मॉस्को/ तेहरान6 मिनट पहले
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रूस सीक्रेट रास्ते के जरिये ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को TNT विस्फोटक, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद भेज रहा है।
रिपोर्ट में यूरोपीय सरकार के एक दस्तावेज के हवाले से बताया गया कि सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि इनमें बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी कुछ पार्ट्स भी हो सकते हैं। ईरान के सैन्य भंडार हाल में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए संघर्ष में काफी कम हुए थे।
रूस इसके लिए कैस्पियन सागर का रास्ता इस्तेमाल कर रहा है। कैस्पियन सागर से रूस, ईरान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान क सीमाएं लगती हैं।
यह समुद्री रास्ता पश्चिमी देशों की निगरानी से बचने में मदद करता है। यहां से गुजरने वाले जहाज अपना ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद कर सकते हैं। इससे उनकी आवाजाही को ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
कैस्पियन सागर रूस-ईरान के लिए बैकडोर
कैस्पियन सागर रूस और ईरान के बीच एक सुरक्षित बैकडोर और रणनीतिक समुद्री रास्ते के रूप में काम करता है। यह बैकडोर दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों की नजरों से बचकर सैन्य सामान भेजने की सहूलियत देता है।
कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय तक विवाद रहा है, लेकिन 2018 में ‘कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति पर कन्वेंशन’ पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता कैस्पियन सागर के पांच तटीय देशों को इसके संसाधनों और सुरक्षा पर अधिकार देता है।
हालांकि, यह समझौता मुख्य रूप से समुद्री सीमाओं और वहां के संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा है। इसके तहत किसी बाहरी देश की सेना को यहां आने की इजाजत नहीं है। इससे यह इलाका इन पांच देशों के खास प्रभाव वाला क्षेत्र बन जाता है।
पहले ईरान रूस को ड्रोन देता था, अब रूस मदद कर रहा
यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को शाहेद जैसे ड्रोन दिए थे। अब, रूस ईरान को अपने घटे सैन्य भंडार को फिर से भरने में मदद कर रहा है।
रूस की ओर से ईरान को सामान भेजे जाने की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब इजराइल पहले ईरान के अहम बंदरगाह और सैन्य सप्लाई नेटवर्क को निशाना बना चुका है।
द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इजराइली हमलों में बंदर अंजली पोर्ट की कुछ सुविधाओं और ईरानी नौसेना से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचा था। यह पोर्ट ईरान तक सैन्य सामान पहुंचाने वाले समुद्री नेटवर्क का हिस्सा है।
चीन से भी मिसाइल के पार्ट्स ले रहा ईरान
- ईरान का रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों की लॉजिस्टिक्स संस्था अब अपने यहां बनने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों में रूस और चीन में बने कुछ पार्ट्स का इस्तेमाल बढ़ा रही है।
- इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की एयरोस्पेस फोर्स से जुड़े कार्यक्रमों में की जा रही है।
- यह ईरान की ‘लुक ईस्ट’ रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत ईरान पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता कम करके रूस और चीन के साथ सैन्य और तकनीकी सहयोग बढ़ा रहा है।
- रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें भी दे रहा है। इनकी मदद से ईरानी सेना सैन्य ठिकानों की निगरानी और हमलों के लिए लक्ष्य तय करने की क्षमता बढ़ा सकती है।
- चीन भी ईरान को कई तरह की तकनीकी मदद दे रहा है। इसमें बेईदोऊ नेविगेशन सिस्टम, रडार और निगरानी तकनीक के साथ ठोस ईंधन वाली मिसाइलों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली चीजे शामिल है।
रूस ने ईरान की मदद करने पर इनकार किया था
रूस और ईरान ने इन सामानों की आपूर्ति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। रूस पहले भी ईरान को सैन्य सामान देने की खबरों से इनकार करता रहा है। रूस ने घोषित सैन्य सहयोग के अलावा ईरान को किसी तरह की सैन्य सामग्री देने से लगातार इनकार किया है।
पश्चिमी खुफिया एजेंसियां सार्वजनिक रूप से यह बताने को तैयार नहीं हैं कि ईरान ने अपने सैन्य भंडार को कितनी तेजी से दोबारा तैयार किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली खुफिया एजेंसियां इस बात से हैरान थीं कि ईरान अपने कुछ मिसाइल भंडार को इतनी तेजी से फिर तैयार करने में सफल रहा।
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