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ललितपुर शहर के गांधी नगर स्थित श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर रविवार को सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण और श्रीरूद्रमहायज्ञ का आयोजन किया गया। शाम पांच बजे तक श्रद्धालुओं ने 40 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। सुबह श्रीरूद्रमहायज्ञ में पीठ पूजन संपन्न हुआ। यह पूजन प्रधान यजमान हरिशंकर साहू और अन्य सह-यजमानों द्वारा किया गया। दोपहर में पार्थिव शिवलिंग का पूजन और महारूद्राभिषेक भी किया गया। इसके बाद चंडीपीठाधीश्वराचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की उपासना मनुष्य के लिए कल्पवृक्ष प्राप्त करने के समान है। स्वामी जी ने बताया कि भगवान की आराधना से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। महामृत्युंजय शिव की कृपा से ही मार्कण्डेय ऋषि को अमरत्व की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान की आराधना जितनी सरल है, उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना उतना ही कठिन है। जो व्यक्ति शिव की कृपा प्राप्त करने के बाद अनीति के मार्ग पर चलता है, उसका हश्र भस्मासुर और रावण जैसा होता है, जो महापराक्रमी होने के बावजूद अधर्म के कारण नष्ट हो गए। इसलिए शिव की कृपा मिलने पर मनुष्य को धर्म, न्याय और नीति के मार्ग पर चलना चाहिए। स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज ने आगे कहा कि शिव के स्मरण में महाशक्ति है, जो जीवन की बाधाओं को दूर करती है। उनके स्मरण से महाप्रलय की दिशा भी बदल जाती है। भगवान शिव हर संकट का विनाश करते हैं और भक्त की हर पीड़ा व बाधाओं का शमन करते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान भोलेनाथ के पार्थिव स्वरूप का नियमित निर्माण, पूजन और महाभिषेक मनुष्य के जीवन में सुख-शांति का संचार करता है। भगवान के नियमित जप से अनंत फल की प्राप्ति होती है। शिव महापुराण की आरती यजमान राजेश्वरी सिसौदिया द्वारा की गई। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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ललितपुर चंडी मंदिर में 40 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण:स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज ने शिव उपासना का महत्व बताया
