इंडस्ट्रियलिस्ट्स समय-समय पर इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर प्रशासन और केंद्र सरकार के सामने मांगें उठाते रहते हैं। इन समस्याओं को पूरा करने, इन्वेस्टमेंट बढ़ाने और कारोबार आगे ले जाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लाने जा रहा है। ड्राफ्ट तैयार कर महीने में फाइनल करने का टारगेट रखा गया है। अफसरों के मुताबिक गुजरात या बाकी राज्यों की इंडस्ट्रियल पॉलिसी को स्टडी किया गया है। मकसद ये है कि उनकी बेस्ट प्रैक्टिसेस के आधार पर चंडीगढ़ में भी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए उसी तरह या उससे बेहतर प्रावधान पॉलिसी में शामिल किए जाएं। इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट्स इस पॉलिसी को तैयार करेगा, जिसके लिए केंद्र ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं। नई पॉलिसी का मकसद बिजनेस फैसिलिटेशन तक सीमित रहने के बजाय इंडस्ट्रीज को सीधा फाइनेंशियल हेल्प और इंसेंटिव देना है। इंडस्ट्री में सुधार होगा, नई इन्वेस्टमेंट को बूम मिल पाएगा। डायरेक्ट फाइनेंशियल असिस्टेंस, बिजली दरों व सरकारी फीस में छूट जैसी नई स्कीमों को जोड़कर शहर में निवेश और रोजगार के नए मौके बनाए जाएंगे। आर्किटेक्चरल कंट्रोल से जोनिंग में भी बदलाव का है प्रस्ताव… } अभी स्थिति: 5 मरले से 15 मरले के प्लॉट आर्किटेक्चरल कंट्रोल के कारण डिजाइन और विस्तार में सीमित थे। } प्रपोजल: मालिकों के लिए ऑप्शन है कि वे या तो पुराने आर्किटेक्चरल कंट्रोल में रहें या जोनिंग फ्रेमवर्क में शामिल हो। एफएआर 2.0 का फायदा लेने के लिए जोनिंग में जाना जरूरी। साथ ही इंडस्ट्रियल प्लॉट्स में रेजिडेंशियल कंपोनेंट को भी मंजूरी होगी। अभी तक जो प्रपोजल है, उसमें पॉलिसी इंसेंटिव बेस्ड होगी। कोई इंडस्ट्रियल यूनिट अगर प्रोडक्ट सर्टिफिकेट, फूड टेस्टिंग, गुणवत्ता की जांच, निर्यात लाइसेंस या बाकी की जरूरी टेक्निकल अप्रूवल पर 10 लाख रुपए तक खर्च करती है तो सरकार उस खर्च का एक हिस्सा वापस करेगी। इसमें योग्यता और पॉलिसी प्रोविजन के तहत ये फाइनेंशियल हेल्प में ज्यादा से ज्यादा 5 लाख रुपए तक की कैपिंग की संभावना है। इंडस्ट्री की रनिंग कॉस्ट और बाकी खर्चों को कम करने के लिए बिजली दरों, सरकार की अलग-अलग सर्विसेज के लिए लगने वाली फीसों और अन्य स्टैच्यूचरी चार्जेज में भी छूट दिए जाने की प्लानिंग है, ताकि जिससे चंडीगढ़ में इंडस्ट्री को देश के अन्य बड़े राज्यों की तर्ज पर खड़ा किया जा सके और बड़े प्लेयर्स भी चंडीगढ़ आ सके। स्टार्टअप पॉलिसी की तर्ज पर होगा स्पेशल इंसेंटिव फंड जो तय करेगा ग्रोथ… इस नई पॉलिसी में प्रशासन स्टार्टअप पॉलिसी की तरह एक तय इंडस्ट्रियल इंसेंटिव फंड घोषित करने की तैयारी कर रहा है। इसमें 50 करोड़ से 100 करोड़ के आसपास का फंड रहेगा। इंडस्ट्री को फंड, छूट या इंसेंटिव देना है तो उसके लिए इस अमाउंट का इस्तेमाल किया जाएगा। संबंधित कारोबारियों के साथ इस पॉलिसी के ड्राफ्ट पर चर्चा के बाद उनके सुझावों को भी इसमें शामिल किया जाएगा और फाइनल अप्रूवल के लिए केंद्र को ये सबमिट होगा।
इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1 और फेस-2 के लिए मास्टर प्लान में संशोधन प्रस्तावित है… 1. फ्लोर एरिया रेश्यो और और ऊंचाई… } अभी स्थिति: अभी 2 कनाल तक के प्लॉट आर्किटेक्चरल कंट्रोल में हैं। सभी इंडस्ट्रियल प्लॉट जो एक एकड़ तक हैं, के लिए एफएआर 1.0 और ग्राउंड कवरेज 60% तय है। } प्रपोजल: एफएआर बढ़ाकर 2.0 करने का प्रपोजल, 2 कनाल तक के प्लॉट के लिए अधिकतम ऊंचाई 68 फीट 3 ईंच प्रस्तावित है। 2. कनाल से ऊपर के प्लॉट इनके लिए एफएआर 2.0 और ग्राउंड कवरेज 60% की मंजूरी होगी, लेकिन पुराने नियमों के हिसाब से ही ऊंचाई होगी। फ्लोर एरिया रेश्यो बढ़ाने से लेकर बिल्डिंग की ऊंचाई बढ़ाने का भी संशोधन… इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में बड़े इन्वेस्टर्स को आकर्षित करना है… शहर में नई जमीन की कमी को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन अब मौजूदा उद्योगों को रफ्तार देने की तैयारी में है। जल्द आने वाली नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी में जमीन अलॉटमेंट या इस्टेट संबंधी पेचीदा नियमों को शामिल नहीं किया जाएगा। पूरा ध्यान मॉडर्नाइजेशन, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, एमएसएमई और मौजूदा यूनिट्स के विस्तार पर रहेगा। प्रशासन का मुख्य मकसद 153 एकड़ में बन रहे इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में बड़े इन्वेस्टर्स को आकर्षित करना है। इसके लिए नियमों में छूट दी जाएगी। इसका लाभ पुराने कारोबारियों को भी मिलेगा। साथ ही सख्त नियमों के चलते पड़ोसी राज्यों में हो रहे उद्योगों के पलायन पर भी ब्रेक लगेगी।
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नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी:कारोबारियों को इंसेंटिव मिलेगा, सरकारी फीस भी घटेगी
