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सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यों की हाई-पावर्ड कमेटी बनाई है। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। यह समिति उन आरोपों की जांच करेगी, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और दूसरे सुरक्षा कर्मियों के बल प्रयोग के आरोप लगाए गए थे। दिल्ली पुलिस बोली- CJP का संसद मार्च गैरकानूनी था दिल्ली पुलिस ने 18 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी परमिशन नहीं थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे। पुलिस ने बताया कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा। हालात संभालने के लिए बल प्रयोग किया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर ये जानकारी दी थी। इसे पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब के तौर पर पेश किया गया था।
CJP प्रोटेस्ट 49 दिन चला, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जबकि CJP ने पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई। खबर अपडेट हो रही है…
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जंतर-मंतर प्रोटेस्ट-सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति बनाई:पूर्व जज को अध्यक्ष बनाया, प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों की जांच करेंगे
