Child Memory Growth Rules; Exam Anxiety – Brain Development Activities


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13 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- मैं लखनऊ से हूं। मेरा 13 साल का बेटा पढ़ाई में मेहनती है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद नहीं रहता। परीक्षा के समय वह अक्सर ब्लैंक हो जाता है और कहता है, “सब पढ़ा था, लेकिन याद नहीं आया।”

हमें समझ नहीं आता कि समस्या उसकी याददाश्त में है, पढ़ने के तरीके में या परीक्षा के तनाव में। हम उसकी पढ़ाई और याद रखने की क्षमता कैसे बेहतर बना सकते हैं?

एक्सपर्ट-

रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई

डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइटटुडे’

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर बच्चा एक जैसा नहीं सीखता। कई बार माता-पिता मान लेते हैं कि बच्चा पढ़ा हुआ भूल जाता है, इसलिए उसकी याददाश्त कमजोर है। जबकि ज्यादातर मामलों में समस्या याददाश्त (मेमोरी) की नहीं, बल्कि इन चीजों की होती है-

  • लर्निंग स्ट्रैटजी यानी सीखने का तरीका।
  • अटेंशन यानी ध्यान।
  • रिवीजन की कमी।
  • एग्जाम एंग्जाइटी यानी परीक्षा का तनाव।

13 साल की उम्र में बच्चे का ब्रेन अभी भी तेजी से विकसित हो रहा होता है। अगर सही तरीके से पढ़ाई, पर्याप्त नींद, संतुलित पोषण और नियमित अभ्यास मिले, तो उसकी सीखने और याद रखने की क्षमता में काफी सुधार हो सकता है।

बच्चे को पढ़ी हुई चीजें याद क्यों नहीं रहतीं?

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, ग्राफिक में देखिए-

समझने की बजाय रटने की कोशिश

कई बार बच्चे पढ़ाई के दौरान विषय को समझने की बजाय सिर्फ शब्दों को याद करने की कोशिश करते हैं। इसे ‘रोट लर्निंग’ यानी रटकर पढ़ना कहते हैं। ऐसी जानकारी कुछ समय के लिए तो याद रहती है, लेकिन जल्द ही भूल जाती है।

इसके उलट, जब बच्चा किसी विषय का मतलब, कारण और उससे जुड़े उदाहरण समझकर पढ़ता है, तो वह जानकारी ब्रेन में लंबे समय तक रहती है और जरूरत पड़ने पर आसानी से याद भी आ जाती है। इसलिए अच्छी याददाश्त की शुरुआत समझकर पढ़ने-सीखने से होती है, सिर्फ रटने से नहीं।

मेमोरी कैसे काम करती है?

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि हमारी याददाश्त कैसे काम करती है। ब्रेन में किसी भी जानकारी को ग्रहण करने और याद करने की प्रक्रिया के तीन चरण होते हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं-

1. इनकोडिंग (जानकारी को ग्रहण करना)

  • इसका मतलब है कि बच्चा पढ़ते समय जानकारी को कितनी अच्छी तरह समझ रहा है।
  • अगर पढ़ते समय उसका ध्यान ही नहीं है, तो जानकारी ब्रेन तक पहुंचेगी ही नहीं।

2. स्टोरेज (जानकारी को सुरक्षित रखना)

  • बच्चे ने पढ़कर जो बात समझी, वह उसके ब्रेन में स्टोर होती है।
  • यूं समझिए कि ब्रेन की हार्ड ड्राइव में सेव हो जाती है।

2. रिवीजन (जानकारी को बार-बार दोहराना)

यहां एक महत्वपूर्ण बात की ओर ध्यान दिलाना जरूरी है।

  • हमारा ब्रेन सिर्फ एक बार ग्रहण की गई जानकारी को सेव तो कर लेता है, लेकिन वो ब्रेन के मुख्य डेटा सेंटर में नहीं रखता।
  • उसके लिए जरूरी है कि उसे बार–बार दोहराया जाए यानी रिवीजन किया जाए।
  • हम जितनी बार रिवीजन करते हैं, जानकारी ब्रेन में उतनी ही मजबूत हो जाती है।
  • इसीलिए तो कक्षा में बच्चे को पूरे साल रोज सिर्फ A, B, C, D ही लिखवाया जाता है।
  • रोज एक ही चीज को रिवाइज करने से वो दिमाग में बैठ जाती है।
  • इनमें से अगर किसी भी स्टेप में समस्या होगी तो बच्चा एग्जाम में ब्लैंक हो सकता है।

ग्राफिक में मेमोरी के काम का तरीका समझिए-

क्या यह मेमोरी की समस्या है?

