिस की क्रूरता के लिए CJP तो जिम्मेदार नहीं हो सकती।

CJP के मार्च के दौरान पुलिस और RAF के जवानों पर प्रदर्शनकारियों को बेरहमी के पीटने और उनके साथ बदसलूकी करने के आरोप लग रहे हैं।
सवाल: ये कैसी स्ट्रेटजी है कि आप लोगों को संसद मार्च करने के लिए 9 बजे का वक्त दे रहे हैं और आप ही पीछे हैं?
जवाब: बहुत सारी प्रैक्टिकल प्रॉब्लम रहती हैं। अपनी तरफ से पूरी कोशिश की गई लेकिन एक जनआंदोलन को सीमित टीम के साथ संभालना आसान नहीं होता। वैसे भी सुरक्षा देना पुलिस का काम है, इसे आउटसोर्स नहीं किया जा सकता।
सरकार की जिम्मेदारी लोगों की बात सुनना है, अगर वो सुन लेती, तो भूख हड़ताल की जरूरत ही क्यों पड़ती। ये कितनी अजीब बात है कि अपनी ही सरकार से बात करने के लिए भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है, उसको भी 25 दिन हो गए हैं।
सवाल: आप लोग बदलाव की पॉलिटिक्स कर रहे थे, NEET की मांग लेकर इस्तीफा मांग रहे थे। आपके साथ जो पॉलिटिक्स हुई, उसका दोषी किसे मानते हैं?
जवाब: किसी को अपने विचार रखने पर धक्का मारा जाए, ये कितना अजीब है। गुंडों की इतनी हिम्मत हो जाए कि किसी के खुलकर बोलने पर उसके पीछे लग जाएं और बिना अपनी पहचान छिपाए उसे परेशान करें। फिर अपनी ही आईडी से उसके वीडियो पोस्ट कर दें। ये तभी मुमकिन है, जब उन्हें पता हो कि पुलिस कुछ नहीं करेगी। अगर लॉ एंड ऑर्डर नहीं होगा, तो समाज में सब तहस-नहस हो जाएगा।

बर्गर विवाद के साथ विजेता दहिया के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट का ये वीडियो सामने आया था।
सवाल: आपको नहीं लगता ये वक्त एकजुट रहने का था। पद से हटाने के बाद भी आपको प्रदर्शन वाली जगह पर रहना चाहिए था?
जवाब: मैं वैसा बेवकूफ नहीं हूं कि मुझे धमकी मिल रही है, फिर भी मैं जबरदस्ती करूं। जान है तो जहान है। पॉसिबल होगा तो जाऊंगा। प्रदर्शनकारियों से असुरक्षा नहीं है। वहां गुंडे आते रहते हैं। किसी ने इंक डाल दी। कोई हुड़दंग करने लगा। पता ही है कि वे कौन लोग हैं।
सवाल: 20 मार्च की शाम जंतर-मंतर पर प्रदर्शन वाली जगह खाली हो गई थी। लगा कि प्रदर्शन खत्म हो गया है। अब ये फिर से जिंदा हो गया है। इस आंदोलन का क्या भविष्य लग रहा है?
जवाब: कोशिश होनी चाहिए कि ये आंदोलन पूरे देश में फैले। अभी यहां इतनी भीड़ आई, तो कम से कम ये हुआ कि सरकार बात करने के लिए मानी। ये देशभर में फैलेगा, तो सरकार का अहंकार टूटेगा।
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