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कोरबा में एसईसीएल की मानिकपुर विस्तार परियोजनाओं को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई के विरोध में दादर खुर्द वार्ड क्रमांक 34 के ग्रामीणों और भू-विस्थापित संगठन ने घर-घर जाकर लोगों से जनसुनवाई में शामिल नहीं होने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक वर्षों से लंबित पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होता, तब तक वे परियोजना विस्तार का विरोध जारी रखेंगे। 1964 में हुआ था जमीन का अधिग्रहण प्रभावित ग्रामीणों के मुताबिक, उनकी जमीन का अधिग्रहण 1964 में बेहद कम मुआवजे पर किया गया था। छह दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद कई परिवार आज भी पुनर्वास, उचित मुआवजा और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ परिवारों की जमीन पर खदान शुरू हो चुकी है, जबकि शेष जमीन का अधिग्रहण करीब 6.50 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से किए जाने की तैयारी है। आठ गांवों के ग्रामीणों से मिले जय सिंह अग्रवाल पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जय सिंह अग्रवाल ने मंगलवार को मानिकपुर परियोजना से प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों से मुलाकात की। ग्रामीणों ने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया। अग्रवाल ने कहा कि जिस जमीन पर लोगों की पीढ़ियां गुजर गईं, उस जमीन से जुड़े परिवार आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पुराने मामलों का समाधान किए बिना खदान विस्तार की जनसुनवाई करना प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय है। उन्होंने एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन को पत्र लिखकर 21 अगस्त की जनसुनवाई स्थगित करने और पहले प्रभावित ग्रामीणों के साथ बातचीत कर समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। 500 विस्थापितों को निजी कंपनियों में रोजगार पर सहमति इधर, पार्षदों और बीएमएस यूनियन के प्रतिनिधियों ने मानिकपुर के महाप्रबंधक सुशील गर्ग से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि मानिकपुर क्षेत्र में आने वाली निजी कंपनियों में सबसे पहले भूमि विस्थापितों को रोजगार दिया जाए। चर्चा के दौरान करीब 500 भूमि विस्थापितों को निजी कंपनियों में नौकरी देने और उन्हें ठेकेदारी में प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र की खराब सड़कों, पुल-पुलियों की मरम्मत और बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण की मांग भी रखी। ग्रामीण बोले- विकास का विरोध नहीं, अन्याय का विरोध पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय करके नहीं चुकाई जा सकती। ग्रामीणों का कहना है कि पहले उनके वर्षों पुराने पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार के मामलों का निराकरण किया जाए, इसके बाद ही परियोजना विस्तार को लेकर आगे की प्रक्रिया की जाए।
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SECL की मानिकपुर विस्तार परियोजना पर ग्रामीणों का विरोध:पूर्व मंत्री, ग्रामीण और श्रमिक संगठन ने खोला मोर्चा,62 साल बाद भी मुआवजा-रोजगार के लिए संघर्ष