जरूरी नहीं है कि ऐसा हो। समस्या मेमोरी की है या एग्जाम स्ट्रेस की, इसे समझने के लिए पहले आपको कुछ बुनियादी सवाल पूछने होंगे। जैसेकि-

  • क्या बच्चा पढ़ते समय ध्यान देता है?
  • क्या उसे क्लास में पढ़ाया गया लेसन समझ में आता है?
  • क्या वह बिना देखे दोबारा बता सकता है?
  • क्या वह सिर्फ परीक्षा में भूलता है?
  • क्या वह घर में भी रोजमर्रा की बातें भूलता है?
  • क्या वह होमवर्क, बैग या डेली लाइफ की जरूरी चीजें भी बार-बार भूल जाता है?

याद रखें: अगर बच्चे को बाकी बातें याद रहती हैं और वो सिर्फ परीक्षा में भूल रहा है, तो इसका कारण परीक्षा का तनाव या पढ़ने की तकनीक हो सकती है।

याद रखने के 5 गोल्डन रूल

1. सिर्फ रटें नहीं, समझें

रटने की बजाय विषय को समझने की कोशिश करें। समझी हुई जानकारी ज्यादा समय तक याद रहती है।

2. किताब बंद करके खुद से जवाब याद करें

सिर्फ बार-बार पढ़ने की बजाय, बिना देखे खुद से याद करने की कोशिश करना। इसे ‘एक्टिव रिकॉल’ कहते हैं।

3. एक ही दिन सब पढ़ने की बजाय गैप लेना, रिवीजन करना

आज जो पढ़ा, उसे फिर अगले दिन, फिर 3, 7 और 15 दिन बाद दोहराना। इसे ‘स्पेस्ड रिपीटीशन’ कहते हैं।

4. जो सीखा, उसे किसी और को समझाएं

जब बच्चा किसी विषय को अपने शब्दों में समझा पाता है, तो वह जानकारी उसे लंबे समय तक याद रहती है।

5. अच्छी नींद और नियमित ब्रेक लें

नींद के दौरान ब्रेन दिन भर की सीखी हुई जानकारी को ब्रेन के लॉन्ग टर्म मेमोरी सेंटर में सेव करता है। इसलिए अच्छी, पूरी नींद बहुत जरूरी है। साथ ही लगातार घंटों पढ़ने की बजाय बीच-बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लेना भी जरूरी है।

याददाश्त बढ़ाने के कुछ आसान तरीके ग्राफिक में देखिए-

बच्चे की मदद कैसे करें?

बच्चा जब स्कूल से पढ़कर आए तो उससे ये 6 सवाल पूछें-

कहीं बच्चे को ‘एग्जाम एंग्जाइटी’ तो नहीं?

कई बार ऐसा होता है कि बच्चे को सब आता है, लेकिन परीक्षा शुरू होते ही-

  • दिल तेज धड़कने लगता है।
  • हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं।
  • दिमाग खाली लगने लगता है।

इसे ‘एग्जाम एंग्जाइटी’ कहते हैं। स्ट्रेस बढ़ने पर शरीर में कॉर्टिसोल हॉर्मोन बढ़ता है। ज्यादा कॉर्टिसोल हमारे ब्रेन के दो जरूरी हिस्सों हिप्पोकैम्पस और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। ये दोनों वो हिस्से हैं, जो मेमोरी और डिसिजन मेकिंग के लिए जिम्मेदार हैं।

‘एग्जाम एंग्जाइटी’ कम करने के लिए पेरेंट्स क्या करें?

  • नंबर नहीं, तैयारी पर ध्यान दें। नतीजे से ज्यादा बच्चे की मेहनत की तारीफ करें।
  • तुलना करने से बचें। भाई-बहन या दूसरे बच्चों से तुलना तनाव बढ़ाती है।
  • परीक्षा को ‘जीवन का आखिरी मौका’ न बनाएं। बच्चे को समझाएं कि एक परीक्षा उसका भविष्य तय नहीं करती।
  • घर का माहौल शांत और सकारात्मक रखें। डांट-डपट या बार-बार पढ़ने का दबाव न बनाएं।
  • मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस करवाएं। इससे परीक्षा जैसा माहौल परिचित लगता है और घबराहट कम होती है।
  • पर्याप्त नींद, अच्छी डाइट का ख्याल रखें। थकान और नींद से एंग्जाइटी बढ़ती है।
  • परीक्षा वाले दिन दबाव न बनाएं। कहें- “तुमने अच्छी तैयारी की है, अपना बेस्ट देना।”
  • बच्चे की भावनाएं सुनें। अगर वह डर या घबराहट की बात करे, तो उसे नकारने की बजाय भरोसा दिलाएं।

