Rajasthan OBC Reservation Controversy | Panchayat Lottery System Explained


ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर निकाली गई लॉटरी में निकाय और जिला प्रमुखों के पदों पर दिया गया आरक्षण अब विवादों में आ गया है। कांग्रेस के साथ ओबीसी वर्ग के नेताओं ने आबादी बढ़ने के बावजूद आरक्षण कम करने के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही आंदोलन की चेताव

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क्या सच में ओबीसी का आरक्षण पहले से कम हुआ है? आखिर लॉटरी से रिजर्व सीटें तय करने का फॉर्मूला क्या है? ऐसे ही सवालों के जवाब जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में…

सवाल-1 : ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने के बाद क्या OBC को रिजर्वेशन पिछली बार से कम मिला?

जवाब : हां, जिला प्रमुख की लॉटरी में पिछली बार की तुलना में ओबीसी वर्ग का आरक्षण 2.96 फीसदी कम हुआ है। जिला परिषद 33 से बढ़कर 41 हो गई हैं। लेकिन ओबीसी की सीटें पहले भी 5 थीं और अब भी 5 ही हैं। पिछले चुनावों में ओबीसी के लिए जिला प्रमुख के पदों में 15.15% आरक्षण था, इस बार यह कम होकर 12.19% हो गया है।

दरअसल, ओबीसी आयोग ने 92 जातियों का सर्वे किया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुए इस सर्वे का उद्देश्य था ओबीसी वर्ग को उसकी आबादी के अनुसार राजनीतिक भागीदारी मिले। गुरुवार (13 अगस्त) को लॉटरी भी ओबीसी आयोग की सिफारिशों को आधार बनाकर निकाली गई। लेकिन जिला प्रमुखों के पद बढ़ने के बावजूद ओबीसी रिजर्वेशन पिछली बार से 2.96% कम रहा।

उधर, जिला प्रमुखों में एससी-एसटी का आरक्षण बढ़ा है। पिछली बार एससी का आरक्षण 18.18% था जो इस बार बढ़कर 19.51% हो गया है। पिछली बार एसटी का आरक्षण 15.15% से बढ़कर इस बार 17.07% हो गया है।

आखिर कारण क्या? राजनीतिक मामलों के विश्लेषक महेश शर्मा के अनुसार निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण की सीलिंग 50 फीसदी है। इससे ज्यादा आरक्षण नहीं दे सकते। एससी और एसटी को निकायों में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिलता है, लेकिन ओबीसी के लिए यह फॉर्मूला लागू नहीं होता। लॉटरी में पहले एससी, फिर एसटी और उसके बाद ओबीसी का आरक्षण तय करने के पीछे भी यही कारण है।

सवाल-2 : क्या आरक्षण कम होने पर लामबंद होंगे ओबीसी वर्ग के नेता?

जवाब : कई नेताओं ने आंदोलन की चेतावनी दी है। गुर्जर नेता हिम्मत सिंह ने कहा है- निकाय चुनाव की लॉटरी में 309 में से ओबीसी को 60 सीटें, जिला प्रमुख की 41 सीटों में से ओबीसी को सिर्फ 5 सीटें दी गईं। ये इनकी कुल आबादी की तुलना में कम हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार मौजूदा 21 प्रतिशत आरक्षण से गिनती करने पर नगर निकाय में 66 सीटें और जिला प्रमुख की 9 सीटें होनी चाहिए थीं।

ओबीसी वर्ग में आने वाली जातियों को अब सड़कों पर आने से रोक नहीं सकते। हम बहुत जल्द ओबीसी जातियों के सामाजिक नेताओं की बैठक कर भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।

सवाल-3 : किस आधार पर तय होता है कि कौन-सी सीट SC, ST, OBC, महिला या सामान्य रहेगी?

जवाब : इस आरक्षण फॉर्मूले को हम 3 पॉइंट में आसानी से समझ सकते हैं…

1. आरक्षण का निर्धारण: जहां-जहां चुनाव होना है, उन निकायों की कुल संख्या के आधार पर तय होता है कि कितनी सीटें SC-ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षित सीटों की संख्या तय होने के बाद इन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने के लिए लॉटरी निकाली जाती है।

साधारण शब्दों में- लॉटरी यह तय करने का तरीका है कि आरक्षित होने वाली सीटों में कौन-सी सीट किस वर्ग के खाते में जाएगी।

2. लॉटरी की प्रोसेस : सबसे पहले SC वर्ग के लिए लॉटरी निकाली जाती है। इसके लिए पिछले चुनावों में जो निकाय एससी के लिए रिजर्व थे, उन्हें अलग कर देते हैं। इसके बाद उन निकायों को लॉटरी में शामिल करते हैं, जहां एससी की आबादी सबसे ज्यादा है। फिर लॉटरी के जरिए तय सीटें SC कैटेगरी के लिए रिजर्व कर दी जाती हैं। इसके बाद ST के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। फिर OBC के लिए सीटें रिजर्व होती हैं। बाकी बची सीटें सामान्य यानी अनारक्षित रहती हैं।

