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बिलासपुर में मलेरिया की दस्तक, 4 पॉजिटिव मरीज मिले:कोटा इलाके में 34 लोग बुखार से पीड़ित, कलेक्टर ने किया दौरा, कहा- लापरवाही बर्दाश्त नहीं




बिलासपुर जिले के मलेरिया प्रभावित कोटा इलाके में बारिश के बाद मलेरिया ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। जंगली गांव में 4 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। जबकि, 34 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित पाए गए। सभी के खून के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। इधर, मलेरिया के मामलों और बच्चों में कुपोषण की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने फील्ड स्तर पर निगरानी तेज कर दी है। शुक्रवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कोटा विकासखंड के मलेरिया प्रभावित गांव औरापानी, नवाडीह और मझगांव का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों की व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मलेरिया नियंत्रण, कुपोषण उन्मूलन और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कोटा मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित औरापानी गांव से लगभग दो किलोमीटर अंदर जंगल में रामलाल यादव का परिवार रहता है। परिवार के सदस्य पेशे से किसान हैं। उनका जंगल में दैहान भी है। छह सदस्यों के इस परिवार में तीन बच्चों की तबीयत खराब हुई, जिस पर उनकी जांच कराई गई, जिसमें मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई। बारिश में मौसमी बीमारी का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट बारिश के दौरान ग्रामीण इलाकों में मौसमी बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। मलेरिया के मरीज मिलने की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। विभाग की टीम मौके पर पहुंची। प्राथमिक परीक्षण के बाद तीनों बच्चों को सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती बच्चों की पहचान राकेश, लोकेश और हेमलता के रूप में हुई है। तीनों की उम्र 10 से 14 वर्ष के बीच बताई गई है। फिलहाल, विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। अब तक चार मरीज मिले, 34 को बुखार कोटा क्षेत्र के औरापानी के बाद शुक्रवार को नवाडीह गांव में भी मलेरिया का एक मरीज मिला है। मरीज की पहचान 25 वर्षीय संजय यादव के रूप में हुई है। उनका शुरुआती इलाज उप स्वास्थ्य केंद्र मझगांव में किया गया, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए सिम्स रेफर कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान नवाडीह में 34 लोग बुखार से पीड़ित पाए गए हैं। सभी के रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। गांव में अब तक 237 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार लगातार बारिश के कारण घरों के आसपास पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है, जिससे मलेरिया फैलने की आशंका जताई जा रही है। फील्ड पर उतरे कलेक्टर- अफसरों को दी चेतावनी कलेक्टर संजय अग्रवाल और सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने शुक्रवार सुबह 11 बजे मलेरिया प्रभावित गांव औरापानी और उप स्वास्थ्य केंद्र मझगांव का निरीक्षण किया। उन्होंने मझगांव और औरापानी के स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों का भी दौरा किया। कलेक्टर ने मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि मौसमी बीमारी के किसी भी मामले की तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें। वहीं, सीएमएचओ ने कलेक्टर को बताया कि आसपास के सभी गांवों की मितानिनों को निर्देशित किया गया है कि अधिक बुखार वाले मरीजों को तुरंत अस्पताल भेजें। साथ ही लोगों को घरों के आसपास साफ-सफाई रखने, जलभराव खत्म करने और गड्ढों में जमा पानी निकालने के लिए जागरूक किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोटा प्रवेश पैकरा, तहसीलदार कोटा, मलेरिया अधिकारी वी.के. वैष्णव, बीपीएम कोटा सहित संबंधित क्षेत्र के सुपरवाइजर, सीएचओ, आरएचओ और मितानिन उपस्थित रहे। अति कुपोषित बच्चे के घर पहुंचे कलेक्टर आंगनबाड़ी केंद्र मझगांव में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अति कुपोषित बच्चों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। इसके बाद वे एक अति कुपोषित बच्चे के घर पहुंचे और परिजनों से चर्चा कर बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) रतनपुर में भर्ती कराने के लिए समझाइश दी। परिवार ने अगले ही दिन बच्चे को एनआरसी ले जाने की सहमति दी। कलेक्टर ने परिजनों को बच्चों के पोषण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और देखभाल के प्रति भी जागरूक किया। कोटा के 72 गांव संवेदनशील गौरतलब है कि बिलासपुर जिले के कोटा विधानसभा क्षेत्र के 72 गांव पहले से मलेरिया प्रभावित क्षेत्र घोषित हैं। बारिश के मौसम में इन इलाकों में हर वर्ष मलेरिया के मरीज बढ़ने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सर्वे, जांच, दवा वितरण और जागरूकता अभियान चला रहा है।



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