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- Pt. Vijayshankar Mehta Column | Learn Humility And Politeness From Hanuman Ji
8 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
जैसे कुछ प्रोडक्ट बाजार से गायब हो गए, ऐसे ही मनुष्य-जीवन के कुछ व्यवहार इन दिनों लापता हैं। उनमें से दो हैं- विनम्र शब्द और नम्र भंगिमा। जिसे देखो वो भाषा में भद्देपन, आक्रामकता को सफलता के लिए जरूरी मानता है। ओटीटी, सोशल मीडिया के कारण एक स्लैंग वाली भाषा को युवा पीढ़ी जुबान में उतार चुकी है। यह पीढ़ी कोविड के पहले और कोविड के बाद वाली बन गई है।
बहुत फर्क आ गया है इंसान की व्यवहार-शैली में। विनम्र शब्द और नम्र भंगिमा क्या होती है, यह हनुमान जी सिखाते हैं उस समय, जब वे सुग्रीव के पास गए। सुग्रीव ने श्रीराम जी का काम भुला दिया था। यह एक अपराध था तो हनुमान जी अपने राजा को समझाने गए। तब एक पंक्ति लिखी है- निकट जाइ चरनन्हि सिरु नावा। चारिहु बिधि तेहि कहि समुझावा।
प्रणाम किया यह नम्र भंगिमा है और जिन शब्दों में समझाया, सुग्रीव को तुरंत समझ में आ गया। अपनी हनुमान भक्ति को भी कम से कम अपने शब्दों में, अपने आचरण में इस तरह से उतारा जाए।

