कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट, विपक्ष का हंगामा और बीते 24 घंटे में सरकार के 5 बड़े फैसले। दिल्ली का माहौल तेजी से बदल रहा है।
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पीएम मोदी ने NEET पेपर लीक मुद्दे पर पहली बार ‘फ्रेंड्स’ कहकर सेल्फी मोड में वीडियो मैसेज दिया। सरकार ने कॉकरोच पार्टी से 24 घंटे का समय मांगा है।
सरकार के 5 बड़े फैसले क्या-क्या हैं, इससे क्या होगा, क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बड़े आंदोलन की वजह बनेगा, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: बीते 24 घंटे में सरकार ने कौन से 5 बड़े फैसले लिए?
जवाब: ये 5 फैसले हैं…
1. पीएम मोदी पहली बार बोले, पेपर लीक पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएंगे
- जंतर-मंतर पर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रोटेस्ट। 28 जून से शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठे। 20 जुलाई को संसद मार्च में पुलिस का लाठीचार्ज। विपक्ष ने भी पीएम आवास पर धरना दिया। यहां तक पीएम मोदी एक शब्द नहीं बोले।
- फिर 23 जुलाई की सुबह अचानक रुख बदला। उन्होंने X पर लिखा- ‘युवाओं के हित से ज्यादा जरूरी कुछ भी नहीं है। पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनेंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।’
- देर रात, ‘फ्रेंड्स’ शब्द से शुरुआत करके करीब 2 मिनट 55 सेकेंड के एक वीडियो में ऐलान किया- फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रपोजल 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में रखेंगे। कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में इससे जुड़ा बिल पास कराने की कोशिश करेंगे।’
- 24 जुलाई को ही पेपर लीक पर संशोधन बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। 27 जुलाई को इसे सदन में पेश किया जा सकता है। इस बिल में क्या है, इसकी जानकारी नहीं आई है।

3 जुलाई की रात 12 बजे पीएम मोदी ने वीडियो जारी किया, तो CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, सरकार पर हमारा दबाव है।
2. CJP से उनकी शर्त पर मुलाकात, मांगों के लिए समय मांगा
- 23 जुलाई को सरकार ने कहा था कि 4 बार CJP को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। जबकि CJP की शर्त थी कि वो किसी मंत्री के घर या ऑफिस नहीं जाएंगे, बल्कि किसी न्यूट्रल वेन्यू या जंतर-मंतर पर ही बात करेंगे।
- 24 जुलाई की सुबह जंतर-मंतर से एक किमी दूर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में CJP प्रवक्ता सौरव दास, आशुतोष रांका और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, जेपी नड्डा के बीच मीटिंग हुई।
- बैठक के बाद जेपी नड्डा ने बताया कि दो घंटे की बातचीत में CJP ने 3 प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार के 5 सुझाव दिए। सरकार ने विचार करने के लिए कल तक का समय मांगा है।
- वहीं CJP प्रवक्ताओं ने कहा, ‘हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। सरकार ने मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस वापस लेने पर सहमति जताई है।’

CJP प्रवक्ता सौरव दास, आशुतोष रांका और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, जेपी नड्डा।
3. लिखित आश्वासन देकर सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाया
- दिल्ली के मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक 26 दिन से अनशन पर थे। 23 जुलाई को रात करीब 12 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह वहां पहुंचे और सोनम का अनशन तुड़वाया।
