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यमुनानगर। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले यमुनानगर के पंजेटो गांव निवासी मर्चेंट नेवी नाविक गुरप्रीत सिंह बाठ की मौत को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक उसका पार्थिव शरीर भारत नहीं पहुंच पाया है। परिजन अब भी उसके शव के भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि डीएनए सैंपल की रिपोर्ट भी संबंधित कंपनी और अधिकारियों को भेजी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद शव कब तक भारत आएगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। गुरप्रीत के मामा अमरीक सिंह ने बताया कि परिवार लगातार शिपिंग कंपनी के संपर्क में है। कंपनी की ओर से शव जल्द भारत भेजे जाने को लेकर फिलहाल कोई निश्चित उम्मीद या समय-सीमा नहीं बताई गई है। उनका कहना है कि परिवार टकटकी लगाए बैठा है और हर दिन इस इंतजार में गुजर रहा है कि कब गुरप्रीत का पार्थिव शरीर घर पहुंचेगा। डीएनए रिपोर्ट भेजी, फिर भी नहीं मिली शव आने की जानकारी परिजनों के अनुसार मिसाइल हमले में कई नाविकों की मौत के बाद शव बुरी तरह झुलस गए थे, जिसके कारण उनकी सामान्य तरीके से पहचान करना मुश्किल हो गया। इसी वजह से मृतकों की पहचान के लिए परिजनों से डीएनए सैंपल लिए गए थे। गुरप्रीत के पिता कीर्तन सिंह का डीएनए सैंपल भी लिया गया था। परिवार की ओर से डीएनए रिपोर्ट संबंधित कंपनी को भेजी जा चुकी है। अमरीक सिंह का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है कि हमले में मारे गए सभी नाविकों के परिजनों की डीएनए रिपोर्ट अभी कंपनी तक नहीं पहुंची है। इसी वजह से शवों की पहचान और उन्हें संबंधित देशों में भेजने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। हालांकि, गुरप्रीत के परिवार की ओर से जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और वे लगातार कंपनी से अपडेट मांग रहे हैं। अपने स्तर पर कर रहे शव भारत लाने के प्रयास अमरीक सिंह ने आरोप लगाया कि गुरप्रीत के शव को भारत लाने के मामले में सरकार और प्रशासन की ओर से परिवार को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि परिवार अपने स्तर पर ही कंपनी और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर पार्थिव शरीर को भारत लाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि गुरप्रीत परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद परिवार पहले ही गहरे सदमे में है और अब एक माह से अधिक समय से शव के इंतजार ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। परिवार की मांग है कि सरकार और संबंधित अधिकारी कंपनी से समन्वय कर गुरप्रीत के पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। छह माह की बेटी, परिवार को था घर लौटने का इंतजार गुरप्रीत करीब डेढ़ साल पहले शादी के बंधन में बंधा था और छह माह पहले ही बेटी का पिता बना था। वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रहा था। उसके पिता कीर्तन सिंह का वर्ष 2016 में सड़क हादसे के बाद एक पैर कट गया था। ऐसे में गुरप्रीत परिवार का बड़ा सहारा था। 19 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए मर्चेंट वेसल पर क्रूज मिसाइल से हमला हुआ था। इस हमले में गुरप्रीत सिंह समेत चार भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी, जबकि एक भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल हुआ था। हमले में कुल 10 लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी। अब एक माह से अधिक समय बाद भी गुरप्रीत के पार्थिव शरीर का इंतजार उसके परिवार को है। परिजनों का कहना है कि वे सरकार से किसी विशेष मदद की मांग नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि संबंधित एजेंसियां और कंपनी आपसी समन्वय कर शव की पहचान और भारत भेजने की प्रक्रिया जल्द पूरी करें, ताकि वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सकें।
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एक माह बाद भी नहीं आया गुरप्रीत का शव:यमुनानगर में परिवार कर रहा इंतजार, यूक्रेन मिसाइल हमले में गई थी जान
