Headlines

ब्रिटेन के हेल्थ सिस्टम में बढ़ रहा नस्लवाद:3 साल में 55% मामले बढ़े; अश्वेत कर्मचारियों को ‘बंदर’ और ‘गंदे विदेशी’ कहने का आरोप




ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में नस्लवाद का संकट गहराता जा रहा है। सोसायटी ऑफ रेडियोग्राफर्स (एसओआर) द्वारा 381 रेडियोग्राफरों पर किए गए ताजा सर्वे में सामने आया है कि पिछले 18 महीनों में अश्वेत और एशियाई हेल्थ वर्कर्स के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। कई कर्मचारियों ने बताया कि मरीज उन्हें ‘बंदर’, ‘गंदे विदेशी’ जैसे अपमानजनक शब्द कहते हैं, जबकि कुछ मरीज गैर-श्वेत डॉक्टरों और रेडियोग्राफरों से इलाज कराने से ही इनकार कर देते हैं। यह मुद्दा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एनएचएस में करीब 45,000 भारतीय डॉक्टर और हेल्थ वर्कर्स काम करते हैं। ये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मचारियों का सबसे बड़ा समूह हैं। एक महिला रेडियोग्राफर ने बताया कि हिजाब पहनने के कारण एक मरीज ने उनकी अंग्रेजी क्षमता पर सवाल उठाया, जबकि वह स्थानीय यॉर्कशायर लहजे में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलती हैं। वहीं, नाइजीरिया से आए रेडियोग्राफर पॉल अवाह का कहना है कि कई मरीज जानबूझकर उनकी अंग्रेजी न समझने का दिखावा करते हैं। रॉयल कॉलेज ऑफ नर्सिंग के मुताबिक उसके सदस्यों के साथ हुई नस्लवादी घटनाओं में तीन वर्षों में 55% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, एनएचएस स्टाफ सर्वे के अनुसार, हर पांच में से एक अश्वेत या अल्पसंख्यक कर्मचारी ने मरीजों या आम लोगों द्वारा बदसलूकी, धमकी या उत्पीड़न की शिकायत की, जबकि श्वेत कर्मचारियों में यह अनुपात 20 में से केवल एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रवृत्ति पर जल्द अंकुश नहीं लगाया गया तो इसका असर ब्रिटेन की हेल्थकेयर सर्विसेज पर पड़ेगा। अधिकारियों का दावा: कार्रवाई के निर्देश दिए एनएचएस इंग्लैंड के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर थॉमस सिमंस ने कहा कि हेल्थ वर्कर्स के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार है और एनएचएस में इसकी कोई जगह नहीं है। नए कर्मचारी स्टैंडर्ड के तहत नस्लवाद रोकने, पीड़ित कर्मचारियों को सहायता देने और ऐसा व्यवहार करने वाले मरीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मौजूदा राजनैतिक माहौल से बढ़ा नस्लवाद हेल्थ वर्कर्स के मुताबिक ब्रिटेन में बढ़ती आप्रवासी-विरोधी राजनीति ने ऐसे व्यवहार को बढ़ावा दिया है। मौजूदा राजनीतिक माहौल और दक्षिणपंथियों द्वारा की जा रही बयानबाजी भी एनएचएस कर्मचारियों के खिलाफ नस्लवाद में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *