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मृत आरोपियों पर केस मामले में 30-साल बाद जागा EOW:आरोपी मर गए पर भ्रष्टाचार के केस फाइलों में जिंदा रहे, अब 50 में चालान या खात्मा




छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के करीब सवा सौ मामले वर्षों से फाइलों में दबे थे। किसी मामले में आरोपियों की मौत हो चुकी थी तो किसी में संबंधित विभाग ने मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। कुछ केस राजनीतिक कारणों से आगे नहीं बढ़ सके। इसके बावजूद न चालान पेश किया गया, न खात्मा रिपोर्ट। अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने धूल चढ़ी फाइलें खोलकर तीन महीने में करीब 50 मामलों में चालान या खात्मा रिपोर्ट पेश की है। इनमें 12 केस वर्ष 1995-96 यानी राज्य गठन से पहले के हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि राज्य बनने के बाद पहली बार पुराने लंबित मामलों की अलग से समीक्षा की जा रही है। फोकस वर्ष 2010 से पहले दर्ज प्रकरणों पर है। छानबीन में ऐसी फाइलें मिलीं, जिनमें कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बाद भी वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कुछ मामलों में केस चलाने का औचित्य समाप्त हो चुका था, फिर भी उन्हें रिकॉर्ड में लंबित रखा गया। कई मामलों में आरोपी अधिकारी-कर्मचारियों के विभाग ने अभियोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद नियमानुसार खात्मा रिपोर्ट पेश की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आरोपियों की मृत्यु के बाद भी केस बंद नहीं हुए। कुछ फाइलें तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण आगे नहीं बढ़ीं। इसी वजह से लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती गई। केस 1 विभाग ने अभियोजन की मंजूरी नहीं दी, फिर भी वर्षों अटका रहा केस
ईओडब्ल्यू ने 2012 में बिजली विभाग के एक इंजीनियर को बिल पास करने के बदले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। जांच पूरी होने के बाद गिरफ्तारी और अभियोजन की अनुमति के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन विभाग ने मंजूरी नहीं दी। इसके बाद खात्मा रिपोर्ट पेश करने के बजाय केस वर्षों तक लंबित रखा गया। अब इसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। केस 2 मप्र सहकारी संघ: 186 फर्जी ऋ ण, 30 साल बाद पेश हुआ चालान
मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से जुड़े मामले में गृह निर्माण और भूमि विकास के नाम पर 186 फर्जी ऋण प्रकरण तैयार किए गए थे। अस्तित्वहीन समितियों के नाम पर करीब 1.86 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए गए। वर्तमान बाजार मूल्य और ब्याज के आधार पर यह रकम 20 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। करीब 30 साल पुराने मामले में अब चालान पेश हुआ है। केस 3 कलेक्टर-डीईओ सहित पांचों आरोपियों की मौत, रिकॉर्ड में केस अब भी जिंदा
दुर्ग में एक सरकारी स्कूल भवन में इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित करने की अनुमति देने के मामले में भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया था। तत्कालीन कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और संभागीय संयुक्त संचालक सहित पांच अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। समय के साथ सभी आरोपियों की मौत हो गई, लेकिन प्रकरण बंद नहीं किया गया। अब अदालत में खात्मा रिपोर्ट पेश करने की तैयारी है। 126 से घटकर 90 हुए लंबित केस, अगस्त तक आधे करने का लक्ष्य
छह महीने पहले तक ईओडब्ल्यू में 126 मामले लंबित थे। लगातार समीक्षा के बाद इनकी संख्या घटकर 90 रह गई है। राज्य गठन से पहले के 12 मामलों में अब केवल एक-दो ही बचे हैं। बाकी में चालान पेश किया जा चुका है। अधिकारियों ने अगस्त के दूसरे सप्ताह तक लंबित मामलों की संख्या आधी करने का लक्ष्य रखा है। वर्षों से अटके मुकदमे खत्म कर रहे, नए भी जल्द निपटाएंगे
वर्षों से अटके प्रत्येक मामले का परीक्षण किया जा रहा है। जिनमें केस दर्ज किया जा सकता है, उनमें प्रकरण पंजीबद्ध कर रहे हैं। खात्मा योग्य मामले बंद किए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने भी इसका संज्ञान लिया है। हर केस की रिपोर्ट वहां भेजी जा रही है। ऐसा सिस्टम बना रहे हैं, जिससे नए मामले भी जल्द निपटें। -अमरेश मिश्रा, डायरेक्टर, ईओडब्ल्यू-एसीबी



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