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मणिमहेश यात्रा में पहली बार मोबाइल कनेक्टिविटी मिलेगी:BSNL ने धनछौ में 4G टावर लगाया; गौरीकुंड तक चलेंगे फोन; देशभर से भरमौर पहुंचते हैं श्रद्धालु




पूरे उत्तर भारत से मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु इस बार पहली बार मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सकेंगे। बीएसएनएल ने मणिमहेश यात्रा के तीसरे पड़ाव यानी ‘धनछौ’ में शनिवार को मोबाइल टावर स्थापित कर दिया है। इसे आज (रविवार) से शुरू कर दिया गया है। इसके बाद क्षेत्र में बीएसएनएल की 4G सेवाएं शुरू हो गई हैं। इससे पहले मणिमहेश यात्रा के तीसरे पड़ाव यानी ‘हड़सर’ तक पहले से मोबाइल नेटवर्क की सुविधा थी, लेकिन इससे आगे यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। लिहाजा, 25 अगस्त से शुरू हो रही मणिमहेश यात्रा पर आने वाले यात्री इस बार गौरीकुंड तक फोन का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, गौरीकुंड से आगे मणिमहेश तक अभी भी नेटवर्क उपलब्ध नहीं रहेगा। पूरे उत्तर भारत से मणिमहेश पहुंचते हैं श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा पर न केवल हिमाचल, बल्कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान और जम्मू से भी हर साल बड़ी संख्या में भगवान भोले के भक्त पहुंचते हैं। यहां कनेक्टिविटी नहीं होने से वे अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पाते। इससे कई बार परिजन भी परेशान होते हैं, क्योंकि मणिमहेश यात्रा मानसून के दौरान शुरू होती है। बीते साल बादल फटने के बाद फंस गए थे 25 हजार लोग अमूमन यह देखने में आया है कि भारी बारिश के कारण कई बार रास्ते और सड़कें बंद हो जाती हैं। इससे श्रद्धालु कई-कई दिन फंस जाते हैं। बीते साल भी मणिमहेश से निचले इलाकों में एक ही रात में दो से तीन जगह बादल फटे थे। इससे सड़कें और रास्ते बह गए थे और 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु जगह-जगह फंस गए थे। लगभग 20 श्रद्धालुओं की यात्रा के दौरान मौत हो गई थी। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से श्रद्धालुओं के साथ परिजन भी थे परेशान उस समय मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण किसी भी श्रद्धालु से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इसके बाद पांच से छह दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। आनन-फानन में सड़कें और रास्ते बहाल किए गए। कुछ लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से, जबकि कुछ को बसों और पैदल भरमौर लाया गया। जब तक परिजनों का श्रद्धालुओं से संपर्क नहीं हो पा रहा था, तब तक सभी परेशान रहे। ऐसे में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध होने से श्रद्धालु अब अपने परिजनों से संपर्क कर सकेंगे और आपात स्थिति में भी मदद पहुंचाने में आसानी होगी। पांच पड़ाव में पूरी होती है यात्रा मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की कठिन यात्रा माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को टेढ़े मेडे रास्ते, ऊंचे ऊंचे पहाड़, ग्लेशियर और नालों को पार करने पहुंचना पड़ता है। यह यात्रा पांच पड़ाव में पूरी होती है। पहला पड़ाव भरमौर, दूसरा हड़सर, तीसरा धनछौ, चौथा गौरीकुंड और पांचवां पड़ाव मणिमहेश है।



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