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प्रिंसिपल से गैंगरेप में बिशप समेत 4 पर चार्जशीट:प्रयागराज में पुलिस इनवेस्टिगेशन में आरोप सही मिले, आरोपियों में बेटा भी




प्रयागराज में स्कूल प्रिंसिपल से गैंगरेप के बहुचर्चित मामले में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के लखनऊ डायसिस बिशप मॉरिस एडगर दान समेत चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई है। पुलिस की इनवेस्टिगेशन में फिलहाल महिला प्रिंसिपल की ओर से लगाए गए आरोपों को सही पाया गया। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई। बिशप के अलावा तीन अन्य आरोपियों में उनका बेटा एलन दान और राकेश कुमार चत्री, विशाल नोबेल सिंह शामिल हैं। इनमें से बिशप दान, एलन दान और राकेश कुमार चत्री को गिरफ्तारी से फिलहाल हाईकोर्ट से राहत मिली हुई है।
अब पढ़िए पूरा मामला… महिला मूल रूप से बिहार की रहने वाली हैं और करीब 15 वर्ष पहले प्रयागराज आई थीं। उन्हें कटरा स्थित एक स्कूल में हेडमिस्ट्रेस नियुक्त किया गया था। यह स्कूल चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के लखनऊ डायसिस के अधीन संचालित होता है। महिला ने दो वर्ष पहले अपने पति से तलाक ले लिया था। नौकरी से निकालने की धमकी देने का आरोप महिला ने पुलिस को बताया था कि वह डायसिसयन एजुकेशन बोर्ड (DEB) की ओर से संचालित एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं। उनके अनुसार संस्था के सचिव राकेश चैट्री, चेयरमैन मॉरिस एडगर दान और उनका बेटा एलन दान पिछले एक वर्ष से उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे। महिला का आरोप है कि तीनों उनके तलाकशुदा होने का फायदा उठाते थे। वे उन्हें अपने कार्यालयों में बुलाकर गंदी नीयत से छूते थे और उनके साथ जबरन दुष्कर्म करते थे। विरोध करने पर नौकरी से निकालने और किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते थे।
‘अधिकारियों को संतुष्ट करने’ का दबाव प्रिंसिपल के मुताबिक, नौकरी जाने के डर से उन्होंने किसी को इस बारे में नहीं बताया। उनका आरोप है कि उनसे कहा जाता था कि उन्हें ऊपर के अधिकारियों को भी “संतुष्ट” करना होगा। उन्होंने बताया कि 7 मई को मॉरिस एडगर दान ने फोन कर उन्हें सचिव राकेश चैट्री के घर बुलाया। मना करने पर गाली-गलौज करते हुए परिवार को जान से मारने और नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।
महिला का कहना है कि तीनों लगातार उनका शोषण करते रहे और विरोध करने पर उन्हें एक पूर्व प्रिंसिपल का उदाहरण देकर डराया जाता था। पूर्व पति पर भी लगाया सहयोग का आरोप महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा था कि उनके पूर्व पति विशाल नोवेल सिंह को भी पूरी घटना की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने भी आरोपियों का साथ दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास अपने आरोपों से जुड़े कई साक्ष्य मौजूद हैं और लंबे समय से वह मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थीं। कौन हैं मॉरिस एडगर दान? मॉरिस एडगर दान वर्तमान में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) के लखनऊ डायसिस के बिशप हैं। डायसिस का अर्थ चर्च का वह प्रशासनिक क्षेत्र होता है, जिसकी देखरेख एक बिशप करता है। लखनऊ डायसिस का मुख्यालय प्रयागराज में स्थित है और इसका प्रमुख कैथेड्रल सिविल लाइंस स्थित ऑल सेंट्स कैथेड्रल है। लखनऊ डायसिस की स्थापना वर्ष 1893 में हुई थी। इसका कार्यक्षेत्र पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ है, जिनमें प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, मिर्जापुर और लखनऊ शामिल हैं। यह संस्था चर्चों और प्रार्थना सभाओं के संचालन के साथ-साथ पादरियों की नियुक्ति, धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन, स्कूल-कॉलेजों के संचालन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यों का भी संचालन करती है। 4 जून को समझौते की बनी थी संभावना इस मामले में बिशप मॉरिस एडगर दान और दो अन्य आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल आपराधिक रिट याचिका में कर्नलगंज थाने में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई है। इस मामले की पहली सुनवाई 4 जून को हुई थी। उस दौरान याचिकाकर्ताओं और शिकायतकर्ता पक्ष के बीच समझौते की संभावना जताई गई थी। कोर्ट को बताया गया था कि स्कूल प्रबंधन महिला प्रिंसिपल की सेवा समाप्ति का आदेश अगले दिन यानी 5 जून की सुबह 10 बजे तक वापस ले लेगा। शिकायतकर्ता पक्ष ने भी कहा था कि यदि ऐसा होता है तो उन्हें आपराधिक कार्यवाही समाप्त किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं होगी। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर 5 जून तक अंतरिम रोक लगा दी थी। 5 जून को भी जारी रही थी राहत अगली सुनवाई 5 जून को हुई। इस दौरान शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने अपना वकालतनामा वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही हाईकोर्ट ने 4 जून को पारित अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक प्रभावी बनाए रखने का निर्देश दिया। इसी सुनवाई में यह भी तय हुआ कि मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि सुनवाई कर रही पीठ के एक सदस्य इस प्रकरण की आगे सुनवाई नहीं करेंगे। इसके बाद 12 जून को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए लिस्ट करने का आदेश दिया था। यह भी स्पष्ट किया था कि पहले से लागू अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा। फिलहाल अभी केस लिस्टिंग की अगली डेट नहीं आई है।



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