Haridwar Kanwar Mela | Unique Currency Note Kanwad Attracts Devotees


हरिद्वार में दिल्ली से नोटों की कांवड़ लेकर आए दो दोस्त।

हरिद्वार में दिल्ली से आए दो कांवड़िए नोटों की कांवड़ लेकर गंगाजल भरने पहुंचे हैं। हरकी पैड़ी पर जैसे ही दोनों दोस्त नोटों से सजी कांवड़ लेकर पहुंचे, लोगों की भीड़ जुट गई। युवाओं ने उनके साथ रील भी बनाई।

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कांवड़ लेकर आए दीपांशु ने बताया कि उनकी इस कांवड़ में 100, 50, 20 और 10 रुपए के असली नोट लगाए गए हैं। इसमें कुल कितने नोट लगे हैं, इसकी गिनती नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जितने नोट उपलब्ध होते गए, उन्हें कांवड़ में सजाया जाता गया।

बारिश के मौसम को देखते हुए नोटों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी कांवड़ को पारदर्शी पन्नी से ढक दिया गया है, ताकि रास्ते में बारिश होने पर नोट खराब न हों। कांवड़ की सजावट में भी इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि श्रद्धा के साथ-साथ नोट सुरक्षित भी रहें।

तस्वीरें देखिए-

हरकी पैड़ी की तरफ जल भरने जाते दिल्ली से आए दीपांशु।

हरकी पैड़ी की तरफ जल भरने जाते दिल्ली से आए दीपांशु।

कांवड में 100, 50, 20 और 10 के नोट शामिल किए गए हैं।

कांवड में 100, 50, 20 और 10 के नोट शामिल किए गए हैं।

दोनों दोस्तों का बयान…

4 पॉइंट में पूरी खबर…

1. चार साल से लगातार आ रहे- दिल्ली के हर्ष विहार निवासी शिवभक्त दीपांशु पिछले चार सालों से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। पिछले साल हरिद्वार यात्रा के दौरान उन्होंने कुछ अलग करने का संकल्प लिया था और नोटों की कांवड़ ले जाना उनका एक सपना था।

इस अनोखी कांवड़ को तैयार करने के लिए दीपांशु, उनके साथी तरुण और अन्य 7 दोस्तों (कुल 9 लोगों) ने मिलकर काम किया। कांवड़ की डिजाइनिंग, नोट लगाने और उन्हें सुरक्षित व्यवस्थित करने में पूरी एक दिन और एक रात की मेहनत लगी, जिसके बाद मंगलवार सुबह यह कांवड़ बनकर तैयार हुई।

कांवड़ में ₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 के असली नोट लगाए गए हैं। उपलब्ध होते गए नोटों को सजाया जाता गया, इसलिए इनकी कोई गिनती नहीं की गई और कुल रकम अनगिनत है। बारिश के मौसम को देखते हुए नोटों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी कांवड़ को पारदर्शी (वॉटरप्रूफ) पन्नी से सावधानीपूर्वक ढका गया, ताकि रास्ते में बारिश होने पर नोट खराब न हों।

2. हरकी पैड़ी पर भरा गंगा जल- जैसे ही दीपांशु और तरुण नोटों से सजी यह अनोखी कांवड़ लेकर हरकी पैड़ी पहुंचे, श्रद्धालुओं और पर्यटकों का हुजूम इसे देखने के लिए उमड़ पड़ा। रंग-बिरंगे असली नोटों से ढकी इस कांवड़ के साथ युवाओं और यात्रियों ने जमकर फोटो खिंचवाई, रील बनाई और यह जानने की कोशिश करते रहे कि इसमें कुल कितने रुपए लगे हैं।

3. गंगाजल पूजन और दिल्ली के लिए पदयात्रा- मंगलवार को हरकी पैड़ी से विधि-विधान के साथ गंगाजल भरा गया। गंगाजल भरने के बाद दीपांशु और उनके 3 अन्य साथियों का दल दिल्ली (हर्ष विहार) के लिए रवाना हुआ।

यह एक कंधे की कांवड़ है, जिसे पूरी यात्रा के दौरान स्वयं दीपांशु अकेले अपने कंधे पर उठाकर ले जाएंगे।

4. नोटों का उपयोग और भविष्य की मनोकामना- दीपांशु और तरुण ने स्पष्ट किया कि इस कांवड़ का उद्देश्य किसी प्रकार का प्रदर्शन करना नहीं है। यात्रा पूरी होने के बाद शिवालय पहुंचकर कांवड़ से सारे नोट उतारे जाएंगे और उन्हें मंदिर में दान कर दिया जाएगा, जिससे भंडारा कराया जाएगा या ज़रूरतमंदों की मदद की जाएगी।

दीपांशु ने बताया कि उन्होंने इस बार भोलेनाथ से एक विशेष मनोकामना मांगी है। यदि उनकी यह मन्नत पूरी होती है, तो वे अगले वर्ष इससे भी बड़ी और अधिक नोटों से सजी कांवड़ लेकर हरिद्वार आएंगे।

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