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महिला से रेप के आरोपी को 12 साल की जेल:अश्लील वीडियो पति को भेज दिए थे; जांच में लापरवाही पर अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश



सीकर की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने रेप के आरोपी को 12 साल की सजा सुनाई है। वहीं इस मामले में 3 इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर्स ने आरोपी और पीड़िता के मोबाइल जब्त नहीं किए थे। इस पर कोर्ट ने DGP और SP को तीनों अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आदेश दिया। यह फैसला

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लोक अभियोजक सांवरमल बिजारणियां ने बताया- सीकर के एक पुलिस थाने में 27 साल की महिला की ओर से साल 2023 में मुकदमा दर्ज करवाया गया था। इसमें उसने बताया था कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए सीकर में कोचिंग कर रही थी। इसी दौरान उसकी कोचिंग में साथ पढ़ने वाले एक युवक ने उससे बातचीत करना शुरू कर दिया। इसके बाद आरोपी ने उसे मिलने के लिए होटल में बुलाया। आरोपी ने होटल में उसके साथ रेप किया। रेप करने के दौरान आरोपी ने अश्लील फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिए।

बाद में इन अश्लील फोटो और वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर कई बार रेप किया। जब भी वह विरोध करती तो आरोपी युवक उसे धमकी देता कि अश्लील फोटो और वीडियो को वायरल कर देगा।

शादी के बाद भी नहीं छोड़ा पीछा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने मेरी शादी होने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ा। आरोपी ने मेरे पति को भी अश्लील फोटो और वीडियो भेज दिए। इसके अलावा आरोपी ने फोटो और वीडियो को अन्य लोगों को भी शेयर कर दिए। बाद में महिला के पति ने उसे छोड़ दिया था।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके मामले में जांच शुरू की। आरोपी को गिरफ्तार करके कोर्ट में चालान पेश किया गया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 15 गवाह और 32 दस्तावेज पेश किए गए। इसके आधार पर आरोपी को 12 साल के कठोर कारवास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सुनाई गई।

आरोपी-पीड़िता के मोबाइल पुलिस ने जब्त नहीं किए, कार्रवाई के निर्देश

इस मामले में इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर रहे सब-इंस्पेक्टर जयप्रकाश, इंस्पेक्टर विक्रांत और पवन कुमार चौबे ने आरोपी और पीड़िता के मोबाइल जब्त नहीं किए थे। इस पर कोर्ट ने तीनों अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीजीपी और सीकर एसपी को आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा- मामले के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर्स ने इस केस में निष्पक्ष और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का पालन नहीं किया। आरोपी और पीड़िता के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए गए। न ही किसी लैब में टेस्ट करवाया गया। इसके अलावा कॉल डिटेल, IMEI विवरण सहित अन्य डिजिटल साक्ष्य भी कोर्ट में पेश नहीं किए गए। इस तरह की गलतियां अभियोजन को प्रभावित करती है। साथ ही प्रभावी आपराधिक न्याय प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। ऐसे में साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं होने की संभावना बनी रहती है।



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