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Chandigarh Kanwar Tragedy: Brother Promised a Rakhi, Returned Home Dead After Haridwar Drowning


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यह कहते हुए सेक्टर-30 के रहने वाले नीतीश की बहन बेसुध हो जाती है। नीतीश अपने तीन दोस्तों के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेने गया था, जहां गंगनहर में नहाते वक्त एक दोस्त डूबने लगा, तो नीतीश भी उसे बचाने के लिए दोस्तों के साथ कूद गया, जिससे चारों की मौत गई थी।

नीतिश की मां ने कहा कि बेटा पहली बार कांवड़ लेने गया था। उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि उन्होंने उसे जाने की अनुमति दी। नीतिश ने भोलेनाथ की कसम देकर भरोसा दिलाया था कि वह न तो गंगनहर में नहाने उतरेगा और न ही कोई जोखिम उठाएगा।

1 अगस्त को हरिद्वार से नीतीश का शव घर पहुंचा, जहां सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

बहन ने कही 2 बड़ी बातें…

वीडियो कॉल कर राखी लाने का वादा: दीपिका ने बताया कि हरिद्वार पहुंचने के बाद उसके भाई नीतीश ने वीडियो कॉल की थी। उसने बाजार में सजी राखियों की दुकानें दिखाईं और कहा कि वह उसकी पसंद की राखी खरीदकर कांवड़ के साथ घर लौटेगा। भाई ने भरोसा दिलाया था कि इस बार भी वह रक्षाबंधन पर अपनी बहन के साथ त्योहार मनाएगा।

राखी नहीं, भाई की लाश घर पहुंची: दीपिका ने रोते हुए कहा कि उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि जिस भाई के लौटने और राखी लाने का इंतजार कर रही है, उसकी लाश घर पहुंचेगी। उसने कहा- भाई ने मुझसे वादा किया था कि वह राखी लेकर आएगा, लेकिन अब वह इस दुनिया में ही नहीं है। अब मैं किसे राखी बांधूंगी। उसके इस दर्द ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

1 अगस्त को नीतीश का सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया।

1 अगस्त को नीतीश का सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया।

4 पॉइंट में जानिए हादसा कैसे हुआ…

  • 28 जुलाई को हरिद्वार गया था ग्रुप: चंडीगढ़ सेक्टर-30 और सेक्टर-26 से करीब 20 युवाओं का दल 28 जुलाई को हरिद्वार गया था। 31 जुलाई की सुबह सभी ने गंगाजल भर लिया था और चंडीगढ़ लौटने के लिए रवाना हो गए थे। कांवड़ भरने के बाद उन्होंने घरों में वीडियो कॉल कर परिवारों को बताया था कि अब वे लौट रहे हैं और उनके स्वागत की तैयारियां कर ली जाएं।
  • 10 किलोमीटर चले, थकान होने पर रुके: इससे पहले सभी ने अपनी कांवड़ों को सजवाया था। इनमें कुछ युवा कुंवारे थे। कुछ युवाओं ने शादी की मन्नत मांगते हुए कांवड़ में शादी का जोड़ा और चूड़ियां भी रखी थीं। करीब 10 किलोमीटर चलने के बाद थकान होने पर उन्होंने ज्वालापुर के जटवाड़ा पुल के पास रुकने का फैसला किया।
  • चाय से पहले गंगनहर में नहाने उतरे: दोपहर करीब पौने दो बजे उन्होंने ढाबे के पास गंगाजल का छिड़काव कर जगह को पवित्र किया और कांवड़ स्थापित कर दी। आराम करने के बाद चाय पीने से पहले सभी पास से गुजर रही गंगनहर में नहाने उतर गए।
  • दलदल और तेज बहाव में फंसे: बरसात की वजह से नहर का तल दलदली था। अचानक एक युवक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे बचाने के लिए उसके तीन साथी गहरे पानी में उतर गए। चारों तेज बहाव में फंस गए। वहीं मौजूद अन्य साथियों ने शोर मचाया और स्थानीय लोगों से मदद मांगी। लेकिन बचा नहीं पाए। इसकी सूचना मिलते ही तीन युवकों के शव मौके से निकाल लिए गए, जबकि रोहित का शव करीब दो घंटे बाद बरामद हुआ।

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