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अनसोल्ड प्रॉपर्टीज के रेट घटाने की तैयारी में ग्लाडा:ऑक्शन में खरीदार न मिलने पर वैल्यूअर्स करेंगे रेट रिवाइज्ड; पांच बड़ी साइट्स कई सालों से नहीं बिकी




ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (ग्लाडा) अनसोल्ड प्रॉपर्टी के रेट कम करने की तैयारी में है। ग्लाडा पांच सरकारी साइट्स के रेट घटाकर उन्हें बेचना चाहता है। बार-बार ई-नीलामी के बावजूद खरीदार न मिलने के कारण अब अथॉरिटी इन अनसोल्ड साइट्स के रिजर्व प्राइस की समीक्षा करने जा रही है। इसके तहत स्वतंत्र रजिस्टर्ड वैल्यूअर्स को जिम्मेदारी दी गई है कि वे मौजूदा रियलिस्टिक मार्केट रेट्स के आधार पर जमीनों का नया मूल्यांकन करें। ग्लाडा का मानना है कि पिछले कई सालों में तय की गई रिजर्व कीमतें बहुत अधिक थीं, जिसके कारण रियल एस्टेट मार्केट से बेहतर रिस्पॉन्स नहीं मिल पा रहा था। अब स्वतंत्र रिपोर्ट्स में सामने आने वाली ‘रियलाइजेबल वैल्यू’ को ही आगामी नीलामियों के लिए नया आधार माना जाएगा। इस प्रक्रिया के दायरे में लुधियाना शहर के पॉश इलाकों में स्थित प्राइम रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंस्टीट्यूशनल और इंडस्ट्रियल प्लॉट को शामिल किए गए हैं। अथॉरिटी ने इसके लिए बिड्स प्रक्रिया पूरी कर ली है और वैल्यूअर्स को रिपोर्ट सौंपने के लिए 21 दिनों का सख्त समय दिया है। उम्मीद है कि कीमतें व्यावहारिक होने के बाद इन बहुमूल्य जमीनों की नीलामी आसान होगी और ग्लैडा के खजाने में राजस्व आएगा। ग्लाडा किन प्रॉपर्टीज के रेट रिवाइज्ड कर रहा है, जानिए… रेट तय करने के लिए तीन तरीके अपनाएगा ग्लाडा ग्लाडा ने वैल्यूअर्स को मार्केट के वास्तविक हालात के अनुसार सही कीमत तय करने की पूरी छूट दी है। जमीन की नई दरें तय करने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीकों का इस्तेमाल होगा। पहला है मार्केट एप्रोच, जिसमें आसपास हाल ही में हुई जमीनों की रजिस्ट्री और खरीद-फरोख्त की रेट्स का पूरा हिसाब देखा जाएगा। दूसरा तरीका है इनकम एप्रोच, जिसके तहत यह अंदाजा लगाया जाएगा कि भविष्य में इस प्रॉपर्टी से कितना किराया या कमाई हो सकती है। तीसरा है कॉस्ट एप्रोच, जिसमें जमीन की लोकेशन, उसकी उपयोगिता और आसपास हुए विकास कार्यों की लागत को जोड़कर कुल वैल्यू तय की जाएगी। इसके अलावा, वैल्यूअर्स को साफ हिदायत दी गई है कि जमीन पर अगर कोई कब्जा, कानूनी विवाद, किरायेदारी या आने-जाने के रास्ते की दिक्कत हो, तो उन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही अंतिम रियलाइजेबल वैल्यू तय की जाए। 21 दिन की समयसीमा और देरी पर पेनल्टी अथॉरिटी ने बिड डॉक्यूमेंट के तहत सख्त नियम लागू किए हैं। चयनित वैल्यूएशन एजेंसियों को अलॉटमेंट के 21 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। निर्धारित समय में काम पूरा न करने पर फीस का 5 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा। ग्लाडा की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य सालों से अटके हुए कैपिटल असेट्स को लिक्विडेट करना और रियलिस्टिक रिजर्व प्राइस के साथ नए सिरे से ई-ऑक्शन आयोजित करना है। रिपोर्ट आने के बाद अगले चरण में नई दरों पर मोहर लगाई जाएगी।



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