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रोहतक में परिजनों का शव लेने से इनकार:युवक के सुसाइड का मामला; बोले- आरोपियों की गिरफ्तारी तक नहीं करेंगे अंतिम संस्कार




रोहतक जिले के गांव मोखरा में युवक सुरेश द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने के मामले में परिजनों ने शव का पोस्टमॉर्टम होने के बाद भी शव लेने से इनकार कर दिया। परिजनों ने स्पष्ट कहा कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक वह शव नहीं लेंगे और ना ही अंतिम संस्कार करेंगे। मृतक के भाई सचिन ने बताया कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक शव नहीं लेंगे। गांव के आरोपियों में दीपक, संजय, अजय, आशु व पंकज शामिल है, जिनके खिलाफ केवल धारा 108 में केस दर्ज किया गया है। जबकि पुलिसकर्मी सतेंद्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। एससी एसटी में दर्ज होना चाहिए केस सचिन ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ एससी एसटी में केस दर्ज होना चाहिए। आरोपियों के साथ कोई झगड़ा नहीं था। आरोपी आशु ने आकर गाली गलौच की और अगले दिन रात को छोटे भाई सुरेश का रास्ता रोककर मारपीट की। पुलिसकर्मी ने आकर कहा कि राजीनामा कर ले, लेकिन राजीनामे से मना कर दिया तो जबरन मां का कोरे कागज पर अंगूठा लगवा लिया। पुलिस नहीं दे रही एफआईआर की कॉपी मृतक के परिजन नरेंद्र ने बताया कि डीएसपी से मिले थे, लेकिन डीएसपी ने कहा कि पोस्टमॉर्टम के बाद सबूत मिलेंगे, इसके बाद ही कार्रवाई होगी। पोस्टमॉर्टम करवा दिया, लेकिन शव नहीं लेंगे। पहले आरोपियों व पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया जाए। पुलिस परिवार को एफआईआर की कॉपी भी नहीं दे रही। नरेंद्र ने कहा कि पुलिस मामले में लीपापोती करने में लगी है। जबरन कोरे कागज पर मृतक की मां का अंगूठा लगवाया, जिसके कई गवाह भी है। पुलिसकर्मी ने सुरेश के साथ मारपीट भी की थी, जिसके बाद सुरेश ने आत्महत्या की। पुलिस मामले में एससी एसटी एक्ट भी नहीं लगा रही। आरोपियों को पुलिस नहीं पकड़ रही मंजीत मोखरा ने बताया कि सुरेश की मौत को 5 दिन हो गए, लेकिन पुलिस आरोपियों को पकड़ नहीं रही। पुलिस आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। पुलिसकर्मी व आरोपियों ने सुरेश को इतना परेशान किया कि वह आत्महत्या करने पर विवश हो गया। शव का पोस्टमॉर्टम तो करवा दिया, लेकिन परिवार शव नहीं लेगा। एससी एसटी एक्ट में केस दर्ज मंजीत ने कहा कि पुलिस मामले में अपना पल्ला झाड़ने में लगी हुई है। आरोपियों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट में केस दर्ज नहीं कर रहे। गरीब परिवार है, जिनकी आवाज को दबाया जा रहा है। परिवार व गांव के लोग जो फैसला करेंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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