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शिक्षणेतर कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन:अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की लंबित मांगों पर की अपील




औरैया में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेतर संघ ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेतर कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की है। संघ ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से सौंपा, जिसमें लंबित मांगों पर शीघ्र शासनादेश जारी करने की अपील की गई। संघ के जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार दीक्षित और महामंत्री पंकज भदौरिया ने ज्ञापन में बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं से पूर्व में भी शासन और शिक्षा विभाग को अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कई मांगों पर सहमति और आश्वासन मिलने के बावजूद शासनादेश जारी न होने से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।
ज्ञापन में अर्हताधारी शिक्षणेतर कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति का प्रावधान करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, राजकीय कर्मचारियों की भांति सेवानिवृत्ति पर 300 दिन के उपार्जित अवकाश का नकदीकरण और शिक्षकों की तरह निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। संघ ने विद्यालयों की प्रबंध समितियों में शिक्षणेतर कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और राष्ट्रपति/राज्य पुरस्कारों के लिए प्रावधान किए जाने की भी मांग उठाई। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लिपिक पद पर पदोन्नति के लिए सीसीसी डिप्लोमा की अनिवार्यता समाप्त करने की भी अपील की गई। इसके साथ ही, हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट विद्यालयों के लिपिकों की वेतन विसंगति दूर करने, नगर प्रतिकर भत्ता, स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता और कोरोना काल की महंगाई भत्ता संबंधी सुविधाएं बहाल करने की मांग की गई। एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने और पदोन्नति पर पूर्व की भांति वेतन वृद्धि प्रदान करने की भी अपील की गई। संघ ने लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति प्रक्रिया पुनः शुरू करने की मांग की। साथ ही, आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन सीधे कोषागार के माध्यम से देने और उनके लिए सेवा सुरक्षा नियमावली बनाने की भी मांग रखी गई। संघ पदाधिकारियों ने सरकार से इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई कर शासनादेश जारी करने का आग्रह किया, ताकि वर्षों से लंबित इन समस्याओं का समाधान हो सके।



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