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धमतरी में 251 पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक:शीतलेश्वर महादेव मंदिर ने किया आयोजन, महापौर बोले- विध्वंसक प्रवृत्ति होगी समाप्त




छत्तीसगढ़ के धमतरी में सावन मास के दौरान इंडोर स्टेडियम में 251 पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया गया। यह आयोजन हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। शीतलेश्वर महादेव मंदिर द्वारा कई वर्षों से आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम में आसपास के वार्डों के निवासियों सहित धमतरी और उसके आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। शिवभक्तों ने नदी में विसर्जित किए शिवलिंग भक्तों ने स्वयं पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। रुद्राभिषेक में जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, फूल सहित अन्य सामग्री अर्पित की गई। इसके बाद महाआरती हुई और शाम को पार्थिव शिवलिंगों की शोभायात्रा निकालकर उन्हें नदी में विसर्जित किया गया। सभी शिव भक्त एक ही रंग की वेशभूषा में उपस्थित थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खैरा राजनांदगांव के भैरवी धाम से साध्वी सुमिरन माई और नगर निगम महापौर रामू रोहरा उपस्थित रहे। श्री शीतलेश्वर महादेव मंदिर के आयोजकों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से यह रुद्राभिषेक जन कल्याण और सनातन धर्म से भटके हुए लोगों की ‘घर वापसी’ के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, ताकि वे अपने धर्म से विमुख न हों। महापौर बोले- धार्मिक आयोजनों से नकारात्मक सोच होती है खत्म महापौर रामू रोहरा ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से विध्वंसक प्रवृत्तियां और ‘राक्षस रावण’ जैसी सोच समाप्त हो जाती है। उन्होंने बताया कि जब भी शिवजी को याद किया जाता है, वे सामने खड़े होते हैं। महापौर ने 251 पार्थिव शिवलिंग के रुद्राभिषेक को श्रद्धा का प्रतीक बताया। खैरा राजनांदगांव भैरवी धाम की साध्वी सुमिरन माई ने प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर की पूजा-पाठ और आराधना करने का महत्व बताया। उन्होंने सावन मास और पार्थिव शिवलिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराज अत्रि और माता अनुसूया का उदाहरण दिया, जिन्होंने पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न किया था, जिसके परिणामस्वरूप त्रिदेव उनके आंगन में पुत्र रूप में आए थे।



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