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विश्व हिंदू परिषद, प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक के दूसरे व अंतिम दिन सोमवार को समापन सत्र को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अम्बरीश सिंह ने कहा कि युवाओं के अंदर संस्कार भरने में परिवार के बड़े बुजुर्ग अभिवावक की भूमिका निभाने में चूक जा रहे है। युवाओं के बीच भटकाव हो रहा है, वे अपनी संस्कार व संस्कृति को समझना नहीं चाहते, इनसे दूरियां बना रहे है। ऐसे में चरित्र का क्षरण होना स्वभाविक है। युवा शादी विवाह में जयमाला को ही शादी मान ले रहे है। सात फेरों और संस्कारों में शॉर्टकट बढ़ चुका है, अभिवावक अपनी भूमिका भूल चुके है। ऐसे में जरूरत है विश्व हिंदू परिषद सत्संग, साप्ताहिक मिलन, धार्मिक अनुष्ठानों पर विशेष ध्यान दें व युवा पीढ़ी को पुरानी इतिहास व अपनीं परम्पराओं को याद दिलाएं। विश्व हिंदु परिषद का कार्य सनातन धर्म व सनातनियों की रक्षा करना है। इसलिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर समर्पण भाव से काम कर धर्म को प्रस्थापित करना ही हम सभी कार्यकर्ताओं का परम कर्तव्य है। साथ ही अपनी धर्म की निश्च्छल अक्षुण्ता के लिए हम सभी को चाहिए कि हमारी प्राणों से प्रिय गौ माता की हत्या को केवल रोके ही नही बल्कि गौ माता की संरक्षण के लिए भी काम करें। सनातन धर्म मे गौमाता हमारी धर्म की सबसे बड़ी पहचान है। वहीं विश्व हिंदू परिषद के नवनियुक्त झारखंड बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय प्रताप सिंह ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कार्यकर्ताओं का काम है कि अपरिचित सनातन के बीच परिचय बनाकर काम करे। बैठक के अंतिम दिन विभिन्न जिलों तथा आयामों के लिए नए पदाधिकारियों की घोषणा के द्वारा संगठन विस्तार की सम्पुष्टि भी की गई। इस दो दिवसीय प्रान्त कार्यसमिति बैठक में केंद्रीय मंत्री अम्बरीश सिंह, बिहार झारखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री विजय प्रताप सिंह, पटना गुवाहाटी क्षेत्र धर्माचार्य प्रमुख बीरेंद्र बिमल, क्षेत्र मंत्री बीरेंद्र साहू, झारखंड प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन, प्रान्त उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, प्रान्त मंत्री मिथिलेश्वर मिश्रा, प्रान्त मंत्री सह प्रान्त बजरंग दल संयोजक रंगनाथ महतो, मार्गदर्शन मंडली संयोजक चैतन्य स्वामी श्री कृष्ण ब्रह्मचर्य, सह मंत्री मनोज पोद्दार, रामनरेश सिंह, विश्व हिंदू परिषद लोहरदगा ज़िला अध्यक्ष रितेश कुमार सहित झारखंड प्रांत के 24 जिलों के विभिन्न आयामों के करीब 300 जिलापदाधिकारी उपस्थित रहे।
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आज की पीढ़ी जयमाला को ही शादी मान लेती है, फेरो और संस्कारों को समझना नहीं चाहती : केंद्रीय मंत्री