जैसे- इस बार 50 नगर निकाय एससी के लिए आरक्षित किए गए हैं। पंचायत चुनाव में जिला प्रमुख के 8 पद एससी के लिए रिजर्व किए गए हैं।

जयपुर में निकाय प्रमुखों के आरक्षण की लॉटरी निकालते मंत्री झाबर सिंह खर्रा और यूडीएच सचिव रवि जैन।

जयपुर में निकाय प्रमुखों के आरक्षण की लॉटरी निकालते मंत्री झाबर सिंह खर्रा और यूडीएच सचिव रवि जैन।

3. रोटेशन : हर चुनाव में आरक्षित सीटों को बदला जाता है। हमेशा एक ही सीट रिजर्व नहीं रहती। अलग-अलग चुनावों में आरक्षण दूसरी सीटों पर जा सकता है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को भी आरक्षण का लाभ मिल सके। इस बार भी 309 निकायों के आरक्षण में रोटेशन और जनसंख्या को आधार बनाया गया।

जैसे- अजमेर नगर परिषद सभापति सीट एससी महिला रिजर्व थी, इस बार रोटेशन के कारण यहां महिला ओपन है।

सवाल-4 : लॉटरी के बाद किन बड़े नेताओं को नया क्षेत्र तलाशना होगा?

जवाब : वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक महेश शर्मा बताते हैं- आरक्षण लॉटरी में रोटेशन से कई प्रमुख चेहरों के सियासी समीकरण भी बदल गए हैं। नेताओं को अब नया ठिकाना तलाशना होगा या फिर अपने चहेते उम्मीदवार का साथ देना होगा। कुछ उदाहरणों से समझते हैं…

उदाहरण 1 : जैसलमेर में इस बार एसटी का प्रमुख बनेगा। पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद के परिवार का यहां जिला परिषद की राजनीति में दबदबा रहा है। उनके भाई सहित परिवार के लोग यहां जिला प्रमुख बनते रहे हैं। इस बार सालेह मोहम्मद के परिवार से कोई जिला प्रमुख नहीं बन पाएगा।

उदाहरण 2 : नागौर में पूर्व विधायक महेंद्र चौधरी की पत्नी पिछली बार जिला प्रमुख थीं। अब उनका इलाका डीडवाना-कुचामन में आ गया है। दोनों ही सीट एससी के लिए रिजर्व होने से अब कई नेताओं के लिए जिला प्रमुख बनने की संभावनाएं खत्म हो गई हैं।

उदाहरण 3 : नागौर में मिर्धा परिवार के नेताओं से लेकर हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़े नेताओं के लिए जिला प्रमुख चुनाव लड़ने की संभावनाएं खत्म हो गई हैं।

सवाल-5 : पंचायतों में महिलाओं को 50% और निकाय चुनाव में 33% आरक्षण ही क्यों?

जवाब : पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50% आरक्षण मिलेगा। जबकि निकाय चुनावों में यह आरक्षण 33% ही रहेगा। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी वजह भी जान लीजिए…

  • 2008: राजस्थान सरकार ने पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं का आरक्षण 33% से बढ़ाकर 50% किया।
  • 2009: निकायों में 50% आरक्षण को सीकर के मोहम्मद कलीम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
  • 19 मई 2010: हाईकोर्ट ने निकायों में 50% आरक्षण का प्रावधान निरस्त कर दिया। इसके बाद आरक्षण 33% हो गया।
  • पंचायतों में: पंचायतीराज एक्ट में बदलाव नहीं हुआ, इसलिए यहां महिलाओं को 50% आरक्षण मिलता रहा।इस बार की लॉटरी से महिला रिजर्वेशन की तस्वीर इन ग्राफिक से समझ सकते हैं…

सवाल-6: कौनसी नगर परिषद-पालिका और जिला परिषद किसके लिए हुई रिजर्व?

जवाब : राजस्थान में कुल 309 शहरी निकायों में चुनाव होंगे। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं हैं। इन निकायों में महापौर, सभापति और चेयरमैन पद के लिए हुई आरक्षण लॉटरी के तहत SC वर्ग के लिए 50, ST के लिए 11 और OBC के लिए 60 सीटें आरक्षित की गईं हैं। जबकि 188 निकाय प्रमुखों के पद सामान्य यानी अनारक्षित रहे। लॉटरी के अनुसार SC के लिए 16.18 प्रतिशत, ST के लिए 3.55% और OBC के लिए 19.41% सीटें रिजर्व रखी गईं।

सवाल-6 : अब प्रधान और निकाय वार्ड आरक्षण की लॉटरी में क्या तय होना बाकी है?

जवाब : निकाय प्रमुख और जिला प्रमुखों के बाद अब प्रधान, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और शहरी निकायों के वार्डों का आरक्षण तय होना बाकी है।

इसके लिए 17 और 18 अगस्त को कलेक्टर स्तर पर आरक्षण की लॉटरी होगी। इसमें पंचायत समिति प्रधान, जिला परिषद व पंचायत समिति के वार्डों और नगर निगम, परिषद और पालिकाओं के वार्डों का आरक्षण तय होगा।

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