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रोहतक जिले के सांपला में सिकर-नरेला पावरग्रिड लाइन के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। रविवार को भैंसरू कलां में भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के नेतृत्व में हुई बैठक में सांपला मंडल के लगभग आधा दर्जन गांवों के किसानों ने आंदोलन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए। किसानों ने घोषणा की है कि वे अब अपने खेतों की स्वयं रखवाली करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पावरग्रिड की टावर लगाने वाली टीम गांवों के रास्तों से खेतों की ओर बढ़ती है, तो उसे रास्ते में ही रोका जाएगा। किसानों ने खेतों के रास्तों पर धरना देकर पहरा देने का भी फैसला किया है। सांपला एसडीएम सहित संबंधित अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग किसानों ने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजा निर्धारण में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार तत्कालीन सांपला एसडीएम सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने तक वे प्रशासन के साथ कोई बातचीत नहीं करेंगे। किसानों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के दौरान वास्तविक बाजार मूल्य से कम दरों पर मुआवजा तय किया गया, जिससे प्रभावित किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि, ये आरोप किसानों और उनके संगठन द्वारा लगाए गए हैं। किसान संगठन ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा ने इस मामले में रोहतक के उपायुक्त को कानूनी नोटिस भी भेजा है। मोर्चा के अनुसार, 6 अगस्त को दिए गए इस नोटिस में तत्कालीन एसडीएम सांपला सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। किसान संगठन ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। मोर्चा का कहना है कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे प्रभावित किसानों के साथ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करेंगे। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी परियोजना के विरोध में नहीं है। उनकी मुख्य मांग जमीन का उचित मुआवजा दिलाना और मुआवजा निर्धारण की कथित गलत प्रक्रिया के लिए जिम्मेदारी तय कराना है।
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सांपला में पावरग्रिड मुआवजे को लेकर किसानों का आंदोलन तेज:खेतों में खुद पहरा देने का ऐलान, बोले-तत्कालीन SDM पर केस दर्ज हो
