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पश्चिमी सिंहभूम जिले में मंगलवार को भाकपा माओवादी के 10 लाख रुपए के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर सहित चार सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह आत्मसमर्पण ऑपरेशन ‘नवजीवन-III’ के तहत हुआ। पुलिस के अनुसार, ये नक्सली कोल्हान, पोराहाट और सारंडा के दुर्गम जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय थे। आत्मसमर्पण करने वालों में सालुका कायम के अतिरिक्त कोदोमुनी कोड़ा, पिंकी पूर्ती उर्फ सुकांती पूर्ती और अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम शामिल हैं। सालुका पर चाईबासा में 90 मामले हैं दर्ज पुलिस के अनुसार, सालुका संगठन की जोनल कमेटी का सदस्य था। उसके खिलाफ चाईबासा में 90 और सरायकेला में 6, कुल 96 मामले दर्ज हैं। उस पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण के समय सालुका ने एक राइफल, दो मैगजीन और 843 कारतूस सहित अन्य सामग्री जमा की। अन्य नक्सलियों के पास से एके-47 राइफल, इंसास राइफल, वायरलेस सेट, मैगजीन और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, नक्सलियों ने संगठन के भीतर कथित शोषण और दबाव से परेशान होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। सुरक्षाबलों के लगातार अभियानों, जंगलों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और सामुदायिक पुलिसिंग का भी आत्मसमर्पण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। एसडीपीओ चक्रधरपुर डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी की पहल पर सालुका के प्रभाव वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इससे ग्रामीणों का पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा, जिसने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को गति प्रदान की। 2025 में पश्चिमी सिंहभूम में 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में पश्चिमी सिंहभूम में 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। वर्ष 2026 में ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत 25 और नवजीवन-II के तहत 14 नक्सलियों ने हथियार डाले। पुलिस ने बताया कि वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक जिले में कुल 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 22 मुठभेड़ में मारे गए और 60 को गिरफ्तार किया गया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार अभियानों और आत्मसमर्पण से पश्चिमी सिंहभूम में नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने में सहायता मिली है।
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10 लाख के इनामी नक्सली ने किया सरेंडर:ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत तीन अन्य ने भी डाले हथियार, सारंडा के दुर्गम जंगल में थे सक्रिय
