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भिलाई टाउनशिप आवास नीति पर आक्रोश, 500 लोग सड़क पर:रिटेंशन पॉलिसी बदलाव, नोटिस के खिलाफ प्रदर्शन; पुलिस से झड़प




भिलाई टाउनशिप में सेल प्रबंधन की आवास नीति में संभावित बदलाव और रिटेंशन प्रावधान खत्म होने की जानकारी सामने आने के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। इस्पात मंत्रालय को भेजे गए डीपीआर में रिटेंशन का प्रावधान नहीं होने से उनकी चिंता बढ़ गई है। ‘भिलाई को बचाना है’ मुहिम के तहत 500 से अधिक लोग सड़क पर उतर आए। इस दौरान भिलाई के मेन गेट पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प भी हुई। टाउनशिप में लाइसेंस आवास, लीज रजिस्ट्रेशन और रेंट रिटेंशन स्कीम से जुड़े मामलों को लेकर पहले से ही असमंजस की स्थिति है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि सालों तक भिलाई स्टील प्लांट में सेवा देने के बाद टाउनशिप में रहने वाले परिवारों के आवास का भविष्य अनिश्चित हो गया है। लाइसेंस वाले मकानों पर लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं, जबकि लीज वाले मकानों के रजिस्ट्रेशन में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। रिटेंशन व्यवस्था खत्म होने की आशंका सबसे बड़ी चिंता कार्मिकों के अनुसार, मोनेटाइजेशन नीति के तहत रिटेंशन व्यवस्था खत्म होने की आशंका सबसे बड़ी चिंता है। उनका आरोप है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों से 10 लाख रुपए तक सुरक्षा जमा और किराए के 32 गुना तक राशि लेने के बावजूद 24 रुपए प्रति वर्गफुट किराया लेने की तैयारी की जा रही है। टाउनशिप के विकास में रिटेंशन धारकों के योगदान का हवाला सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि टाउनशिप के विकास और रखरखाव में रिटेंशन धारकों का लंबे समय से योगदान रहा है। ऐसे में आवास नीति में बदलाव करते समय उनके हितों और वर्षों की सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 10 हजार से ज्यादा परिवारों पर असर की आशंका स्थानीय नागरिकों के बीच टाउनशिप के बड़े हिस्से को खाली कराने और भविष्य में जमीन निजी संस्थाओं या बिल्डरों को सौंपे जाने की चर्चाएं भी हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार जारी नोटिसों से 10 हजार से अधिक परिवारों पर असर पड़ने की आशंका है। वर्षों से रह रहे परिवारों को मकान खाली कराने का विरोध स्थानीय लोगों का दावा है कि पूरे मामले से 10 हजार से ज्यादा परिवार प्रभावित हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को अचानक मकान खाली करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि भिलाई की पहचान उसकी टाउनशिप और यहां की सामाजिक बसाहट से जुड़ी है। ‘भिलाई को बचाना है’ इसी मुद्दे को लेकर बीते शनिवार शाम ‘भिलाई को बचाना है’ मुहिम के तहत युवाओं और भिलाईवासियों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। भिलाई सत्याग्रह के बैनर तले युवा कांग्रेस और स्थानीय नागरिकों ने बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। मुर्गा चौक से मेन गेट तक निकाला मार्च सेक्टर-1 स्थित मुर्गा चौक से 500 से ज्यादा लोग मार्च करते हुए भिलाई स्टील प्लांट के मेन गेट की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारी आवास खाली करने के नोटिस, मकानों के आवंटन, लाइसेंस, लीज रजिस्ट्रेशन और रिटेंशन पॉलिसी में बदलाव का विरोध कर रहे थे। इसके साथ ही बीएसपी के कथित निजीकरण को लेकर भी नारेबाजी की गई। मेन गेट से पहले तीन लेयर की बैरिकेडिंग प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बीएसपी मेन गेट के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। करीब 200 पुलिसकर्मियों और 150 सीआईएसएफ जवानों को तैनात किया गया। मेन गेट की ओर जाने वाले मार्ग पर तीन लेयर का सुरक्षा घेरा बनाया गया था। दूसरे बैरिकेड पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका प्रदर्शनकारी पहले बैरिकेड तक पहुंचे और उसे पार कर आगे बढ़ने लगे। दूसरे बैरिकेड के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन करने का अनुरोध किया, लेकिन कुछ देर बाद माहौल गरमा गया। पेड़ों पर चढ़े युवा, बैरिकेड पार करने की कोशिश प्रदर्शन के दौरान कुछ युवा पेड़ों पर चढ़ गए, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर भी फेंके। कई लोगों ने बैरिकेड पर चढ़कर उसे पार करने की कोशिश की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच करीब एक घंटे तक झूमाझटकी की स्थिति बनी रही। मेन गेट की ओर बढ़ने से रोकती रही पुलिस प्रदर्शनकारी लगातार बैरिकेडिंग पार कर मेन गेट की ओर बढ़ने की कोशिश करते रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस बल पूरे समय मौके पर तैनात रहा और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करता रहा। विधायक बोले- एक भी घर खाली नहीं होने देंगे प्रदर्शन में पहुंचे भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि भिलाई की बसाहट को खत्म करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से आवासों को नोटिस दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक आवासों को खाली कराकर जमीन किसी निजी संस्था को देने की योजना के खिलाफ वे और भिलाई की जनता खड़ी है। देवेंद्र यादव ने कहा कि, “हम भिलाई का एक भी घर खाली नहीं होने देंगे।” उन्होंने कहा कि आवासों से जुड़े मुद्दे पर आंदोलन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने नोटिस प्राप्त करने वाले परिवारों तक पहुंचने और उनकी समस्याएं जानने के लिए अभियान चलाने की भी बात कही।



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