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भूतेश्वर मंदिर में 29 साल से जारी है अखंड कीर्तन:अखंड ज्योत ने 30वें वर्ष में किया प्रवेश, पुजारियों और संकीर्तन मंडली का हुआ सम्मान




सागर में रामसरोज समूह के संस्थापक स्वर्गीय रामशंकर केसरवानी और स्वर्गीय सरोजनी देवी केसरवानी की स्मृति में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम प्रसिद्ध भूतेश्वर मंदिर में पिछले 29 वर्षों से लगातार चल रहे अखंड राम नाम संकीर्तन “जय गौरी शंकर सीता राम, जय पार्वती शिव सीताराम” तथा अखंड ज्योत के 30वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर आयोजित हुआ। समारोह में कथावाचकों, पुजारियों, कर्मकांडी ब्राह्मणों और वर्षों से संकीर्तन कर रहे साधकों का सम्मान किया गया। संकीर्तन मंडली और कथा वाचकों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान वर्षों से अखंड संकीर्तन में शामिल सदस्यों को कंबल भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं कथा वाचकों और कर्मकांडी ब्राह्मणों को शॉल, श्रीफल, रुद्राक्ष की माला और लंच बॉक्स भेंट कर सम्मान दिया गया। कलयुग में राम नाम ही सबसे बड़ा सहारा पंडित पुरोहित पुजारी संघ के अध्यक्ष शिवशंकर तिवारी ने कहा कि शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि “कलियुग में केवल नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा।” उन्होंने कहा कि भूतेश्वर मंदिर में पिछले 29 वर्षों से लगातार राम नाम का संकीर्तन हो रहा है और ऐसे साधकों का सम्मान करना अत्यंत सराहनीय कार्य है। उन्होंने रामसरोज समूह को इस पहल के लिए बधाई दी। जहां संकीर्तन होता है, वहां हनुमानजी का वास होता है समाजसेवी संजीव केसरवानी ने कहा कि जो व्यक्ति राम नाम का स्मरण और गुणगान करता है, वह जीवन के अनेक कष्टों से मुक्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी दौर में जहां अधिकांश लोग धन कमाने की दौड़ में लगे हैं, वहीं भगवान के नाम का संकीर्तन करने वाले साधक वास्तव में धन्य हैं। समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जहां संकीर्तन होता है, वहां हनुमानजी स्वयं विराजमान रहते हैं। उन्होंने कहा कि भूतेश्वर मंदिर परिसर में लगभग तीन दशकों से लगातार भगवान का नाम लिया जा रहा है, इसलिए यह स्थान विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। ब्राह्मण सम्मान हमारी संस्कृति का हिस्सा समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि पुजारियों और पुरोहितों का सम्मान करना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज सनातन धर्म की रीढ़ है और उनके योगदान ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई संत, विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद कार्यक्रम में त्रिदंडी स्वामी पंडित हृषिकेश महाराज (राजघाट), कथा वाचक पंडित भागवत कृष्ण शास्त्री महाराज, कथावाचक अतुल प्रेम महाराज, भूतेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज तिवारी, पंडित पुरोहित पुजारी संघ के अध्यक्ष शिवप्रसाद तिवारी, पंडित रामगोविंद शास्त्री, भूतेश्वर मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र पाठक सहित बड़ी संख्या में संत, विद्वान, पुजारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।



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