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पंजाब में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के ‘जीवन ज्योत 2.0’ प्रोजेक्ट के तहत बाल भिक्षावृत्ति को खत्म करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रदीप सिंह गिल के विशेष दिशा-निर्देशों पर बाल सुरक्षा अधिकारी मुबीन कुरैशी के नेतृत्व में विभाग की एक विशेष टीम द्वारा शहर के विभिन्न बाजारों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और सार्वजनिक स्थलों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर भीख मांग रहे बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य प्रदान करना है। इस विशेष चेकिंग अभियान के दौरान विभागीय टीम को एक बाजार में एक बच्चा भीख मांगता हुआ मिला। टीम के सदस्यों ने बेहद संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ बच्चे से बातचीत की और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की। बच्चे की दयनीय स्थिति को देखते हुए विभाग ने उसे तुरंत बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया। इसके बाद विभाग द्वारा बच्चे की पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के बारे में गहनता से जानकारी जुटाई गई, ताकि उसके पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। पहली बार स्कूल की चौखट पर पहुंचा बच्चा, विभाग ने कराया दाखिला बाल सुरक्षा विभाग के अथक और मानवीय प्रयासों के फलस्वरूप उस बच्चे का पहली बार एक औपचारिक स्कूल में दाखिला करवाया गया है। अब तक शिक्षा से पूरी तरह वंचित रहे इस बच्चे को स्कूल भेजने का उद्देश्य उसे भिक्षावृत्ति के दलदल से बाहर निकालकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। विभाग की इस पहल से न सिर्फ बच्चे को शिक्षा का मौलिक अधिकार मिला है, बल्कि उसके लिए एक उज्ज्वल और स्वाभिमानी भविष्य के द्वार भी खुल गए हैं। समाज से अपील: बच्चों को भीख न दें, विभाग को दें सूचना इस सफल कार्रवाई के बाद बाल सुरक्षा विभाग ने आम जनता और नागरिकों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। विभाग ने कहा है कि लोग सड़कों या बाजारों में बच्चों को भीख (पैसा या सामान) देकर अनजाने में इस कुप्रथा को बढ़ावा न दें। इसके बजाय, यदि कहीं भी कोई बच्चा भीख मांगता हुआ दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित बाल सुरक्षा विभाग या चाइल्डलाइन को दें। नागरिकों के इस छोटे से सहयोग से ऐसे बेसहारा बच्चों को सही समय पर मदद मिल सकेगी।
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मलेरकोटला में भीख मांग रहे बच्चों का स्कूल में दाखिला:महिला व बाल विकास विभाग ने चलाया अभियान, लोगों से सहयोग की मांग
