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चंडीगढ़ में फेसबुक विज्ञापन से निवेश का झांसा:महिला से 23.27 लाख ठगे, व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़कर खातों में रकम जमा कराई, कोलकाता से गिरफ्तार




साइबर ठगों ने निवेश पर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर चंडीगढ़ की एक महिला से 23 लाख 27 हजार रुपये ठग लिए। महिला ने फेसबुक पर निवेश से जुड़ा विज्ञापन देखा था। इसके बाद ठगों ने उसे व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ लिया। समूह के संचालक के कहने पर महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। मामले की जांच कर रही चंडीगढ़ पुलिस के साइबर अपराध थाने की टीम ने पश्चिम बंगाल से 32 वर्षीय मोहम्मद उमर को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 17 लाख 30 हजार रुपये आरोपी के बैंक खाते में जमा हुए थे। फेसबुक पर विज्ञापन देख जुड़ी व्हाट्सऐप ग्रुप से पुलिस के अनुसार, चंडीगढ़ की रहने वाली महिला ने अपने फेसबुक खाते पर निवेश से संबंधित एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में निवेश के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने का दावा किया गया था। विज्ञापन के बाद महिला को ठगों ने व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ लिया। समूह में निवेश से संबंधित जानकारी और मुनाफे के दावे किए जाते थे। महिला को विश्वास में लेने के बाद समूह के संचालक ने उसे अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी भेजी। महिला ने ठगों के कहने पर अलग-अलग खातों में कुल 23 लाख 27 हजार रुपये जमा कर दिए। पैसे भेजने के बाद उसे निवेश से कोई फायदा नहीं मिला। जब ठगों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया, तब महिला को अपने साथ हुई ठगी का पता चला। पश्चिम बंगाल में दबिश देकर गिरफ्तार मामले की जांच के दौरान पुलिस ने महिला के बैंक खाते से निकली रकम का पूरा लेन-देन खंगाला। तकनीकी जांच और बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि ठगी की रकम में से 17 लाख 30 हजार रुपये मोहम्मद उमर के बैंक खाते में जमा हुए थे। पुलिस ने बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी जानकारी और अन्य सुराग जुटाकर आरोपी की पहचान की। आरोपी मोहम्मद उमर, अब्दुल सुभान का बेटा है और उसकी उम्र 32 वर्ष है। वह पश्चिम बंगाल में रहता था और उसका स्थायी संबंध बिहार के गया जिले से बताया गया है। तकनीकी और मैदानी जांच के बाद चंडीगढ़ पुलिस की टीम ने पश्चिम बंगाल में दबिश दी। पुलिस टीम ने आरोपी मोहम्मद उमर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि इस ठगी में दो अन्य लोग भी उसके साथ शामिल थे। अब पुलिस उन दोनों आरोपियों की पहचान और भूमिका का पता लगाने में जुटी है। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फेसबुक पर विज्ञापन किसने डाला था, व्हाट्सऐप ग्रुप कौन चला रहा था और ठगी की रकम अलग-अलग खातों में किस तरह भेजी जा रही थी।



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