- वांगचुक ने कहा- अभी जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह जी यहां आए थे। लद्दाख की एपेक्स बॉडी के नेता आए थे। उसके पहले अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने भी आकर अनशन तोड़ने को कहा था।’
- ‘NEET और एजुकेशन सिस्टम को लेकर दो दिन से आश्वासन देने को लेकर बात चल रही थी। प्रमुख मांगों पर उन्होंने लिखित आश्वासन दिया, इसलिए अनशन खत्म कर रहे हैं।’
- नड्डा ने सोनम को सरकार का एक लिखित स्टेटमेंट भी पढ़कर सुनाया- ‘सरकार जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे और 20 जुलाई को संसद मार्च करने वालों पर केस दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक है। पेपर लीक और एजुकेशन रिफॉर्म पर संसद में चर्चा को तैयार है। NEET पेपर लीक के चलते सुसाइड करने वालों को उचित मुआवजा देने पर भी विचार कर रही है।’

सोनम के अनशन तोड़ने के बाद मौजूद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा (दाएं, पीछे की तरफ), आगे जितेंद्र सिंह और दूसरी तरफ लद्दाख एपेक्स बॉडी, LAB के नेता।
4. पेपर लीक मामलों के लिए 3 फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने
- सुबह पीएम मोदी की X पोस्ट के कुछ ही घंटे बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने पेपर लीक के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, यानी FTSC का गठन कर दिया।
- दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस DK उपाध्याय ने अनु ग्रोवर बलिगा को पेपर लीक FTSC की जिम्मेदारी सौंपी।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी नागपुर और औरंगाबाद में फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया है। केंद्र सरकार राज्यों की सरकारों और हाई कोर्ट से भी फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के लिए कहेंगी।
- दरअसल, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना, उनमें जजों की नियुक्ति करना, राज्यों की जिम्मेदारी होती है।
- जून 2024 से पहले पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसे अपराधों के लिए IPC की 420, 120B और 467-471 जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाता था। इन सभी धाराओं में जमानत की कोई खास सख्त शर्तें नहीं हैं।
- फिर 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ नया कानून लागू किया। इसका नाम है- सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम।
- अब ये अदालतें इसी कानून के तहत पेपर लीक के मामलों में तेजी से सुनवाई करके फैसला देंगी। इससे पहले महिलाओं और बच्चों के खिलाफ रेप जैसे गंभीर अपराध, खास तौर पर POCSO एक्ट के मामलों पर सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई हैं।
5. शिक्षा विभाग के सचिव बदले
- 23 जुलाई को ही शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव बदले गए। विनीत जोशी की जगह नरेश पाल गंगवार नए उच्च शिक्षा सचिव बने, जो पहले पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव थे।
- बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने X पर लिखा- ‘पीएम मोदी जी ने पेपर लीक मामले में लापरवाही बरतने वाले शिक्षा सचिव को हटा दिया है। पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें लापरवाही बरतने वाले लोग भी शामिल हैं।’
- हालांकि सिर्फ विनीत जोशी का विभाग नहीं बदला गया है। टीके अनिल कुमार स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट के नए सचिव बने हैं। साथ ही सचिवों सहित 8 से ज्यादा टॉप ऑफिसर्स के विभाग बदले गए हैं।

विनीत जोशी को अब पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया।
सवाल-2: तो क्या सरकार वाकई बैकफुट पर है?
