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Supreme Court Ruling: Police Cannot File FIR in PCPNDT Cases


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अब पुलिस भ्रूण का लिंग पता लगाने वाले मामलों पर FIR नहीं कर सकती। PCPNDT कानून के तहत अब एक स्पेशल टीम इन मामलों पर कार्रवाई करेगी। अब पुलिस अल्ट्रासाउंड सेंटर या अस्पताल पर छापा नहीं मार सकती।

यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांचकर्ता नहीं है और जहां तक संभव हो, पुलिस की मदद लेने से बचना चाहिए।

जांच भी नहीं कर सकती पुलिस

बेंच ने कहा कि प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स एक्ट, 1994 से जुड़े मामलों में मेडिकल जानकारी और संवेदनशीलता की जरूरत हो सकती है।

  • कोर्ट ने कहा कि PCPNDT कानून के तहत होने वाले अपराधों के लिए पुलिस मुख्य जांच अधिकारी नहीं है।
  • पुलिस सीधे तौर पर न तो FIR कर सकती है और न ही डॉक्टरों या अस्पतालों के खिलाफ एक्शन ले सकती है।
  • पुलिस सिर्फ तभी कार्रवाई कर सकती है, जब उपयुक्त प्राधिकारी उनसे मदद मांगे।
  • बेंच ने कहा की यह कानून चिकित्सा ज्ञान से जुड़ा है, इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस की सहायता लेने से बचा जाना चाहिए।

AA को शिकायत और जांच का अधिकार

PCPNDT एक्ट की धारा 17(4) के तहत AA के काम में इस कानून के अपराधों की शिकायत दर्ज करना और उनकी जांच करना शामिल है।

  • किसी भी अस्पताल या क्लिनिक में जाकर औचक निरीक्षण करना, छापा मारना और रिकॉर्ड खंगालने का काम AA करेगी।
  • अगर कोई डॉक्टर गलत काम करते पाया जाता है, तो अल्ट्रासाउंड मशीन, कंप्यूटर या अन्य मेडिकल रिकॉर्ड को AA जब्त कर सकती है.
  • दोषी पाए जाने वाले सेंटर का रजिस्ट्रेशन और डॉक्टर का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
  • आरोपी डॉक्टर या अस्पताल के खिलाफ केस रजिस्टर करने के लिए AA सीधे कोर्ट (मजिस्ट्रेट) के पास जाएगी, न कि पुलिस स्टेशन।

PCPNDT एक्ट क्या है?

PCPNDT कानून का उदेश्य लिंग जांचने पर पूरी तरह रोक लगाना है। यह कानून देश में लगातार कम हो रही लड़कियों की संख्या और भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लाया गया था।

इसके तहत देश के हर क्लिनिक और लैब का सरकारी रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है जहां अल्ट्रासाउंड या जेनेटिक जांच की मशीनें होती हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के ऐसी मशीन रखना भी अपराध है।

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