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4 मंजिला महल, बीयर-बार, लाख रुपये बोतल की शराब:‘फर्जी IAS’ की 100 करोड़ की संपत्ति का क्या होगा, जब्त पैसों का क्या होता है, जानें




खगड़िया से गिरफ्तार ‘फर्जी IAS अफसर’ मनीष गुप्ता उर्फ चिक्कू। लाख रुपए बोतल की विदेश शराब पीने वाले मनीष के पास अभी तक की जांच में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रॉपर्टी का पता चला है। 4 दिन से जांच जारी है। मनीष की 100 करोड़ की प्रॉपर्टी का क्या होगा, जांच एजेंसियां जब्त पैसे और प्रॉपर्टी का क्या करती हैं, जानेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः ‘फर्जी IAS’ मनीष गुप्ता का पूरा मामला क्या है? उसके घर क्या-क्या मिला? जवाबः जुलाई के आखिरी सप्ताह में दिल्ली से बिहार पुलिस को एक इनपुट मिला। इसके बाद पटना मुख्यालय ने खगड़िया SP भानु प्रताप सिंह को जांच करने का आदेश दिया। SP भानु प्रताप सिंह ने DIU (जिला जांच इकाई) और STF की जॉइंट टीम बनाई और छापेमारी करने का आदेश दिया। सवाल-2ः मनीष की 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का क्या होगा? जवाबः खगड़िया पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 106 के तहत मनीष की चल-अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया है। उसे जेल भेज दिया है। पूछताछ जारी है। अब जानिए, आगे क्या-क्या होगा… मनीष पर चलेंगे अलग से 2 केस जांच में ED की हो सकती है एंट्री हालांकि, पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह कहते हैं, ‘मनीष प्रोफेसर का बेटा है। उसकी फैमिली की आर्थिक स्थिति पहले से ठीक-ठाक है। यदि वह अदालत में साबित कर देता है कि उसकी संपत्ति (जैसे पैतृक जमीन या वैध व्यापार की आय) अपराध से पहले की है और इसका ठगी से कोई संबंध नहीं है तो कोर्ट संपत्ति को रिलीज कर सकती है।’ सवाल-3ः जांच एजेंसियां जब्त पैसे का क्या करती हैं? जवाबः ED, CBI, आयकर विभाग, निगरानी, आर्थिक अपराध इकाई (EOU), विशेष निगरानी इकाई (SVU), पुलिस को जांच, पूछताछ, छापेमारी करने और चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार है। पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह बताते हैं, ‘जब जांच एजेंसियां कहीं छापेमारी करती हैं तो उसके दो हिस्से होते हैं। पहला-गिरफ्तारी और पूछताछ, दूसरा- सबूत इकट्ठा करना। जांच एजेंसियां अलग-अलग सूचनाओं पर छापे मारती हैं। ऐसे में जरूरी नहीं है कि एक आरोपी के यहां एक ही बार छापा मारा जाए, बल्कि छापेमारी कई चरणों में हो सकती है।’ जब्त संपत्ति का क्या होता है, जानिए… नोट डिटेल्स के साथ कैश बैंक में जमा होता है सबसे पहले जब्त किए गए पैसे या कैश का पंचनामा बनाया जाता है। पंचनामे में इस बात का जिक्र होता है कि कुल कितने पैसे बरामद हुए। कितनी गड्डियां हैं, कितने 100, 200, 500 और अन्य नोट हैं। आयकर विभाग को 60 दिन में कोर्ट में साबित करना होगा आयकर विभाग को बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन (प्रोहिबिटेशन) एक्ट और आयकर एक्ट के तहत संपत्ति को अटैच करने का अधिकार है। आयकर विभाग किसी भी प्रॉपर्टी को अधिक से अधिक 60 दिन यानी 2 महीने के लिए अटैच कर सकता है। अगर तब तक आयकर विभाग अटैच करने को अदालत में वैध नहीं ठहरा पाता है तो संपत्ति खुद ही रिलीज हो जाएगी, यानी वो अटैच नहीं रह जाएगी। ED 6 महीने से ज्यादा अटैच नहीं कर सकती प्रॉपर्टी ED किसी भी प्रॉपर्टी को अधिक से अधिक 180 दिनों के लिए ही सीज कर सकती है। अगर ED 180 दिनों के अंदर प्रॉपर्टी अटैच करने को अदालत में सही साबित कर देती है तो संपत्ति पर सरकार का कब्जा हो जाता है। इसके बाद आरोपी को ED की इस कार्रवाई के खिलाफ ऊपर की अदालतों में अपील करने के लिए 45 दिन का समय मिलता है। निगरानी, SVU, EOU 6 महीने तक कर सकती हैं संपत्ति जब्त बिहार में करप्शन पर राज्य सरकार की 3 जांच एजेंसियां निगरानी, SVU, EOU कार्रवाई करती हैं। तीनों एजेंसियां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988, बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम-2009 और BNSS की धारा 107 के तहत अवैध प्रॉपर्टी को जब्त करती हैं। संपत्ति किसकी होगी, अदालत करती है आखिरी फैसला



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