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गाजीपुर में जमानियां क्षेत्र के नौली गांव निवासी और भारतीय सेना में हवलदार पद पर तैनात 45 वर्षीय नसीम अंसारी का पंजाब के फरीदकोट में ड्यूटी के दौरान हॉर्ट अटैक से निधन हो गया। मंगलवार देर रात तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से पैतृक गांव पहुंचा, जहां परिजनों में कोहराम मच गया। बुधवार को उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। मंगलवार रात करीब 12 बजे जैसे ही पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। बुधवार को सैन्य अधिकारियों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर पुष्पचक्र अर्पित किया। पुलिस प्रशासन, क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश सिंह सहित जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पार्थिव शरीर के साथ उनके छोटे भाई और भारतीय सेना में नायक पद पर तैनात वसीम अंसारी तथा फरीदकोट से आए नायब सूबेदार संजीव कुमार तिवारी भी पहुंचे। दोनों करीब 1,200 किलोमीटर की दूरी लगभग 17 घंटे में सड़क मार्ग से तय कर नौली गांव पहुंचे। परिजनों के अनुसार, नसीम अंसारी भारतीय सेना की 110 मीडियम रेजिमेंट में हवलदार थे और वर्तमान में 372 आर्टिलरी ब्रिगेड में ईआरई (ERE) पर तैनात थे। सोमवार को ड्यूटी के दौरान अचानक हृदयाघात आने से उनका निधन हो गया। नसीम अंसारी तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। वर्ष 2003 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनके छोटे भाई वसीम अंसारी भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं और वर्तमान में झारखंड में तैनात हैं, जबकि मंझले भाई सलीम अंसारी खेती-बाड़ी करते हैं। उनके पिता मनीर अंसारी गांव में ही रहते हैं। करीब 15 वर्ष पहले उनका विवाह बिहार के भीतीहारा निवासी आसमा खातून से हुआ था। परिवार में पत्नी के अलावा एक पुत्री अंगबिया खातून तथा दो पुत्र इस्माइल और इलियास हैं। नसीम अंसारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई नौली इंटर कॉलेज से की थी। उनके असामयिक निधन से पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अंतिम संस्कार के दौरान लालबहादुर सिंह, कैप्टन हीरा यादव, कैप्टन बब्बन राम, जमशेद राइनी, मोहम्मद अली, लल्लन सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण, पूर्व सैनिक और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से हवलदार की मौत:गाजीपुर में तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई
