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राजस्थान में वर्ष 2026 में प्रस्तावित पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों की तैयारियां राज्य सरकार ने तेज कर दी हैं। पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगा राम द्वारा जारी आदेश के तहत पंचायत समितियों, जिला परिषदों और ग्राम पंचायतों में वार्डों व पदों के आरक्षण और श्रेणीवार आवंटन के लिए जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों (एसडीएम) को अधिकार सौंप दिए गए हैं। टोंक के अतिरिक्त जिला कलेक्टर विनोद कुमार मीना ने बताया कि आदेश अभी ई-मेल के माध्यम से प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन विभाग के आधिकारिक ग्रुप में यह आदेश साझा किया जा चुका है। कलेक्टर और एसडीएम निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-98 के तहत जारी इस आदेश के अनुसार जिला कलेक्टर अपने क्षेत्र की पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वार्डों (एकल निर्वाचन क्षेत्र) के आरक्षण के साथ ही प्रधान पदों के आरक्षण और श्रेणीवार आवंटन का निर्धारण करेंगे। वहीं, उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अपने क्षेत्राधिकार की ग्राम पंचायतों के वार्डों के आरक्षण और सरपंच पदों के आरक्षण और उनके श्रेणीवार आवंटन की चुनाव संबंधी प्रक्रिया को समयबद्ध और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए जिला कलेक्टरों और एसडीएम को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा प्रक्रिया पूरी करेंगे। चुनाव संबंधी प्रक्रिया को समयबद्ध और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए जिला कलेक्टरों और एसडीएम को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 15 एवं 16 और राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 5, 6, 7, 8 और 9 के तहत शक्तियां प्रत्यायोजित की गई हैं। सरकार ने आदेश की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री के निजी सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, सभी संबंधित विभागों, प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को जरूरी कार्रवाई के लिए भेज दी है।
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सरकार ने कलेक्टर-SDM को सौंपी पंचायतराज चुनाव की जिम्मेदारी:प्रधान पदों के आरक्षण और श्रेणीवार आवंटन का करेंगे निर्धारण