जवाब: पिछले 24 घंटे के पीएम मोदी और सरकार के एक्शन और मीटिंग के बाद आए CJP और नड्डा के बयानों से साफ है कि सरकार दबाव में है।
हालांकि ये कहना भी ठीक नहीं है, कि सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। इसके पीछे 2 तर्क हैं…
1. सोनम के अनशन का दबाव सरकार ने कम कर लिया
- सरकार पर दो-तरफा दबाव था- सोनम वांगचुक के अनशन के चलते बढ़ रहा विरोध और जंतर-मंतर प्रोटेस्ट। 18 जुलाई को सोनम को उठाने और 20 जुलाई के ‘पुलिस ‘एक्शन’ के बाद प्रोटेस्ट और बढ़ा।
- हालांकि अब सोनम वांगचुक के अनशन का दबाव हट गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी वांगचुक का रख नरम है।
- उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी ये बात (धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा) नहीं थी। इसका निपटारा खुद तमाम तरीके से हो जाएगा। मेरे लिए ज्यादा जरूरी था कि बच्चों पर कोई ऐसे केस न लगें, मैंने लद्दाख में देखा है कि FIR के चक्कर में बच्चों का जीवन बिगड़ जाता है। हमने ये आश्वासन हासिल किया कि ऐसा कुछ नहीं होगा। NEET के पीड़ितों को मुआवजा मिलेगा, इसकी मुझे खुशी है।’
- सीनियर जर्नलिस्ट अरुण दीक्षित कहते हैं कि NEET पेपर लीक पर देश भर में जब शुरुआती प्रोटेस्ट हुए थे, तब से ही सरकार दोषियों को सजा देने, पेपर लीक पर नकेल कसने की बात कह रही है। उन्होंने कोई नया आश्वासन नहीं दिया है। सरकार अगर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग मान ले, तभी कहा जा सकता है कि उसने हार मान ली है।
2. CJP के साथ आया विपक्ष, झुकना राजनीतिक हार जैसा
- 20 जुलाई के पहले तक छिटपुट विपक्षी नेता CJP के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंच रहे थे। पुलिस एक्शन के बाद विपक्ष खुलकर प्रोटेस्टर्स के सपोर्ट में उतर आया। 21 जुलाई को विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका सहित कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ पीएम हाउस पर 3 घंटे तक धरना दिया।
- केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह धरना खत्म करवाने की कोशिश में पहुंचे, तो राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की, इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर जबरन धरने से हटाया गया।
- फिर 23 जुलाई की रात राहुल गांधी सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने गांधी स्मृति तक मार्च निकाला। सरकार का कहना है कि वह संसद में पेपर लीक पर चर्चा को तैयार है, लेकिन राहुल सहित विपक्षी नेताओं की मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर है।
- अरुण दीक्षित कहते हैं, ‘CJP की डिमांड को विपक्ष से राजनीतिक सपोर्ट तो मिला, लेकिन इसी के चलते अब सरकार झुकने को राजी नहीं होगी। मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। ये सरकार के लिए राजनीतिक हार जैसा होगा।’
- सीनियर जर्नलिस्ट विजय त्रिवेदी कहते हैं, ‘बीजेपी का नियम है कि वह विपक्ष की मांग या किसी दूसरे तरीके के दबाव के चलते इस्तीफे नहीं लेती।’
सवाल-3: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा या नहीं?
जवाब: धर्मेंद्र प्रधान हटाए जा सकते हैं, लेकिन अलग तरह से। विजय त्रिवेदी के मुताबिक, ‘ये तय है कि धर्मेंद्र प्रधान की फाइल शिक्षा मंत्रालय से शिफ्ट हो गई है। अभी संसद में कोई न कोई बिल आएगा, जिस पर चर्चा शुरू होगी। ये मुद्दे थोड़े दब जाएंगे, इस बीच धर्मेंद्र प्रधान को कोई और मंत्रालय दे दिया जाएगा या फिर बीजेपी संगठन में भी कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सवाल-4: तो फिर CJP के प्रोटेस्ट का आगे क्या होगा?
जवाब: CJP ने जंतर-मंतर के मंच से ऐलान किया है, ‘25 जुलाई दोपहर 3.30 बजे सरकार ने दोबारा मिलने बुलाया है। अगले 2-3 दिन में इस्तीफा नहीं हुआ, तो CJP 20 जुलाई की तरह दोबारा रैली बुलाएगी। अब कॉल नेशनल लेवल पर होगा।’
हालांकि विजय त्रिवेदी कहते हैं कि अब आंदोलन और बड़ा हो, इसकी उम्मीद कम है। अब तक सरकार और CJP में दो मुलाकातें हो चुकी हैं। जब आप बातचीत की मेज पर आ जाते हैं, तो फिर विरोध बढ़ने की वजह कम हो जाती है। CJP की दो मांगें सरकार मान लेगी, ये हो सकता है कि मुआवजा एक करोड़ की बजाय कुछ कम दे, लेकिन फिर भी इन पर सहमति बन जाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मामले पर भी कोई न कोई समझौता होने की उम्मीद ज्यादा है।
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जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। पूरी खबर पढ़िए…
