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संपत्ति के दाम बढ़ने से रिकॉर्ड होम इक्विटी:महंगे क्रेडिट कार्ड लोन चुकाने को अमेरिकी कम ब्याज पर घर रख ले रहे कर्ज




अमेरिका में घर अब सिर्फ रहने या संपत्ति बनाने का जरिया नहीं रह गया है। बढ़ते क्रेडिट कार्ड लोन के बीच यह एक तरह की ‘एटीएम मशीन’ बनता जा रहा है। लोग घर की बढ़ी कीमत यानी होम इक्विटी निकालकर क्रेडिट कार्ड के बिल चुका रहे हैं। कोई मॉर्गेज रीफाइनेंस करा रहा है तो कोई घर को गिरवी रखकर नया कर्ज ले रहा है। यानी प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमत अब बढ़ते खर्चों को संभालने का सहारा बन रही है। ओहायो की 63 वर्षीय रिटायर्ड स्कूल टीचर लिंडा बोरोस्की इसका उदाहरण हैं। इलाज के लिए यात्रा करते-करते उन पर 26 हजार डॉलर यानी 25 लाख रुपए का क्रेडिट कार्ड कर्ज हो गया। मासिक किस्त ने बजट बिगाड़ दी। उन्होंने घर की इक्विटी के बदले 43 लाख रुपए का लोन लिया। इससे क्रेडिट कार्ड कर्ज चुकाया, घर में नई खिड़कियां लगवाईं और पोती से मिलने की यात्रा के लिए कुछ रकम बचा ली। दरअसल अमेरिकियों के घरों में जमा होम इक्विटी रिकॉर्ड 35 लाख करोड़ डॉलर यानी करीब 3,340 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। ऊंची कीमतों और महंगी मॉर्गेज दरों के कारण घरों की खरीद-बिक्री धीमी हो गई है। ऐसे में जिन लोगों ने कुछ साल पहले करीब 3% की दर पर होम लोन लिया था, वे घर बेचकर महंगा नया लोन लेने के बजाय उसी संपत्ति से पैसा निकाल रहे हैं। घर की इक्विटी निकालने की सबसे बड़ी वजह ब्याज दरों का अंतर है। 30 साल के फिक्स्ड होम लोन की औसत दर 6.69% है, जबकि क्रेडिट कार्ड पर ब्याज अक्सर 20% से ज्यादा होता है। ऐसे में परिवार महंगे कार्ड लोन को सस्ते होम लोन में बदलना बेहतर मान रहे हैं। औसतन एक अमेरिकी मकान मालिक के पास 2.9 करोड़ रुपए की होम इक्विटी है। लेकिन यह राहत जोखिम से खाली नहीं है। इक्विटी निकालने से कर्ज खत्म नहीं होता, सिर्फ उसका स्वरूप बदलता है। अगर अर्थव्यवस्था कमजोर हुई या आय घटी तो रीफाइनेंस किए मॉर्गेज की किस्त भी भारी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में कर्ज चुकाने के लिए घर बेचने की नौबत आ सकती है। यानी आज घर सहारा है, लेकिन कल यही कर्ज का सबसे बड़ा बोझ भी बन सकता है। पहली तिमाही के दौरान अमेरिका में होम इक्विटी से निकाले गए 4.5 लाख करोड़ 2026 की पहली तिमाही में अमेरिकी मकान मालिकों ने घर की इक्विटी से करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए निकाले। इसमें अन्य संपत्तियां गिरवी रखकर लिए गए कर्ज से 25 अरब डॉलर और मौजूदा मॉर्गेज को रीफाइनेंस करके कैश निकालने से 22 अरब डॉलर मिले। कैश-आउट रीफाइनेंसिंग सालभर में 18% बढ़ी। इसी दौरान क्रेडिट कार्ड कर्ज 6% बढ़कर 119.28 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के मुताबिक, पहली तिमाही में अमेरिकी परिवारों का कुल कर्ज 1,794 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले से 3% ज्यादा है। क्रेडिट कार्ड कर्ज इससे भी तेज बढ़ा है। प्रति कार्डधारक औसत कर्ज 2018 से पिछले साल तक 22.7% बढ़ गया है।



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