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करीब 70 करोड़ रुपए कीमत की 70 किलो मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स की तस्करी और उससे अर्जित अवैध कमाई को सफेद बनाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल और अक्षय अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि तीनों ड्रग्स तस्करी से होने वाली करोड़ों रुपए की कमाई को बैंक खातों और कारोबारी लेनदेन के जरिए छिपा रहे थे। यह कार्रवाई क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 22 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच में की गई। जांच में सामने आया कि आरोपियों के पास से बरामद 70 किलो मेफेड्रोन की बाजार कीमत करीब 70 करोड़ रुपए है। बैंक खातों के जरिए छिपाई अवैध कमाई पीएमएलए के तहत हुई जांच में ईडी को पता चला कि ड्रग्स तस्करी से अर्जित रकम को आरोपियों ने व्यक्तिगत और व्यावसायिक बैंक खातों के जरिए अलग-अलग जगह ट्रांसफर किया। इसका उद्देश्य पैसों के वास्तविक स्रोत को छिपाना था। जांच में बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन भी सामने आए हैं। पूछताछ में यह भी पता चला कि आरोपी अपने नियमित कारोबार के साथ-साथ ड्रग्स की सप्लाई और तस्करी से भी जुड़े थे। इंदौर और मंदसौर में छापे ईडी ने 17 जुलाई को इंदौर और मंदसौर के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और संपत्तियों व वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। मामले की जांच जारी है। ED बोली- आर्थिक नेटवर्क तोड़ना जरूरी ईडी का कहना है कि सिर्फ ड्रग्स जब्त करना पर्याप्त नहीं है। नशा तस्करी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क को खत्म करना भी जरूरी है। एजेंसी ने कहा कि अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान, उन्हें जब्त करने और दोषियों तक पहुंचने की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। युवाओं को नशे से बचाने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
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70 करोड़ की MD ड्रग्स केस में ED का एक्शन:मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्य खंगाले
