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42 गांवों में पहली महिला बनी PhD धारक:DDU में मिला 478 को डिग्री, जानिए खानदान बदलने वाली बेटियों- बहुओं की कहानी




दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में मंगलवार को 478 पीएचडी स्कॉलर्स को डिग्री देखर सम्मानित किया गया। इस दौरान कई ऐसे भी शोधकर्ता सामने आईं, जिन्होंने अपने खानदान में पहली पीएचडी की उपाधि हासिल की है। एक तरफ महाराजगंज की रहने वाली सीमा भारती अपने मायके और ससुराल के 42 गांवों में पहली ऐसी महिला जिन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनके पिता मजदूरी करते हैं और पति वकील हैं। वहीं रायपुर की रहने वाली नीलम निषाद भी अपने मायके और ससुराल के खानदान में पहली महिला बनी हैं, जिनके नाम के आगे डॉक्टर लग चुका है। उनके पिता एक किसान हैं और हसबैंड आर्मी मैन। इसके अलावा प्रयागराज की रहने वाली प्रिया गुप्ता भी अपने खानदान और कॉलोनी की पहली बेटी हैं, जिन्होंने लॉ में पीएचडी की उपाधि हासिल की है। उनके पिता एक रिटायर्ड गवर्नमेंट ऑफिसर हैं। वहीं ज्योति गुप्ता भी अपने परिवार और खानदान की एकलौती बेटी हैं, जिन्होंने संस्कृत विषय से पीएचडी की है। उनके पिता खुद की बिजनेस करते हैं। पिता मजदूर, पति के साथ से बनेंगी प्रोफेसर नंदानगर की रहने वाली सीमा भारती के पिता राधेश्याम भारती एक मजदूर हैं। फिर भी बेटी को पढ़ाई में हमेशा सपोर्ट किए। लेकिन घर की परिस्थियों को देखते हुए 2012 में उनकी शादी महाराजगंज के एडवोकेट राजेश कुमार से कर दी गई। तब सीमा सिर्फ 12th तक पढ़ी थी और ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया था। शादी के बाद उन्हें लगा कि उनका सपना टूट सा गया। पढ़ाई छूट जाएगी। हालांकि पति के सपोर्ट की वजह से उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। सीमा का कहना है कि राजेश ने घर वालों की नाराजगी के बावजूद उनका साथ दिया। बच्चे होने के बाद पढ़ाई जारी रखना मुश्किल लग रहा था लेकिन फिर भी पति के हर कदम पर साथ से पीएचडी में एडमिशन लिया। दो- दो बच्चों को पालते हुए आज उन्होंने लॉ से पीएचडी पूरी कर ली है। ऐसा करने वाली वह अपने मायके और ससुराल के 40 गांवों में पहली महिला बन गई हैं, जिन्होंने इतनी अधिक पढ़ाई की है। उनका कहना है कि आगे चलकर वह एक प्रोफेसर बनेंगी और अपने जैसी हर लड़की की सपोर्ट करेंगी। किसान की बेटी के नाम आगे लगा डॉक्टर वहीं सहजनवा की रहने वाली नीलम निषाद भी अपने मायके और ससुराल दोनों के खानदान में पहली लड़की और बहू हैं जिन्होंने अपनी पीएचडी कम्प्लीट करके डॉक्टर की उपाधि हासिल की है। उन्होंने बताया कि उनके पिता कैलाश निषाद एक किसान हैं। खेती करके ही सही उन्होंने हमेशा पढ़ाई में सपोर्ट किया। नीलम की शादी नवंबर 2025 में रायपुर के संदीप साहनी से हुई है। पति एक आर्मि मैन हैं। नीलम का कहना है कि पढ़ाई को लेकर जितने सपोर्टिव उनके पिता थे उतना ही साथ हसबैंड और ससुराल वाले भी दिए। जिससे आज यह सफलता मिली है। नीलम के अनुसार उन्होंने बचपन में ही न्यूज पेपर में किसी को उपाधि पाते देखा था। उन्हें फोटो देखकर बहुत अच्छा लगा। तभी से सोच लिया कि एक दिन जरूर इतना पढ़ाई करुंगी और यह उपाधि हासिल करके रहूंगी। परिवार की पहली लड़की ने लॉ से की पीएचडी
इसके अलावा प्रयागराज की रहने वाली प्रिया गुप्ता भी अपने खानदान और कॉलोनी की पहली बेटी हैं, जिन्होंने लॉ में पीएचडी की उपाधि हासिल की है। इससे पहले उनकी बड़ी बहन ने किसी और सब्जेक्ट से पीएचडी की है। उनके पिता एक रिटायर्ड गवर्नमेंट ऑफिसर हैं। प्रिया का कहना है कि हमेशा से परिवार का सपोर्ट रहा है लेकिन पीएचडी के दौरान कई बार ऐसा समय आया जब हिम्मत छूटने लगी। लगा कि अब आगे नहीं हो सकता। हालांकि टीचर्स की मोटिवेशन से शोध जारी रखा। आज नाम के आगे डॉक्टर लग गया जिससे बहुत खुशी हो रही। परिवार की पहली बेटी संस्कृत को देंगी बढ़ावा
वहीं ज्योति गुप्ता भी अपने परिवार और खानदान की एकलौती बेटी हैं, जिन्होंने संस्कृत विषय से पीएचडी की है। उनके पिता खुद की बिजनेस करते हैं। ज्योति ने बताया कि बचपन से ही उन्हें संस्कृत विषय पसंद है। लेकिन आज के दौर में उसकी एहमियत कम होती नजर आ रही है। जिसको देखते हुए मैंने संस्कृत विषय ही पीएचडी के लिए चुना। जिससे यूथ को उसकी महत्ता को समझा सकें। डीडीयू के प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग की शोधार्थी श्यामली जायसवाल को उनके शोध-कार्य के लिए डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई है। उनकी यह उपलब्धि प्राचीन इतिहास और पुरातत्त्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धि मानी जा रही है। श्यामली जायसवाल ने अपना शोध-प्रबंध “मध्य गंगा घाटी में अधिवास प्रक्रिया और संस्कृतियों का विकास (प्रारम्भ से ऐतिहासिक काल तक)” विषय पर पूरा किया। उनका शोध कार्य प्रो० कमलेश कुमार गौतम, प्रोफेसर, प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग के निर्देशन और देखरेख में संपन्न हुआ।



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