अच्छी मेमोरी के लिए जरूरी पोषक तत्व

याददाश्त केवल पढ़ाई पर नहीं, बल्कि पोषण पर भी निर्भर करती है, क्योंकि जरूरी पोषक तत्व-

  • ब्रेन की कोशिकाओं को स्वस्थ और सक्रिय रखने में मदद करते हैं।
  • नई जानकारी को सीखने और लंबे समय तक याद रखने में मदद करते हैं।
  • फोकस और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • मस्तिष्क और नसों के बीच कम्युनिकेशन को बेहतर बनाते हैं।
  • मानसिक थकान कम करने और सीखने की क्षमता बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • इनकी कमी से याददाश्त, सीखने की क्षमता और पढ़ाई में परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकता है।

अच्छी मेमोरी के लिए कौन-से न्यूट्रिएंट्स लेने जरूरी हैं, ग्राफिक में देखिए-

आइए विस्तार से समझते हैं कि ये पोषक तत्व क्या काम करते हैं और ये किस फूड में होते हैं।

1. ओमेगा-3 फैटी एसिड (DHA)

क्यों जरूरी: मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण।

कैसे मिलेगा: मछली, अखरोट, अलसी के बीज।

2. आयरन

क्यों जरूरी: फोकस और सीखने की क्षमता के लिए जरूरी।

कैसे मिलेगा: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, बीन्स, गुड़, बाजरा।

3. विटामिन B12

क्यों जरूरी: नर्वस सिस्टम, ब्रेन फंक्शन और मेमोरी के लिए जरूरी।

कैसे मिलेगा: दूध, दही, पनीर, अंडा, मीट।

4. फोलेट (Vitamin B9)

क्यों जरूरी: ब्रेन डेवलपमेंट और कोशिकाओं के काम में मददगार।

कैसे मिलेगा: हरी पत्तेदार सब्जियां, चना, राजमा।

5. विटामिन D

क्यों जरूरी: इसकी कमी का सीधा संबंध सीखने की क्षमता और मूड से है।

कैसे मिलेगा: धूप, फोर्टिफाइड दूध, अंडा, सप्लीमेंट।

6. जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम

क्यों जरूरी: ब्रेन और नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज में मदद करते हैं।

कैसे मिलेगा: कद्दू के बीज, दालें, मेवे, साबुत अनाज आदि।

7. आयोडीन

क्यों जरूरी: थायरॉइड हॉर्मोन के जरिए ब्रेन डेवलपमेंट के लिए जरूरी।

कैसे मिलेगा: आयोडीन युक्त नमक, डेयरी, सी-फूड।

याद रखें: कोई भी विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट बिना डॉक्टर की सलाह के न दें। कमी का संदेह होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है। अपनी तरफ से बच्चे को ऊपर दिए गए जरूरी विटामिन्स–मिनरल्स से भरपूर संतुलित खाना खिलाएं।

कब डॉक्टर या विशेषज्ञ से मिलना चाहिए?

इन स्थितियों में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट, डेवलपमेंटल पीडियाट्रिशियन या जरूरत पड़ने पर न्यूरोलॉजिस्ट से मिलें। अगर बच्चा-

  • रोजमर्रा की बातें भी भूलने लगे।
  • पढ़ाई से जुड़े मामूली इंस्ट्रक्शन भी याद न रख पाए।
  • बच्चे का ध्यान बहुत ज्यादा भटकता हो।
  • पढ़ने के बावजूद उसे कुछ समझ में न आए।
  • स्कूल में बच्चे का परफॉर्मेंस लगातार गिरता जाए।
  • बच्चे में चिंता, उदासी या व्यवहार में बदलाव दिखे।

अंत में यही कहूंगी कि हर बच्चे का सीखने और याद रखने का तरीका अलग होता है। अगर बच्चा मेहनत कर रहा है, लेकिन पढ़ा हुआ याद नहीं रह रहा, तो उसे डांटने या दूसरों से तुलना करने की बजाय उसकी पढ़ाई की तकनीक, दिनचर्या और मानसिक स्थिति पर ध्यान दें। सही अभ्यास, रेगुलर रिवीजन से याददाश्त और आत्मविश्वास, दोनों बेहतर हो सकते हैं।

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