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प्रयागराज में फर्जी आधार कार्ड रैकेट का भंडाफोड़:एटीएस ने मास्टरमाइंड को दबोचा, एनीडेस्क के जरिए हो रहा था खेल




प्रयागराज में आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) ने फर्जी आधार कार्ड बनाने और अवैध तरीके से आधार अपडेट कराने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान धूमनगंज क्षेत्र से सुलेमसराय निवासी विवेक त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एटीएस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और इसके आर्थिक नेटवर्क की जांच कर रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह एनीडेस्क ऐप के जरिए आधार ऑपरेटरों के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेकर यूआईडीएआई की प्रणाली में अवैध रूप से लॉगिन करता था। इसके बाद आधार नामांकन और अपडेट का काम कराया जाता था। इस तरह से तैयार किया नेटवर्क
पूछताछ में विवेक त्रिपाठी ने बताया कि वह एक निजी कंपनी में असिस्टेंट रीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर था और प्रयागराज, वाराणसी मंडल तथा सुल्तानपुर के बैंकों में आधार ऑपरेटरों की नियुक्ति का काम देखता था। बैंकों के टेंडर खत्म होने के बाद कई ऑपरेटरों की यूजर आईडी बंद हो गई थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने क्लोनिंग और बायपास तकनीक के जरिए बंद आईडी दोबारा सक्रिय कराने का दावा किया। इसके बाद पुराने ऑपरेटरों को जोड़कर समानांतर नेटवर्क तैयार कर लिया गया। एनीडेस्क आईडी करते थे शेयर
जांच में पता चला कि ऑपरेटर अपनी एनीडेस्क आईडी साझा करते थे, जबकि दूसरी ओर बैठा व्यक्ति यूआईडीएआई सिस्टम में लॉगिन कराता था। तय समय पर ऑपरेटर अपने कंप्यूटर की तारीख और समय बदलकर आधार अपडेट का काम करते थे। इसके बदले प्रति यूजर आईडी सक्रिय करने के लिए पांच हजार रुपये और प्रत्येक आधार अपडेट पर 150 रुपये लिए जाते थे। भुगतान यूपीआई और क्यूआर कोड के माध्यम से होता था।
व्हाट्सएप चैट और एक्सेल शीट से मिले अहम सबूत
एटीएस को आरोपी के मोबाइल से कई महीनों की व्हाट्सएप चैट मिली है। इनमें ऑपरेटरों की एनीडेस्क आईडी, लॉगिन का समय, भुगतान के स्क्रीनशॉट, रिजेक्ट आधार एनरोलमेंट को दोबारा मंजूर कराने से जुड़ी बातचीत और काम का पूरा रिकॉर्ड मिला है। एक एक्सेल शीट में ऑपरेटरों के नाम, सिस्टम आईडी, एनीडेस्क विवरण और किए गए आधार अपडेट का पूरा ब्यौरा भी बरामद हुआ है।
कई जिलों तक फैला था नेटवर्क
पूछताछ में आरोपी ने कई आधार ऑपरेटरों और नेटवर्क से जुड़े लोगों के नाम व मोबाइल नंबर भी बताए हैं। एटीएस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में नेटवर्क के प्रयागराज के अलावा चंदौली, चित्रकूट, अयोध्या, वाराणसी मंडल और सुल्तानपुर तक फैले होने की आशंका है। एजेंसी अब पूरे रैकेट और इससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की गहन पड़ताल कर रही है।



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